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आओ प्लास्टिक खत्म करें: चाहे कुछ हो जाए मगर पीटीसी वाली आंटी पॉलिथीन में सामान नहीं देंगी
Mon, 16 Sep 2019 01:24 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 16 Sep 2019 01:24 PM IST
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कागज के लिफाफे में सामान
- फोटो : अमर उजाला
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प्लास्टिक के खिलाफ लड़ी जा रही जंग में सेक्टर 40 सी में पीटीसी का स्टोर चलाने वाली स्वीटी बंसल डटकर खड़ी हैं। स्वीटी के सामने कई बार लोगों ने उनके इस अभियान का विरोध जताया, मगर वे चुप नहीं बैठीं और अपने इरादे के सामने अडिग रहीं। उन्होंने पिछले तीन साल से अपने स्टोर में पॉलिथीन पर रोक लगा रखी है। वे किसी भी ग्राहक को पॉलिथीन में सामान नहीं देती। लोग जिद करते हैं। झगड़ते हैं। बहस करते हैं। सामान नहीं खरीदने की धमकी देते हैं। मगर वे नहीं पसीजती हैं।
भले ही ग्राहक बिना सामान लिए वापस चला जाए। कई ग्राहक चले भी जाते हैं। मगर उनकी इन बातों का स्वीटी पर कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें इस बात की भी चिंता नहीं है कि उनका सामान बिके या नहीं। स्वीटी बंसल का कहना है कि उन्हें अखबारों से ही पता चला है कि पॉलिथीन पर्यावरण के लिए कितना बड़ा खतरा है। इसके लिए आज नहीं चेते तो आगे जीना मुश्किल हो जाएगा। पर्यावरण बर्बाद हो जाएगा। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री ने भी इस बारे में चेताया था।
वे अपने ग्राहकों को सामान कागज के लिफाफे में देती हैं या फिर चावल व दाल के कट्टे में। अब उनके अधिकतर ग्राहक अपने घर से ही थैला लाते हैं। आसपास के लोग भी कहते हैं कि पीटीसी वाली आंटी थैला नहीं देंगी। आसपास के पार्क में ताश खेलने वाले बुजुर्ग भी अपने घर से थैला साथ लाते हैं। पार्क से जब वे घर वापस जाते हैं तो उसी थैले में सामान लेकर घर जाते हैं।
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भले ही ग्राहक बिना सामान लिए वापस चला जाए। कई ग्राहक चले भी जाते हैं। मगर उनकी इन बातों का स्वीटी पर कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें इस बात की भी चिंता नहीं है कि उनका सामान बिके या नहीं। स्वीटी बंसल का कहना है कि उन्हें अखबारों से ही पता चला है कि पॉलिथीन पर्यावरण के लिए कितना बड़ा खतरा है। इसके लिए आज नहीं चेते तो आगे जीना मुश्किल हो जाएगा। पर्यावरण बर्बाद हो जाएगा। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री ने भी इस बारे में चेताया था।
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वे अपने ग्राहकों को सामान कागज के लिफाफे में देती हैं या फिर चावल व दाल के कट्टे में। अब उनके अधिकतर ग्राहक अपने घर से ही थैला लाते हैं। आसपास के लोग भी कहते हैं कि पीटीसी वाली आंटी थैला नहीं देंगी। आसपास के पार्क में ताश खेलने वाले बुजुर्ग भी अपने घर से थैला साथ लाते हैं। पार्क से जब वे घर वापस जाते हैं तो उसी थैले में सामान लेकर घर जाते हैं।
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स्वीटी बंसल ने दुकान में एक बोर्ड भी लगा रखा है, जिस पर लिखा है कि कृपया थैला मांगकर शर्मिंदा न करें। वे बताती हैं कि जब वे लोग सब्जी मंडी जाते हैं तो घर से ही अपना थैला लेकर जाते हैं। सब्जी मंडी के दुकानदारों को भी वे जागरूक करती हैं कि वे पॉलिथीन का इस्तेमाल न करें। इसके इस्तेमाल करने पर पांच हजार का चालान कट सकता है। प्रधानमंत्री के बार-बार प्लास्टिक के जिक्र के बाद से वे इस अभियान में और ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएंगी। उनका कहना है कि अब वे दुकान में आने वाले हर व्यक्ति और बच्चे को पॉलिथीन के प्रति जागरूक करेंगी।
प्लास्टिक के खिलाफ छेड़ी है जंग तो हमें बताएं
अमर उजाला के अभियान के साथ आप भी जुड़ सकते हैं। यदि आपने प्लास्टिक के खिलाफ भले ही छोटी शुरुआत की हो तो हमें बताएं। आपके प्रयासों को हम प्रकाशित करेंगे। यदि प्लास्टिक के खिलाफ आप कोई जागरूकता अभियान चलाना चाहते हैं या लोगों को शिक्षित करना चाहते हैं तब भी हमें बता सकते हैं। इसके लिए आपको व्हाट्सएप नंबर 7617566174 पर मैसेज करना होगा या chd-cityreporter@chd.amarujala.com पर ई-मेल करना होगा। कार्यक्रम की सूचना एक दिन पहले देनी होगी।
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