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अमर उजाला से विशेष बातचीत: फेसबुक ने 14 लाख पोस्ट को हटाया, सार्वजनिक नीति निदेशक राजीव अग्रवाल ने बताई वजह
Fri, 18 Feb 2022 07:41 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 18 Feb 2022 07:41 PM IST
सार
फेसबुक इंडिया के सार्वजनिक नीति निदेशक राजीव अग्रवाल ने अमर उजाला से विशेष बातचीत की। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव को लेकर कंट्रोल रूम बनाया है। पार्टी विज्ञापन पर कितना खर्च करती हैं, लोग यह देख सकते हैं।
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फेसबुक इंडिया के सार्वजनिक नीति निदेशक राजीव अग्रवाल
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विस्तार
सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा और हिंसा फैलाने वाले पोस्ट की संख्या बढ़ती जा रही है। फेसबुक इंडिया के सार्वजनिक नीति निदेशक राजीव अग्रवाल ने अमर उजाला से विशेष बातचीत की। उन्होंने बताया कि चुनाव के समय में उनकी जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है। इसलिए वह हर पोस्ट पर नजर रख रहे हैं और पिछले छह महीने के दौरान देशभर में अभद्र भाषा और हिंसा फैलाने वाले करीब 14 लाख पोस्ट को फेसबुक से हटाया है। इसके साथ ही मतदान के लिए अपने यूजर्स को रिमाइंडर भी भेजेंगे।
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राजीव अग्रवाल ने कहा कि चुनाव के समय में चुनौती बढ़ जाती है, इसलिए फेसबुक इंडिया ने विभिन्न राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया है। सूचनाओं की प्रमाणिकता की समीक्षा और मूल्यांकन करने के लिए फेसबुक ने भारत में 10 स्वतंत्र थर्ड पार्टी फैक्ट चेकर्स के साथ साझेदारी की है, जो 11 भारतीय भाषाओं में सामग्री की समीक्षा करते हैं।
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उन्होंने बताया कि पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर भी उन्होंने पंजाबी भाषा के फैक्ट चेकर्स की मदद से लाखों पोस्ट पर नजर रखी और जो पोस्ट नियमों के विरुद्ध थे और हिंसा को प्रोत्साहित कर रहे थे, उन्हें हटाया गया। बताया कि पोस्ट को हटाने के के बाद हम उस सामग्री को साझा करने वाले लोगों को सूचित करते हैं। इसके साथ ही जिन्होंने पहले उसे साझा किया है और वह जानकारी गलत है, उस पर चेतावनी का एक लेबल लगाते हुए हम संबंधित फैक्ट चेक आर्टिकल का लिंक शेयर करते हैं, जो उस जानकारी को गलत साबित कर रहा होता है।
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राजीव अग्रवाल ने बताया कि अपनी टीम और तकनीक में 13 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है। पूरी दुनिया में करीब 40 हजार कर्मचारी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं। इसमें 70 भाषाओं में 15,000 से अधिक समर्पित सामग्री समीक्षक शामिल हैं। भारत के लिए, मेटा (फेसबुक) के पास 20 भारतीय भाषाओं में समीक्षक हैं।
लोग देख सकते हैं, फेसबुक पर किस पार्टी ने विज्ञापन पर कितना खर्च किया
सोशल मीडिया के दौर में चुनाव के दौरान ऑनलाइन विज्ञापनों का चलन काफी बढ़ गया है, इसलिए पारदर्शिता लाने के लिए फेसबुक पर कोई भी ये देख सकता है कि किस पार्टी ने फेसबुक पर कब और कितने रुपये का विज्ञापन दिया। राजीव अग्रवाल ने बताया कि फेसबुक पर दिए जाने वाले सभी विज्ञापन हमारी विज्ञापन लाइब्रेरी में सात वर्षों के लिए सुरक्षित रहते हैं और किसी भी समय उनकी समीक्षा की जा सकती है।
इन्हें कोई भी फेसबुक एड लाइब्रेरी को सर्च कर देख सकता है। उन्होंने बताया कि मतदान करने के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप रिमाइंडर भी देंगे। बताया कि व्हाट्सएप फॉरवर्ड पर जो सीमाएं लगाई गई हैं, उनसे व्हाट्सएप पर हाई फॉरवर्डेड मैसेज का प्रसार 70 फीसदी तक कम हो गया है। फेसबुक अभद्र भाषा का प्रचलन अब घटकर केवल 0.03 प्रतिशत रह गया है लेकिन हम जानते हैं कि अभी और काम करना बाकी है।