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मरीजों का इलाज करने के साथ ही पीजीआई जाचं रहा उपकरणों की गुणवत्ता भी
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चंडीगढ़। देश केशीर्ष चिकित्सा संस्थानों में जगह बनाने वाला पीजीआई अब खुद को तकनीकी रूप से भी मजबूत करने में लगा है। इसी कड़ी में पीजीआई ने कोविड काल केदौरान परिसर में उत्तर भारत केपहले बायोेमेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स एंड डिवाइसेज हब लैब की स्थापना की है। इस लैब में पीजीआई अपने मरीजों पर उपयोग होने वाले उपकरणों की विश्वसनीयता केसाथ नए खरीदे गए उपकरणों की गुणवत्ता की भी जांच कर रहा है।
पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम का कहना है कि इसकी मदद से एक तरफ जहां उच्चकोटि केउपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, वहीं मेक इन इंडिया अभियान को भी रफ्तार मिलेगी। यहां विशेषज्ञ अन्य तकनीकी संस्थानों से मदद लेकर नए उपकरणों के निर्माण में भी सहयोग करेंगे। इससे एक ही स्थान पर नए उपकरणों का आविष्कार, डिजाइन और जांच हो सकेगी।
उपकरणों की गुणवत्ता भी खुद जांचेगा
बायोेमेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स एंड डिवाइसेज हब में कैलिब्रेशन टेस्टिंग लैब की मदद से चिकित्सकीय उपकरणों को सुरक्षा प्रदान की रही है। वहीं, इस लैब के जरिए पीजीआई किसी भी उपकरण को प्रयोग करने से पहले कैलिब्रेटेड एनलाइजर से जांच कर रहा है। खासतौर पर नए खरीदे उपकरणों को इस लैब में जांच केबाद ही पीजीआई मंजूरी दे रहा है, ताकि मरीजों को दी जाने वाली सुविधा में और सुधार किया जा सके। पीजीआई इस लैब में सिरिंज पंप से लेकर रोगी मॉनिटर, एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, सेरेब्रल पाल्सी के बच्चों के मोटर रिहैबिलिटेशन डिवाइस, आर्टिफिशियल ब्रीदिंग कैपेबिलिटी डिवाइस, टीचिंग लैरींगोस्कोप, डबल वॉल्यूम एक्सचेंज मशीन जैसे उपकरणों का परीक्षण कर चुका है।
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ये तकनीकी संस्थान कर रहे सहयोग
पीजीआई के इस कार्य में पीयू के साथ आईआईटी रोपड़, आईआईटी मंडी, ईमटेक, आईसर, सीएसआईओ और इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेकभनोलॉजी सहयोग कर रहा है।
कोट
बायोेमेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स एंड डिवाइसेज हब लैब न केवल स्थानीय स्तर पर बनाए गए उपकरणों की गुणवत्ता जांच कर रहा है, बल्कि उनका सत्यापन और परीक्षण भी कर रहा है, जो अस्पताल के विभिन्न यूनिट में लगाए गए हैं। इससे मरीजों को कम लागत में बेहतर इलाज मुहैया कराने में काफी मदद मिल रही है।
-प्रो. जीडी पुरी, डीन एकेडमी पीजीआई
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पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम का कहना है कि इसकी मदद से एक तरफ जहां उच्चकोटि केउपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, वहीं मेक इन इंडिया अभियान को भी रफ्तार मिलेगी। यहां विशेषज्ञ अन्य तकनीकी संस्थानों से मदद लेकर नए उपकरणों के निर्माण में भी सहयोग करेंगे। इससे एक ही स्थान पर नए उपकरणों का आविष्कार, डिजाइन और जांच हो सकेगी।
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उपकरणों की गुणवत्ता भी खुद जांचेगा
बायोेमेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स एंड डिवाइसेज हब में कैलिब्रेशन टेस्टिंग लैब की मदद से चिकित्सकीय उपकरणों को सुरक्षा प्रदान की रही है। वहीं, इस लैब के जरिए पीजीआई किसी भी उपकरण को प्रयोग करने से पहले कैलिब्रेटेड एनलाइजर से जांच कर रहा है। खासतौर पर नए खरीदे उपकरणों को इस लैब में जांच केबाद ही पीजीआई मंजूरी दे रहा है, ताकि मरीजों को दी जाने वाली सुविधा में और सुधार किया जा सके। पीजीआई इस लैब में सिरिंज पंप से लेकर रोगी मॉनिटर, एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, सेरेब्रल पाल्सी के बच्चों के मोटर रिहैबिलिटेशन डिवाइस, आर्टिफिशियल ब्रीदिंग कैपेबिलिटी डिवाइस, टीचिंग लैरींगोस्कोप, डबल वॉल्यूम एक्सचेंज मशीन जैसे उपकरणों का परीक्षण कर चुका है।
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ये तकनीकी संस्थान कर रहे सहयोग
पीजीआई के इस कार्य में पीयू के साथ आईआईटी रोपड़, आईआईटी मंडी, ईमटेक, आईसर, सीएसआईओ और इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेकभनोलॉजी सहयोग कर रहा है।
कोट
बायोेमेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स एंड डिवाइसेज हब लैब न केवल स्थानीय स्तर पर बनाए गए उपकरणों की गुणवत्ता जांच कर रहा है, बल्कि उनका सत्यापन और परीक्षण भी कर रहा है, जो अस्पताल के विभिन्न यूनिट में लगाए गए हैं। इससे मरीजों को कम लागत में बेहतर इलाज मुहैया कराने में काफी मदद मिल रही है।
-प्रो. जीडी पुरी, डीन एकेडमी पीजीआई