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Chandigarh News: किराया न चुकाने पर मलोया में तीन मकानों का अलॉटमेंट रद्द
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने किराया बकाया रखने वाले अलॉटियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में बुधवार को मलोया स्थित अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स योजना के तहत आवंटित तीन मकानों के अलॉटमेंट रद्द कर दिए गए। इन मकानों पर करीब 6.24 लाख रुपये का किराया बकाया था, जिसे लंबे समय से जमा नहीं करवाया गया था।
हाउसिंग बोर्ड की ओर से संबंधित अलॉटियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अगले 30 दिनों के भीतर अपने-अपने फ्लैट्स का कब्जा चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के चीफ इंजीनियर को सौंप दें। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि तय समय सीमा के भीतर कब्जा वापस नहीं करने की स्थिति में संबंधित अलॉटियों के खिलाफ बेदखली (एविक्शन) की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और फ्लैट्स को जबरन खाली करवाया जाएगा।
सीएचबी ने हाल ही में स्मॉल फ्लैट्स स्कीम-2006 के तहत आवंटित 30 से अधिक मकानों की अलॉटमेंट भी इसी कारण रद्द की थी। इन मकानों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को लाइसेंस आधार पर दिया गया था, ताकि जरूरतमंद परिवारों को सस्ती दरों पर आवास उपलब्ध कराया जा सके।
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बोर्ड के नियमों के मुताबिक, सभी अलॉटियों को हर महीने निर्धारित न्यूनतम किराया नियमित रूप से जमा करवाना अनिवार्य होता है। हालांकि, कई अलॉटियों ने वर्षों से किराया जमा नहीं करवाया, जिसके चलते बकाया राशि ब्याज सहित लाखों रुपये तक पहुंच गई। ऐसे मामलों में बोर्ड अब सख्त रुख अपनाते हुए चरणबद्ध तरीके से अलॉटमेंट रद्द करने की कार्रवाई कर रहा है।
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हाउसिंग बोर्ड की ओर से संबंधित अलॉटियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अगले 30 दिनों के भीतर अपने-अपने फ्लैट्स का कब्जा चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के चीफ इंजीनियर को सौंप दें। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि तय समय सीमा के भीतर कब्जा वापस नहीं करने की स्थिति में संबंधित अलॉटियों के खिलाफ बेदखली (एविक्शन) की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और फ्लैट्स को जबरन खाली करवाया जाएगा।
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सीएचबी ने हाल ही में स्मॉल फ्लैट्स स्कीम-2006 के तहत आवंटित 30 से अधिक मकानों की अलॉटमेंट भी इसी कारण रद्द की थी। इन मकानों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को लाइसेंस आधार पर दिया गया था, ताकि जरूरतमंद परिवारों को सस्ती दरों पर आवास उपलब्ध कराया जा सके।
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बोर्ड के नियमों के मुताबिक, सभी अलॉटियों को हर महीने निर्धारित न्यूनतम किराया नियमित रूप से जमा करवाना अनिवार्य होता है। हालांकि, कई अलॉटियों ने वर्षों से किराया जमा नहीं करवाया, जिसके चलते बकाया राशि ब्याज सहित लाखों रुपये तक पहुंच गई। ऐसे मामलों में बोर्ड अब सख्त रुख अपनाते हुए चरणबद्ध तरीके से अलॉटमेंट रद्द करने की कार्रवाई कर रहा है।