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चंडीगढ़ एम्यूजमेंट पार्क घोटाले में पूर्व एडवाइजर समेत तीनों आरोपियों को जमानत, ये हैं आरोप
Wed, 29 Jan 2020 02:12 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jan 2020 02:12 PM IST
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फाइल फोटो
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वर्ष 2006 के थीम कम एम्यूजमेंट पार्क घोटाले में यूटी प्रशासक के पूर्व एडवाइजर ललित शर्मा, पूर्व होम सेक्रेटरी कृष्ण मोहन और टूरिज्म डिपार्टमेंट के पूर्व डायरेक्टर विवेक अत्रे को जिला अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई है। यह राहत तीनों को एक-एक लाख रुपये की गारंटी पर मिली है।
पिछली सुनवाई पर तीनों को समन जारी कर अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया था, लेकिन घर पर न मिलने के कारण सीबीआई उनको समन नहीं पहुंचा पाई थी। तीनों पर यूनिटेक कंपनी को नियमों के खिलाफ जाकर फायदा पहुंचाने का आरोप है।
सारंगपुर में 73.65 एकड़ में प्रस्तावित थीम कम एम्यूजमेंट पार्क मामले में साल 2010 में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी। इसके तहत मेसर्स यूनिटेक लिमिटेड को महज 5.5 करोड़ (फिक्सड एनुअल लाइसेंस फीस) के अलावा 1.1 फीसदी वार्षिक रेवेन्यू शेयरिंग पर अलॉटमेंट हुई। इससे सरकार को चपत लगी। आरोप था कि जमीन की कीमत कम आंकी गई थी, जिसका फायदा संबंधित बिल्डर को देने की कोशिश की गई। इससे जुड़े दस्तावेज जान बूझकर नष्ट किए जाने का भी एफआईआर में जिक्र किया गया था।
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प्रशासनिक अधिकारियों पर वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर, कम रेट पर बोली लगाने वाले को जमीन अलॉट करने सहित रेवेन्यू शेयरिंग के मामले में भी डीएलएफ की ओर से 13 गुना अधिक रेट कोट किए जाने की बात लिखी गई थी। जांच के बाद सीबीआई ने 4 अक्टूबर 2010 को इन तीनों अफसरों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 201 और 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1)(डी)और 13 (2) के तहत केस दर्ज किया था।
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पिछली सुनवाई पर तीनों को समन जारी कर अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया था, लेकिन घर पर न मिलने के कारण सीबीआई उनको समन नहीं पहुंचा पाई थी। तीनों पर यूनिटेक कंपनी को नियमों के खिलाफ जाकर फायदा पहुंचाने का आरोप है।
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सारंगपुर में 73.65 एकड़ में प्रस्तावित थीम कम एम्यूजमेंट पार्क मामले में साल 2010 में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी। इसके तहत मेसर्स यूनिटेक लिमिटेड को महज 5.5 करोड़ (फिक्सड एनुअल लाइसेंस फीस) के अलावा 1.1 फीसदी वार्षिक रेवेन्यू शेयरिंग पर अलॉटमेंट हुई। इससे सरकार को चपत लगी। आरोप था कि जमीन की कीमत कम आंकी गई थी, जिसका फायदा संबंधित बिल्डर को देने की कोशिश की गई। इससे जुड़े दस्तावेज जान बूझकर नष्ट किए जाने का भी एफआईआर में जिक्र किया गया था।
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प्रशासनिक अधिकारियों पर वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर, कम रेट पर बोली लगाने वाले को जमीन अलॉट करने सहित रेवेन्यू शेयरिंग के मामले में भी डीएलएफ की ओर से 13 गुना अधिक रेट कोट किए जाने की बात लिखी गई थी। जांच के बाद सीबीआई ने 4 अक्टूबर 2010 को इन तीनों अफसरों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 201 और 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1)(डी)और 13 (2) के तहत केस दर्ज किया था।