जींद उपचुनाव : रूठों को मनाने में जुटे राजनीतिक दल, भितरघात करने वाले नेता दे सकते हैं झटका
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विधानसभा उपचुनाव की रण भेरी बजने के साथ ही जहां उम्मीदवारों ने चुनाव जीतने के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया है, वहीं टिकट नहीं मिलने से रूठे नेता अब राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। इनको मनाने की कवायद शुरू हो गई है। वहीं राजनीतिक दलों को भितरघात का डर भी सता रहा है। इसके लिए सभी पार्टियां डैमेज कंट्रोल में जुट गई हैं।
गौरतलब है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों से टिकट के लिए उम्मीदवारों की लंबी लाइन थी। भाजपा का टिकट डॉ. कृष्ण मिड्ढा को मिलने के बाद पार्टी के कुछ नेता खुलकर अपनी नाराजगी जता चुके हैं। हालांकि अब वे सभी कार्यक्रमों शामिल हैं, लेकिन पार्टी नेताओं की नजर उन पर बनी हुई है।
वहीं कांग्रेस में भले ही रणदीप सुरजेवाला को राहुल गांधी का उम्मीदवार माना जा रहा है, लेकिन फिर भी भितरघात का डर बना हुआ है। हालांकि गुरुवार को नामांकन के समय कांग्रेस के सभी बड़े नेता एक साथ दिखे। जींद में उनके समर्थक कार्यक्रम से दूरी बनाए हुए थे। अब उम्मीदवारों को मतदाताओं को रिझाने के साथ-साथ इन नेताओं को मनाने के लिए भी पसीना बहाना पड़ेगा।
मांगेराम गुप्ता और सुरेंद्र बरवाला बने राजनीति का केंद्र
पूर्व मंत्री मांगेराम गुप्ता और सुरेंद्र बरवाला अब जींद की राजनीति का केंद्र बन गए हैं। सूत्रों के अनुसार अधिकतर उम्मीदवारों व राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं ने मांगेराम गुप्ता से समर्थन के लिए मुलाकात की है। हालांकि उन्होंने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। गौरतलब है कि शुरू में मांगेराम गुप्ता के भाजपा में शामिल होने की अफवाहें उड़ी थीं।
लेकिन उन्होंने इससे मना कर दिया। इसी प्रकार भाजपा के टिकट की दौड़ में चल रहे पूर्व मंत्री सुरेंद्र बरवाला से भी समर्थन के लिए कुछ नेताओं ने मुलाकात की है। अब बरवाला ने 15 जनवरी को अपने कार्यकर्ताओं की मीटिंग बुलाई है। इसमें ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बाजार में कई प्रकार की अफवाहें चलती हैं। इन पर कोई टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। मैं फिलहाल भाजपा में हूं, वोट मांगने के लिए सभी लोग आते हैं। 15 को मीटिंग करने के बाद ही आगे की घोषणा की जाएगी। -सुरेंद्र बरवाला, पूर्व मंत्री।
मैंने 32 साल तक पार्टी की सेवा की है। अपनी भावना व्यक्त की थी, लेकिन पार्टी का फैसला मेरे लिए मान्य है। मैं भाजपा के साथ हूं। -जवाहर सैनी, प्रदेश सचिव भाजपा।
टिकट नहीं मिलने पर हर संभावित उम्मीदवार को निराशा होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह पार्टी के खिलाफ काम करेगा। सभी लोग एक साथ हैं। कांग्रेस मजबूती से चुनाव लड़ेगी और जीतेगी। -डॉ. अशोक तंवर, प्रदेशाध्यक्ष कांग्रेस