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सचेत रहें, जीएमसीएच 32 की 'ओटी' से आपके मरीज को दिखाया जा सकता है बाहर का रास्ता

Tue, 17 Dec 2019 10:45 AM IST
खुशबू गोयल वीणा तिवारी/अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी/अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 17 Dec 2019 10:45 AM IST
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Alert for Patients, Lack of Beds in GMCH 32 Chandigarh
जीएमसीएच 32 चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो
अगर आप जीएमसीएच 32 में सीजेरियन डिलिवरी कराने जा रहे हैं तो जरा सचेत हो जाएं, क्योंकि ऑपरेशन के बाद मरीज को सीधे बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। चौंकिए मत, यहां लेबर रूम से ऑपरेशन के लिए जाने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला के परिजन से इसके लिए स्वीकृति फॉर्म भरवाया जा रहा है। उस फॉर्म में साफ तौर पर लिखा है कि ऑपरेशन के बाद वेंटिलेटर और बेड की व्यवस्था न होने पर आपके मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। इस अव्यवस्था के लिए अस्पताल प्रशासन कर कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
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न्यू बोर्न पर मंडरा रहा खतरा
ऑपरेशन से पहले भरवाए जा रहे फॉर्म में अस्पताल प्रशासन ने हवाला दिया है कि उनके पास बेड, वेंटिलेटर और न्यू बोर्न केयर के लिए स्टाफ की संख्या सीमित है। ऐसी स्थिति में अगर इन चीजों के व्यवस्था नहीं हो पाई तो उसके लिए परिजन हॉस्पिटल को जिम्मेदार नहीं ठहराएंगे। यहां न्यू बोर्न के लिए बनाई गई नर्सरी यूनिट में एक वेंटिलेटर और तीन बेड की व्यवस्था है, जबकि यहां एक दिन में 30 से 40 डिलिवरी हो रही हैं। इसमें सीजेरियन की संख्या 10 से 12 है।
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एक बेड पर दो मां और दो बच्चे

जीएमसीएच में हेल्थ के मानकों को दरकिनार कर बेहतर इलाज का दावा किया जा रहा है। यहां लेबर रूम और न्यू गाइनी वार्ड में इसका नजारा साफ देखा जा सकता है, जहां डिलिवरी के बाद एक बेड पर दो महिलाएं और दो नवजात को रखा जा रहा है। इसे लेकर भी अस्पताल प्रशासन के पास कोई जवाब नहीं है।

अस्पताल के स्टाफ और डॉक्टरों का कहना है कि जगह न होने के बावजूद मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, जिससे मेडिकल के मानक दरकिनार कर काम करना पड़ रहा है। इन दिनों इन वार्ड की स्थिति और बदहाल है। ठंड के कारण एक ही बेड पर एक ही कंबल में दो महिलाओं और दो नवजातों को रखा जा रहा है।

इलाज हो रहा है या संक्रमण फैलाने का काम
नियोनेटल केयर के मानक के अनुसार नवजात को साफ-सुथरे स्थान पर रखना जरूरी होता है। उसे छूने, उसके पास जाने और उसके आसपास के  वातावरण का प्रभाव सीधे उसके स्वास्थ्य पर पड़ता है। लेकिन यहां इन मानकों को दरकिनार कर उसे एक ही बेड पर तीन से चार लोगों के साथ रखा जा रहा है।

जीएमसीएच गाइनी वार्ड की व्यवस्था पर एक नजर

वार्ड--------------------------बेड की संख्या-------भर्ती मरीज
लेबर रूम में कुल बेड---------21----------------50 से 60
न्यू गाइनी वार्ड में कुल बेड---18----------------40 से 50
नर्सरी यूनिट में कुल बेड------03----------------8 से 10 नवजात
वेंटिलेटर-------------------------01
लेबर रूम में स्टाफ की संख्या - एक शिफ्ट में एक नर्सिंग स्टाफ

यह एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़ा मामला है। नियम बनाने और उसके पालन से जुड़े मामलों पर मेरे स्तर पर कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
- डॉ. रवि गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमसीएच

यह पेशेंट केयर से जुड़ा मामला ह्रै। इसके बारे में अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ही कुछ बता पाएंगे।
- अनिल मोदगिल, प्रशासनिक प्रवक्ता, जीएमसीएच
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