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बलवंत सिंह राजोआणा की मौत की सजा माफ करवाने में दखल दें अमित शाह: अकाली दल
Mon, 13 Jan 2020 01:30 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 13 Jan 2020 01:30 PM IST
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अमित शाह से मिलते सुखबीर बादल
- फोटो : अमर उजाला
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शिरोमणि अकाली दल के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिल कर बलवंत सिंह राजोआणा की मौत की सजा माफ करवाने में निजी दखल देने की मांग की। साथ ही श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व मनाने को कमेटी बनाने का अनुरोध किया। अकालियों ने शाह को 12 अप्रैल 2020 को पड़ने वाले 400वें प्रकाश पर्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह पवित्र अवसर दमन और अत्याचार के खिलाफ असहायों की रक्षा करने की भावना का प्रतीक है।
गुरु जी ने धार्मिक कट्टरता और सांप्रदायिक घृणा के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान न्योछावर कर दी। वह उन असहाय कश्मीरी पंडितों की रक्षा को आगे आए जिनका बल पूर्वक धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा था। सुखबीर ने अनुरोध किया कि केंद्र सरकार गुरु साहिब को सच्ची श्रद्धांजलि के तौर पर शताब्दी जश्न को शानो-शौकत से मनाने को राष्ट्रीय स्तर पर एक कमेटी गठित करे। जिस तरह श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के लिए बनाई थी।
उन्होंने यह भी मांग की कि गुरु साहिब की याद में दिल्ली में एक राष्ट्रीय एकता यादगार स्थापित की जाए, इस पवित्र दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए। उन्होंने शाह से कहा कि राजोआणा बिना किसी पैरोल के 24 साल कारावास काट चुके हैं। राष्ट्रपति के पास दया याचिका का अनुरोध किया गया था, जिस पर सुनवाई बाकी है। सुखबीर ने एसजीपीसी के प्रतिनिधिमंडल को ननकाना साहिब न जाने देने का मुद्दा भी उठाया। जो गुरुद्वारा जन्म स्थान पर हुए हमले और सिखों पर हो रहे अत्याचारों की पड़ताल करने जाना चाहता था।
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दल में एसजीपीसी प्रधान गोबिंद सिंह लौंगोवाल और कई सीनियर अकाली नेता शामिल थे।
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गुरु जी ने धार्मिक कट्टरता और सांप्रदायिक घृणा के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान न्योछावर कर दी। वह उन असहाय कश्मीरी पंडितों की रक्षा को आगे आए जिनका बल पूर्वक धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा था। सुखबीर ने अनुरोध किया कि केंद्र सरकार गुरु साहिब को सच्ची श्रद्धांजलि के तौर पर शताब्दी जश्न को शानो-शौकत से मनाने को राष्ट्रीय स्तर पर एक कमेटी गठित करे। जिस तरह श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के लिए बनाई थी।
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उन्होंने यह भी मांग की कि गुरु साहिब की याद में दिल्ली में एक राष्ट्रीय एकता यादगार स्थापित की जाए, इस पवित्र दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए। उन्होंने शाह से कहा कि राजोआणा बिना किसी पैरोल के 24 साल कारावास काट चुके हैं। राष्ट्रपति के पास दया याचिका का अनुरोध किया गया था, जिस पर सुनवाई बाकी है। सुखबीर ने एसजीपीसी के प्रतिनिधिमंडल को ननकाना साहिब न जाने देने का मुद्दा भी उठाया। जो गुरुद्वारा जन्म स्थान पर हुए हमले और सिखों पर हो रहे अत्याचारों की पड़ताल करने जाना चाहता था।
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दल में एसजीपीसी प्रधान गोबिंद सिंह लौंगोवाल और कई सीनियर अकाली नेता शामिल थे।