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प्रो. औलख ने नाटक लिखे ही नहीं गांव-गांव जाकर खेले भी: पातर

Fri, 16 Jun 2017 09:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना/चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना/चंडीगढ़ Updated Fri, 16 Jun 2017 09:12 AM IST
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Ajmer Aulakh dies, was suffering from cancer
- फोटो : File Photo
पंजाबी साहित्य अकादमी लुधियाना में प्रो. अजमेर सिंह औलख के निधन पर शोक जताया गया। इस दौरान डॉ. सुरजीत पातर ने कहा कि किसानी की दशा के बारे में नाटक लिखने वाले विश्व स्तरीय नाटककार अजमेर औलख के जाने से पंजाबी साहित्य जगत और गांव उदास है। यह उनकी कला का जादू ही था कि उनके नाटक ‘बेगाने बोहड़ दी छां’ को चंडीगढ़ में स्टेंडिंग ओवेशन मिली।
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पंजाबी साहित्य अकादमी के प्रधान डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने औलख के सुबह पांच बजे हुए देहांत पर शोक जताया। इस मौके पर डॉ. एसएस जोहल ने प्रो. गुरभजन सिंह गिल और डॉ. सुरजीत पातर के सुझाव पर लेखकों की सहायता के लिए एक कोश स्थापित करने की शुरुआत के तौर पर पचास हजार रुपये अपनी तरफ से देने का एलान किया। 
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पंजाबी लेखक और थिएटर की जानी मानी हस्ती प्रोफेसर अजमेर औलख के निधन से थिएटर से जुड़े लोग शोकाकुल हैं। वह कैसर से पीड़ित थे और काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। सेवा ड्रामा रेपेट्ररी कंपनी के अध्यक्ष जीएस चन्नी ने कहा कि वह अजमेर औलख को 1976 से जानते थे। चन्न्नी ने कहा कि जब मैं 1979 में जालंधर दूरदर्शन ड्रामा प्रोडक्शन का इंचार्ज था तो औलख का लिखा नाटक ‘तूड़ी  वाला कोठा ’ दिखाया गया था। जिसे पंजाब में काफी पसंद किया गया।  चन्नी केअनुसार थिएटर जगत में उनकी जगह भरी नही जाएगी।
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हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष सुदेश शर्मा ने कहा कि अजमेर औलख अपने नाटकाें के जरिए ग्रामीण मुद्दों का हमेशा उठाते थे। उन्होंने कहा कि जब मैने 1978 में  कला क्षेत्र में प्रवेश किया तो उनका लिखा नाटक‘ बेगाने बोड़ दी छां ’ आया। यह नाटक गांवों को काफी पसंद किया गया था। पूरे पंजाब में गुरशरण जी के बाद अजेर औलख का नाम ही लिया जाता रहा हैं। वह नाटकों के जरिए हमेशा रंगमंच में जीवित रहेंगे।

पंजाब संगीत नाटक अकादमी के प्रधान केवल धालीवाल ने अजमेर औलख को पंजाब का बहुत बड़ा नाटककार बताते हुए कहा कि उनके लिखे हुए नाटक देश ही नही विदेशाें में भी प्रसिद्ध रहे। वह सादगी भरे इंसान थे और भूण हत्या, गरीबी से जुड़ मुद्दों पर नाटक लिखा करते थे। उनका काम हमेशा हमेशा के लिए याद रखा जाएगा।


नाटककार और कवि शब्दीश के अनुसार चंडीगढ़ और पंजाब में आने जाने पर कई बार अजमेर औलख से मिलना जुलना रहता था। रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ मसलाें को नाटकों केजरिए दर्शाने में उन्हें महारत हासिल थी।
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