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फिर लौटा प्रदूषण: पाबंदियां हटने से खराब होने लगी चंडीगढ़ की हवा, मानसून की बेरुखी ने बढ़ाई दिक्कत

Fri, 09 Jul 2021 08:39 AM IST
निवेदिता वर्मा आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 09 Jul 2021 08:39 AM IST
सार

लॉकडाउन की पाबंदियों में ढील के बाद निर्माण कार्य तेजी से होने लगे हैं। सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही बढ़ गई। इससे हवा में धूल के कण बढ़ गए हैं। बिना बारिश के ये धूल के कण नहीं हटेंगे। 
 

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Air Quality Index of Chandigarh is Increased due to absence of Rain
लॉकडाउन की पाबंदियां हटने के बाद चंडीगढ़ में बढ़ा ट्रैफिक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मानसून की बेरुखी और लॉकडाउन की पाबंदियां हटने से चंडीगढ़ में वायु प्रदूषण लौट आया है। पिछले कई महीनों से स्वच्छ हुई हवा अब दूषित होने लगी है। पिछले तीन दिन से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। छह जुलाई को एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 219, सात को 230 और आठ जुलाई को एक्यूआई 166 रिकॉर्ड किया गया।

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तीनों दिन के आंकड़े एयरक्वालिटी इंडेक्स के बनाए गए थोड़ा प्रदूषित (100-200) और प्रदूषित (200-300) में दर्ज किए गए हैं, जो बताते हैं कि इस समय सांस लेना थोड़ा दिक्कत भरा हो सकता है। ऐसे में सांस के जो रोगी हैं, उनके लिए स्थिति ज्यादा खराब है। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञ ने पूर्वानुमान में बताया है कि 10 जुलाई से वायु प्रदूषण के छंटने की उम्मीद है। इससे लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है।
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चंडीगढ़ में प्रदूषण बढ़ने के पीछे विशेषज्ञ कई वजह बता रहे हैं। उनका कहना है कि सबसे बड़ा कारण लॉकडाउन का खत्म होना है, जिससे स्थानीय प्रदूषण वापस आ गया है। आसपास के कई इलाकों में भवन निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। इससे धूल के कण बढ़े हैं। सड़कों पर गाड़ियां लौट आई हैं और रेस्टोंरेट भी खुल चुके हैं, जो प्रदूषण को बढ़ाने में सहायक है। धूल के कण को हटाने में बारिश का अहम रोल होता है। चंडीगढ़ व आसपास के इलाकों में पिछले कई दिनों से बारिश नहीं हुई है। इस वजह से वायु प्रदूषण बढ़ा हुआ है। 

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मानसून सीजन में सबसे कम रहता था प्रदूषण

पीजीआई व पीयू ने अपनी एक स्टडी में पाया था कि मानसून सीजन में वायु प्रदूषण सबसे निचले स्तर पर रहता है। दरअसल बारिश प्रदूषण के कण को हटाने का काम करती है। आमतौर पर मानसून के दौरान एक निश्चित अंतराल में बारिश होती रहती है, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी उलट है। 13 जून से मानसून का आगमन हो चुका है, लेकिन उसके बाद से सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। लोगों को बारिश का इंतजार है। हालांकि, अब दस जुलाई से मानसून सक्रिय हो रहा है। इससे अच्छी बारिश के आसार बन रहे हैं। बारिश से धूल के कण छंटेंगे और प्रदूषण से राहत मिलने के आसार हैं।

प्रदूषण बढ़ने की वजह
  • लॉकडाउन की पाबंदियां हटना
  • सड़कों पर गाड़ियों का आना
  • रेस्टोरेंट व होटल में भट्ठी का जलना
  • भवन निर्माण का कार्य तेजी से होना
  • बारिश का न होना
  • आसपास के इलाकों में कूड़े को जलाना

वायु प्रदूषण बढ़ने के एक साथ कई कारण हैं। लॉकडाउन हटने से सभी गतिविधियां शुरू हो गई हैं। आसपास के इलाकों में भवन निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। इससे उत्पन्न धूल के कण वातावरण में है। जब तक बारिश नहीं आती, तब तक प्रदूषण से राहत नहीं मिलेगी। बारिश से प्रदूषण के कण घुल जाते हैं। -रविंद्रा खैवाल, एडिशनल प्रोफेसर, स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई

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