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देश के पहले विरासत केंद्र के लिए वायुसेना और प्रशासन के बीच समझौता आज
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चंडीगढ़। सेक्टर-18 के गवर्नमेंट प्रेस बिल्डिंग में बन रहे देश के पहले वायुसेना विरासत केंद्र के लिए शुक्रवार को वायुसेना और चंडीगढ़ प्रशासन के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होंगे। इसमें प्रशासन, वायुसेना व केंद्र सरकार की जिम्मेदारियां तय होंगी। इसके बाद करीब ढाई महीने में संग्रहालय का काम पूरा किया जाएगा और 15 अगस्त को उद्घाटन किया जा सकता है।
ग्रुप कैप्टन पीएस लांबा ने बताया कि वायुसेना के संग्रहालय को रक्षा, वित्त और गृह मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद शुक्रवार को प्रशासन के साथ एमओयू होगा। संग्रहालय का काम 15 अगस्त से पहले पूरा करने की कोशिश की जा रही है। एमओयू में प्रशासन व वायुसेना की जिम्मेदारी तय हो जाएगी। इस पर भारत सरकार की मुहर होगी। उन्होंने बताया कि संग्रहालय में आकर्षण के 8 केंद्र होंगे जिसमें सबसे महत्वपूर्ण युद्ध में इस्तेमाल हुए विमान, सिम्युलेटर, रॉकेट्स, मिसाइल्स व अन्य होंगे। यहां लोग वायुसेना के इतिहास को पढ़ और देख पाएंगे।
वायुसेना के अधिकारी गाइड की भूमिका निभाएंगे। लोग सेना के शौर्य, युद्ध की कहानियां और इस्तेमाल किए गए हथियारों के बारे में जान सकेंगे। संग्रहालय में जल, थल और वायुसेना में निकली भर्ती और पात्रता की भी जानकारी दी जाएगी। यूटी प्रशासन के अधिकारियों के सामने प्रेजेंटेशन भी हो चुकी है। बता दें कि 27 अगस्त 2021 को पूर्व प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की उपस्थिति में चंडीगढ़ प्रशासन और वायुसेना के बीच इस विरासत केंद्र को बनाने के लिए सहमति बनी थी।
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अगले हफ्ते चंडीगढ़ पहुंचेगा मिग 21
गवर्नमेंट प्रेस बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर ये विरासत केंद्र बनाया जा रहा है। ग्रुप कैप्टन लांबा ने बताया कि 1971 युद्ध में इस्तेमाल हुआ जहाज चंडीगढ़ पहुंच गया है। अगले एक हफ्ते के अंदर मिग 21 चंडीगढ़ पहुंच जाएगा। केंद्र में विमान के मॉडल और हथियार प्रदर्शित होंगे लेकिन बड़ा आकर्षण फ्लाइट सिम्युलेटर होगा जो लोगों को एक विमान में होने का अनुभव प्रदान करेगा। इसके अलावा एयरो इंजन, एयरक्राफ्ट, कियोस्क और अन्य वायु सेना आर्टिफैक्ट्स जिसमें मशीन/फिक्स्चर इत्यादि वायु सेना की उपलब्धियों और व्यक्तित्वों पर वीडियो, फिल्म सहित पर्याप्त प्रचार सामग्री और लोगों को जानकारी देने के लिए सेना की तरफ से गाइड भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
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ग्रुप कैप्टन पीएस लांबा ने बताया कि वायुसेना के संग्रहालय को रक्षा, वित्त और गृह मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद शुक्रवार को प्रशासन के साथ एमओयू होगा। संग्रहालय का काम 15 अगस्त से पहले पूरा करने की कोशिश की जा रही है। एमओयू में प्रशासन व वायुसेना की जिम्मेदारी तय हो जाएगी। इस पर भारत सरकार की मुहर होगी। उन्होंने बताया कि संग्रहालय में आकर्षण के 8 केंद्र होंगे जिसमें सबसे महत्वपूर्ण युद्ध में इस्तेमाल हुए विमान, सिम्युलेटर, रॉकेट्स, मिसाइल्स व अन्य होंगे। यहां लोग वायुसेना के इतिहास को पढ़ और देख पाएंगे।
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वायुसेना के अधिकारी गाइड की भूमिका निभाएंगे। लोग सेना के शौर्य, युद्ध की कहानियां और इस्तेमाल किए गए हथियारों के बारे में जान सकेंगे। संग्रहालय में जल, थल और वायुसेना में निकली भर्ती और पात्रता की भी जानकारी दी जाएगी। यूटी प्रशासन के अधिकारियों के सामने प्रेजेंटेशन भी हो चुकी है। बता दें कि 27 अगस्त 2021 को पूर्व प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की उपस्थिति में चंडीगढ़ प्रशासन और वायुसेना के बीच इस विरासत केंद्र को बनाने के लिए सहमति बनी थी।
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अगले हफ्ते चंडीगढ़ पहुंचेगा मिग 21
गवर्नमेंट प्रेस बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर ये विरासत केंद्र बनाया जा रहा है। ग्रुप कैप्टन लांबा ने बताया कि 1971 युद्ध में इस्तेमाल हुआ जहाज चंडीगढ़ पहुंच गया है। अगले एक हफ्ते के अंदर मिग 21 चंडीगढ़ पहुंच जाएगा। केंद्र में विमान के मॉडल और हथियार प्रदर्शित होंगे लेकिन बड़ा आकर्षण फ्लाइट सिम्युलेटर होगा जो लोगों को एक विमान में होने का अनुभव प्रदान करेगा। इसके अलावा एयरो इंजन, एयरक्राफ्ट, कियोस्क और अन्य वायु सेना आर्टिफैक्ट्स जिसमें मशीन/फिक्स्चर इत्यादि वायु सेना की उपलब्धियों और व्यक्तित्वों पर वीडियो, फिल्म सहित पर्याप्त प्रचार सामग्री और लोगों को जानकारी देने के लिए सेना की तरफ से गाइड भी उपलब्ध कराए जाएंगे।