फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   again found water of saraswati river at yamunanagar

फिर निकला जल, वैज्ञानिकों का दावा, ढूंढ लेंगे सरस्वती नदी

Thu, 07 May 2015 02:26 PM IST
Updated Thu, 07 May 2015 02:26 PM IST
विज्ञापन
again found water of saraswati river at yamunanagar

इसरो और नासा के चित्रों के आधार पर सरस्वती के बहाव क्षेत्र में चल रही खुदाई में आठ से दस फुट नीचे लगातार जल मिलता जा रहा है। मुगलवाली गांव के बाद अब बिलासपुर के रूलाहेड़ी गांव में भी सरस्वती नदी का जल निकल आया है। यह जल भी मुगलवाली गांव में जमीन से निकले पानी की तरह है। प्रशासनिक अधिकारी इसे भी सरस्वती नदी का जल मान रहे हैं।

विज्ञापन


उधर, मुगलवाली गांव में सरस्वती नदी का जल निकलने का पता चलने पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के भूगर्भ वैज्ञानिक गांव में पहुंचे और जमीन से निकल रहे पानी के सैंपल लिए। सरस्वती के जल को देखने के लिए आसपास के लोग भी पहंच रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में बुधवार को भी मुगलवाली गांव में खुदाई का कार्य जारी रहा।
विज्ञापन


डीडीपीओ गगनदीप सिंह ने बताया कि मुगलवाली गांव में जमीन से पानी निकलने के बाद यहां करीब 10 फुट गहराई तक खुदाई की जाएगी। हमें पूरी उम्मीद है कि जमीन से प्रचुर मात्रा में सरस्वती नदी का जल निकलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां सरस्वती की धारा होने के प्रमाण

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जियोलॉजी (भू-विज्ञान) विभाग के चेयरमैन प्रो. डॉ. एआर चौधरी अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्राथमिक दृष्टि से ऐसा लग रहा है कि यहां पर जल स्रोत बहता था।

प्राथमिक चरण में यह किसी पुरानी नदी का रिवर-बैड प्रतीत होता है। रेत, पत्थरों व खनिजों की पांच परतें यहां नदी का होना सिद्ध करती हैं। यहां पर छह-सात फुट पर पानी मिलने से इसकी प्रमाणिकता सिद्ध होती है। उनका कहना है कि बहुत सारी धाराएं मिलकर सरस्वती के वेग को बढ़ाती थीं। हो सकता है कि इनमें से एक धारा यह भी हो।

पाकिस्तान, राजस्थान और गुजरात में हो रहा जल का भरपूर उपयोग

again found water of saraswati river at yamunanagar

जमीन के नीचे बह रही सरस्वती के जल को तलाशने की प्रदेश सरकार ने अब पहल की है, लेकिन पाकिस्तान, राजस्थान और गुजरात में जमीन के नीचे मौजूद सरस्वती के जल का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।

सरस्वती नदी शोध संस्थान के संस्थापक दर्शनलाल जैन के मुताबिक राजस्थान में 24 स्थानों पर गहरी खुदाई कर जमीन के नीचे से पानी निकाला जा रहा है। जैसलमेर में जमीन के 554 मीटर नीचे ड्रिल कर पानी निकाला जा रहा है। ओएनजीसी द्वारा जैसलमेर में खुदाई के दौरान 76 हजार लीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी निकला था।

गुजरात के सिद्धपुर जिले के मुक्तेश्वर में बांध बनाकर जमीन से निकाले जा रहे सरस्वती नदी के जल को इकट्ठा किया जाता है। राजस्थान से आगे पाकिस्तान में भी जमीन के नीचे बह रही सरस्वती के जल को निकालकर उसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

पाक छाई हरियाली
ज्यूलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के भूतपूर्व डायरेक्टर डॉ. वीएमके पुरी के अनुसार राजस्थान में जमीन के नीचे से निकाले जा रहे पानी ने वहां हरियाली ला दी है। पाकिस्तान पिछले 37 सालों से सरस्वती के जल का इस्तेमाल कर रहा है। हरियाणा में भी जमीन के नीचे सरस्वती नदी का अथाह जल मौजूद है।

75 साइटें चिह्नित
सरस्वती शोध संस्थान के पूर्व संयोजक डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा के मुताबिक सरस्वती नदी के उद्गम स्थल हरियाणा के यमुनानगर आदी बद्री से राजस्थान और गुजरात तक 75 साइट मिली हैं। इन जगहों पर जिस सभ्यता के प्रमाण मिले हैं, उसे सिंधु सरस्वती सभ्यता नाम से रिपोर्ट करके एक कुरुक्षेत्र के संस्कृति भवन में इसका संग्रहालय भी बनाया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed