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40 रामलीलाओं पर शोध करके बनाई डॉक्यूमेंट्री
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चंडीगढ़। युवा कलाकारों के समूह ‘परंपरा आर्ट्स’ की ओर से रविवार को अपनी तरह की पहली डाक्यूमेंटरी ‘रामलीला द ट्रेडिशनल थियेटर’ की स्क्रीनिंग सेक्टर 18 स्थित टैगोर थियेटर में हुई। इस अवसर पर शहर के गण्यमान्य लोगों के अलावा सभी रामलीलाओं के कलाकार उपस्थित हुए। कार्यक्रम में प्रयागराज एनसीजेडसीसी के डायरेक्टर इंद्रजीत ग्रोवर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। इस डाक्यूमेंटरी में कलाकारों के विचार, मंचन, मेकअप और उनकी परेशानियों को दिखाया गया है।
यह डाक्यूमेंटरी भगवान श्रीराम के जीवन की नाटकीय प्रस्तुति ‘रामलीला’ के विषय में है जो भारत की प्राचीन संस्कृति तथा पारंपरिक रंगमंच है। इस डाक्यूमेंटरी में चंडीगढ़, अयोध्या, वाराणसी, जींद, कुरुक्षेत्र, अंबाला और डलहौजी की बेहतरीन जगहों को फिल्माया गया है। सबसे खास बात यह है कि करीब 2 घंटे की इस डॉक्यूमेंट्री को 40 रामलीलाओं पर शोध कर बनाया गया है।
एक घंटे 20 मिनट की इस डाक्यूमेंटरी के माध्यम से रामलीला के उन पहलुओं को बखूबी दर्शाया गया है, जिनके कारण 16वीं शताब्दी में आरंभ हुए इस दस दिवसीय मंचन का अस्तित्व आज भी बरकरार है। इस डाक्यूमेंटरी उन कलाकारों और कार्यकर्ताओं के कठिन परिश्रम, समर्पण और सेवा भाव को भी उजागर किया है जो निस्वार्थ भाव से रामलीला का आयोजन करवाते आ रहे हैं। यही कारण है सदियों से चली आ रही रामलीला की यह परंपरा आज भी जीवित है।
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यह डाक्यूमेंटरी भगवान श्रीराम के जीवन की नाटकीय प्रस्तुति ‘रामलीला’ के विषय में है जो भारत की प्राचीन संस्कृति तथा पारंपरिक रंगमंच है। इस डाक्यूमेंटरी में चंडीगढ़, अयोध्या, वाराणसी, जींद, कुरुक्षेत्र, अंबाला और डलहौजी की बेहतरीन जगहों को फिल्माया गया है। सबसे खास बात यह है कि करीब 2 घंटे की इस डॉक्यूमेंट्री को 40 रामलीलाओं पर शोध कर बनाया गया है।
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एक घंटे 20 मिनट की इस डाक्यूमेंटरी के माध्यम से रामलीला के उन पहलुओं को बखूबी दर्शाया गया है, जिनके कारण 16वीं शताब्दी में आरंभ हुए इस दस दिवसीय मंचन का अस्तित्व आज भी बरकरार है। इस डाक्यूमेंटरी उन कलाकारों और कार्यकर्ताओं के कठिन परिश्रम, समर्पण और सेवा भाव को भी उजागर किया है जो निस्वार्थ भाव से रामलीला का आयोजन करवाते आ रहे हैं। यही कारण है सदियों से चली आ रही रामलीला की यह परंपरा आज भी जीवित है।
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