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कोर्ट में रखे जाएंगे जनता के सुझाव, हाईकोर्ट करेगा ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर का अंतिम फैसला
Thu, 26 Dec 2019 02:15 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 26 Dec 2019 02:15 PM IST
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ट्रिब्यून चौक, चंडीगढ़
- फोटो : अमर उजाला
यूटी गेस्ट हाउस में सोमवार को प्रशासन की ओर से की गई सार्वजनिक सुनवाई के दौरान आए 5 बेहतर सुझावों को प्रशासन शॉर्ट लिस्ट कर रहा है। प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि बेहतर सुझावों को ट्रिब्यून फ्लाईओवर को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने रखा जाएगा, जिसके बाद आखिरी फैसला हाईकोर्ट का होगा।
लोगों के सुझाव और आपत्तियां सुनने से पहले यूटी प्रशासन को हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि प्रशासन मसले पर पंजाब व हरियाणा के अफसरों के साथ भी बातचीत करें क्योंकि चंडीगढ़ में आने वाला ट्रैफिक दोनों राज्यों की ओर से आता है, जिसकी वजह से जाम की स्थिति पैदा होती है।
एडवाइजर मनोज परिदा की अध्यक्षता में हुई बैठक में पंजाब-हरियाणा ने यूटी प्रशासन के ट्रिब्यून फ्लाईओवर बनाने के फैसले पर रजामंदी जता दी थी, जिसके बाद से अंदाजा लगाया जा रहा था कि फ्लाईओवर बनाने को लेकर अब कोई अड़चन नहीं है, लेकिन सार्वजनिक सुनवाई के दौरान ज्यादातर लोगों ने फ्लाईओवर नहीं बनाने की मांग की थी।
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ज्यादातर लोगों ने ट्रिब्यून फ्लाईओवर के खिलाफ दलील दी थी क्योंकि उन्हें लगता था कि इससे शहर का स्वरूप बिगड़ेगा। दूसरी ओर, कई लोगों ने यह भी राय दी थी कि इस वक्त शहर के लोगों को न केवल ट्रिब्यून चौक के पास बल्कि शहर के कई अन्य चौराहों पर भी ट्रैफिक की समस्या से जूझना पड़ता है। लिहाजा फ्लाईओवर या अंडरपास की जरूरत अन्य जगह भी है।
दरअसल, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि फ्लाईओवर के लिए पुराने 472 पेड़ों को नहीं काटा जा सकता। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि वह कोई ऐसा विकल्प ढूंढे, जिसमें पेड़ काटने से बचा जाए क्योंकि यह शहर के हरे-भरे स्वरूप को बिगाड़ेगा।
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लोगों के सुझाव और आपत्तियां सुनने से पहले यूटी प्रशासन को हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि प्रशासन मसले पर पंजाब व हरियाणा के अफसरों के साथ भी बातचीत करें क्योंकि चंडीगढ़ में आने वाला ट्रैफिक दोनों राज्यों की ओर से आता है, जिसकी वजह से जाम की स्थिति पैदा होती है।
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एडवाइजर मनोज परिदा की अध्यक्षता में हुई बैठक में पंजाब-हरियाणा ने यूटी प्रशासन के ट्रिब्यून फ्लाईओवर बनाने के फैसले पर रजामंदी जता दी थी, जिसके बाद से अंदाजा लगाया जा रहा था कि फ्लाईओवर बनाने को लेकर अब कोई अड़चन नहीं है, लेकिन सार्वजनिक सुनवाई के दौरान ज्यादातर लोगों ने फ्लाईओवर नहीं बनाने की मांग की थी।
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ज्यादातर लोगों ने ट्रिब्यून फ्लाईओवर के खिलाफ दलील दी थी क्योंकि उन्हें लगता था कि इससे शहर का स्वरूप बिगड़ेगा। दूसरी ओर, कई लोगों ने यह भी राय दी थी कि इस वक्त शहर के लोगों को न केवल ट्रिब्यून चौक के पास बल्कि शहर के कई अन्य चौराहों पर भी ट्रैफिक की समस्या से जूझना पड़ता है। लिहाजा फ्लाईओवर या अंडरपास की जरूरत अन्य जगह भी है।
दरअसल, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि फ्लाईओवर के लिए पुराने 472 पेड़ों को नहीं काटा जा सकता। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि वह कोई ऐसा विकल्प ढूंढे, जिसमें पेड़ काटने से बचा जाए क्योंकि यह शहर के हरे-भरे स्वरूप को बिगाड़ेगा।