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पंचायत चुनाव के बाद अब निकाय चुनाव में होगा नया प्रयोग!

Thu, 03 Sep 2015 03:07 PM IST
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 03 Sep 2015 03:07 PM IST
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after panchayat election changes may be in nagar nigam election

पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों के लिए दसवीं पास होने के अलावा अन्य शर्तें लागू किए जाने के बाद हरियाणा की भाजपा सरकार अब नगर निकाय चुनावों में भी नया प्रयोग कर सकती है।

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पार्टी का मानना है कि अगर नगर निकायों के सीधे चुनाव करवा दिए जाएं तो धनबल और बाहुबल पर रोक लग जाएगी। भाजपा विधायक दल की मंगलवार को हुई बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा हुई है।
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माना जा रहा है कि विधानसभा के मानसून सत्र के बाद सरकार इस मसले पर गंभीरता से विचार कर सकती है। यदि यह योजना सिरे चढ़ी तो नगर परिषद और पालिकाओं के अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के बजाय सीधे जनता द्वारा किया जाएगा।
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पार्टी का मानना है कि चूंकि यूपी और एमपी में इस तरह का प्रावधान पहले से ही है। लिहाजा, हरियाणा में भी इसे लागू किया जा सकता है।

चुनाव अवधि घटाए जाने का प्रस्ताव

after panchayat election changes may be in nagar nigam election

बैठक में कुछ विधायकों ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि निगर निकायों की कार्य अवधि पांच वर्ष से घटा दी जाए। कई विधायकों ने इस बात पर अपनी सहमति भी जताई है। जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में नगर निगम के मेयर, नगर परिषद और पालिका अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता के माध्यम से होता है।

इस कारण उनकी शक्तियां भी अधिक हैं। सभी राज्यों का नगर निकाय का कानून अलग है। पंजाब म्युनिसिपल एक्ट के तहत हरियाणा में भी नगर निगम के मेयर और नगर परिषद व नगर पालिकाओं के अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के जरिए किया जाता है। हरियाणा गठन के बाद से इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।

विधायक से कम नहीं होगी मेयर की ताकत
हरियाणा में भाजपा सरकार यदि एक्ट में बदलाव कर सीधे जनता के मार्फत चुनाव करवाती है तो मेयर का रुतबा बढ़ जाएगा। राज्य में इस समय मेयर का चुनाव पार्षद करते हैं। नगर परिषदों में भी यही प्रणाली है। सीधे चुनाव होता है तो मेयर और अध्यक्ष को मिलने वाला मत प्रतिशत भी बढ़ेगा। लिहाजा मेयरों की ताकत किसी मायने में विधायकों से कम नहीं होगी।

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