पंचायत चुनाव के बाद अब निकाय चुनाव में होगा नया प्रयोग!
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पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों के लिए दसवीं पास होने के अलावा अन्य शर्तें लागू किए जाने के बाद हरियाणा की भाजपा सरकार अब नगर निकाय चुनावों में भी नया प्रयोग कर सकती है।
पार्टी का मानना है कि अगर नगर निकायों के सीधे चुनाव करवा दिए जाएं तो धनबल और बाहुबल पर रोक लग जाएगी। भाजपा विधायक दल की मंगलवार को हुई बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा हुई है।
माना जा रहा है कि विधानसभा के मानसून सत्र के बाद सरकार इस मसले पर गंभीरता से विचार कर सकती है। यदि यह योजना सिरे चढ़ी तो नगर परिषद और पालिकाओं के अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के बजाय सीधे जनता द्वारा किया जाएगा।
पार्टी का मानना है कि चूंकि यूपी और एमपी में इस तरह का प्रावधान पहले से ही है। लिहाजा, हरियाणा में भी इसे लागू किया जा सकता है।
चुनाव अवधि घटाए जाने का प्रस्ताव
बैठक में कुछ विधायकों ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि निगर निकायों की कार्य अवधि पांच वर्ष से घटा दी जाए। कई विधायकों ने इस बात पर अपनी सहमति भी जताई है। जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में नगर निगम के मेयर, नगर परिषद और पालिका अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता के माध्यम से होता है।
इस कारण उनकी शक्तियां भी अधिक हैं। सभी राज्यों का नगर निकाय का कानून अलग है। पंजाब म्युनिसिपल एक्ट के तहत हरियाणा में भी नगर निगम के मेयर और नगर परिषद व नगर पालिकाओं के अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के जरिए किया जाता है। हरियाणा गठन के बाद से इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
विधायक से कम नहीं होगी मेयर की ताकत
हरियाणा में भाजपा सरकार यदि एक्ट में बदलाव कर सीधे जनता के मार्फत चुनाव करवाती है तो मेयर का रुतबा बढ़ जाएगा। राज्य में इस समय मेयर का चुनाव पार्षद करते हैं। नगर परिषदों में भी यही प्रणाली है। सीधे चुनाव होता है तो मेयर और अध्यक्ष को मिलने वाला मत प्रतिशत भी बढ़ेगा। लिहाजा मेयरों की ताकत किसी मायने में विधायकों से कम नहीं होगी।