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51 साल बाद फिर से प्यास बुझाएगा गांव का कुआं
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गांव खुडडाअलीशेर में कुआं की सफाई बाद उसे घेरा गया।
- फोटो : 27ctyneeraj01e.jpg
चंडीगढ़। गांव खुड्डा अलीशेर में बना 200 साल पहले बना 150 फुट गहरा कुआं एक बार फिर 51 वर्ष बाद प्यास बुझाएगा। कुछ लोग इसे 1754 ईस्वी में बना कुआं बताते हैं।
कुएं की सफाई के बाद 25 जुलाई को पूजा की गई। उसके बाद पानी भी निकाला गया। कुएं का पानी तालाब में भरा जाएगा और फिर इसकी जांच कराई जाएगी कि यह पानी पीने लायक है या नहीं। 1970 से लोग कुएं का पानी पीना छोड़ने लगे थे। 1980 के बाद तो सबने यहां से पानी लाना छोड़ दिया। तब पानी खींचने के लिए लज्ज डोल लगे थे। पशुओं के पानी पीने का भी प्रबंध था। गांव के लोगों का कहना है कि 1919 में कुएं की सफाई हुई थी। इस कुआं की गहराई डेढ़ सौ फीट है। इस कुएं की सफाई में 15 दिन लगे और इस पर तीन लाख रुपये का खर्च आया।
गांव के लोगों ने बताया कि पहले इसी कुएं से गांव के लोगों और जानवरों की प्यास बुझती थी। लेकिन जब गांव में बिजली-पानी आया तो लोग इससे दूर होते गए। धार्मिक कार्यों के लिए ही इसका प्रयोग किया जाने लगा। धीरे-धीरे इसमें गंदगी भी जाने लगी। इसमें कोई न गिरे, इसके लिए लोहे की जाली लगा दी गई, लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
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बही में लिखा था कुएं के चंदे का हिसाब (27ctyneeraj01c)
मेरा गांव का कुआं 1754 में बना है। पहले लेन-देन बही में लिखा जाता था। मेरे ताया के पास बही थी, जिसमें कुएं के लिए चंदा एकत्र करने के बारे में लिखा गया था। उसी से पता चला था कि कुआं कितना पुराना है। -नाथ सिंह, गांववासी
लोगों के साथ मिलकर कराई सफाई (27ctyneeraj01b)
बिजली विभाग से 31 मई को सेवानिवृत हुए तो सोचा कि खेड़ा और कुआं की सफाई की जाए। घर में कहा कि इस पर एक लाख रुपये खर्च करेंगे। इसका पता गांव के लोगों को चली तो सभी ने मिलकर चंदा एकत्र कर कुएं की सफाई करवाई। -प्यारा सिंह, गांववासी
गांव की प्यास बुझाता था कुआं (27ctyneeraj01a)
बहुत पुराना कुआं है। इस कुएं से पूरे गांव के लोगों की प्यास बुझती थी। गांव में बिजली-पानी की सरकारी सुविधा होने पर कुएं का पानी पीना छोड़ दिया। पहले बहुत कम घर थे। -सरूप सिंह, गांववासी
कुएं की सफाई में हर किसी ने दिया सहयोग (27ctyneeraj01d)
कुएं की सफाई में गांव के के लोगों का सहयोग है। गांव के हरेक घर और लोगों ने सहयोग किया है। इसकी सफाई में 15 दिन में करीब तीन लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसके चारों ओर स्टील की रेलिंग लगाई गई है। -मलकीत सिंह, गांववासी
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कुएं की सफाई के बाद 25 जुलाई को पूजा की गई। उसके बाद पानी भी निकाला गया। कुएं का पानी तालाब में भरा जाएगा और फिर इसकी जांच कराई जाएगी कि यह पानी पीने लायक है या नहीं। 1970 से लोग कुएं का पानी पीना छोड़ने लगे थे। 1980 के बाद तो सबने यहां से पानी लाना छोड़ दिया। तब पानी खींचने के लिए लज्ज डोल लगे थे। पशुओं के पानी पीने का भी प्रबंध था। गांव के लोगों का कहना है कि 1919 में कुएं की सफाई हुई थी। इस कुआं की गहराई डेढ़ सौ फीट है। इस कुएं की सफाई में 15 दिन लगे और इस पर तीन लाख रुपये का खर्च आया।
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गांव के लोगों ने बताया कि पहले इसी कुएं से गांव के लोगों और जानवरों की प्यास बुझती थी। लेकिन जब गांव में बिजली-पानी आया तो लोग इससे दूर होते गए। धार्मिक कार्यों के लिए ही इसका प्रयोग किया जाने लगा। धीरे-धीरे इसमें गंदगी भी जाने लगी। इसमें कोई न गिरे, इसके लिए लोहे की जाली लगा दी गई, लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
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बही में लिखा था कुएं के चंदे का हिसाब (27ctyneeraj01c)
मेरा गांव का कुआं 1754 में बना है। पहले लेन-देन बही में लिखा जाता था। मेरे ताया के पास बही थी, जिसमें कुएं के लिए चंदा एकत्र करने के बारे में लिखा गया था। उसी से पता चला था कि कुआं कितना पुराना है। -नाथ सिंह, गांववासी
लोगों के साथ मिलकर कराई सफाई (27ctyneeraj01b)
बिजली विभाग से 31 मई को सेवानिवृत हुए तो सोचा कि खेड़ा और कुआं की सफाई की जाए। घर में कहा कि इस पर एक लाख रुपये खर्च करेंगे। इसका पता गांव के लोगों को चली तो सभी ने मिलकर चंदा एकत्र कर कुएं की सफाई करवाई। -प्यारा सिंह, गांववासी
गांव की प्यास बुझाता था कुआं (27ctyneeraj01a)
बहुत पुराना कुआं है। इस कुएं से पूरे गांव के लोगों की प्यास बुझती थी। गांव में बिजली-पानी की सरकारी सुविधा होने पर कुएं का पानी पीना छोड़ दिया। पहले बहुत कम घर थे। -सरूप सिंह, गांववासी
कुएं की सफाई में हर किसी ने दिया सहयोग (27ctyneeraj01d)
कुएं की सफाई में गांव के के लोगों का सहयोग है। गांव के हरेक घर और लोगों ने सहयोग किया है। इसकी सफाई में 15 दिन में करीब तीन लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसके चारों ओर स्टील की रेलिंग लगाई गई है। -मलकीत सिंह, गांववासी