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बजट को लेकर एडवाइजर का विभागों के लिए सख्त फरमान
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Sat, 06 Aug 2016 01:38 AM IST
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परिमल राय, चंडीगढ़ सलाहकार
- फोटो : amar ujala
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एडवाइजर परिमल राय ने सभी विभागाध्यक्षों को अपना बजट समय से खर्च करने के सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। शुक्रवार को आयोजित बजट रिव्यू मीटिंग में उन्होंने सभी विभागों की बजट खर्च की रिपोर्ट पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को आदेश देते हुए कहा कि किसी भी विभाग का बजट लैप्स नहीं होना चाहिए। अपना बजट खर्च करने के लिए तत्परता दिखाएं।
हालांकि अभी तक यूटी प्रशासन अपने कुल बजट का 39 प्रतिशत खर्च कर चुका है। जो तय बजट खर्च के बिल्कुल बराबर है। जिससे प्रशासन अभी तक सेफ जोन में है। सीटीयू जैसे कई विभाग अभी भी बजट खर्च में फिसड्डी हैं। एडवाइजर परिमल राय ने इन विभागों को भी बजट खर्च में तेजी लाने को कहा है। जिनके जो भी प्रोजेक्ट चल रहे उन पर बजट खर्चा जाए ताकि वह समय पर पूरे हों। बजट खर्च की क्वार्टर रिपोर्ट उजागर होने केबाद एडवाइजर ने यह पहली मीटिंग बुलाई थी।
पिछली बार कटा था 226 करोड़
बजट खर्च रिपोर्ट अगले वित्त वर्ष में मिलने वाले बजट पर सीधा असर डालती है। इसी बजट रिपोर्ट के आधार पर वित्त मंत्रालय अगला बजट तय करता है। खासकर सितंबर में आने वाली छमाही बजट खर्च रिपोर्ट के आधार पर ही मंत्रालय अगला बजट तय करता है। पिछले साल इसी रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय ने सितंबर-2015 में प्लान हेड के कुल 860 करोड़ में से 226 करोड़ का बजट काट लिया था। जिसके बाद प्रशासन को अपने खर्चों में 26 प्रतिशत तक की कटौती करनी पड़ी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए एडवाइजर ने पहले से ही सभी अधिकारियों को चौकसी बरतने केआदेश दिए हैं।
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बजट कटने के बाद एसीआर खराब होने की चेतावनी
पिछले साल बजट कटने पर सभी विभागों को 26 प्रतिशत तक कम खर्च करने की हिदायत दी गई थी। साथ ही उस समय एडवाइजर रहे विजय कुमार देव ने अधिकारियों को साफ आदेश दिए थे कि जो विभाग अपना बजट समय से नहीं खर्च पाएगा। उसके विभागाध्यक्ष की एसीआर में यह लिखा जाएगा।
यह मिला था बजट
इस साल प्रशासन को प्लान हेड में 700 करोड़ का बजट मिला है जबकि प्रशासन ने केंद्र सरकार से 2095 करोड़ रुपये मांगे थे। नॉन प्लान में 2834.54 करोड़ का बजट मिला है।
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हालांकि अभी तक यूटी प्रशासन अपने कुल बजट का 39 प्रतिशत खर्च कर चुका है। जो तय बजट खर्च के बिल्कुल बराबर है। जिससे प्रशासन अभी तक सेफ जोन में है। सीटीयू जैसे कई विभाग अभी भी बजट खर्च में फिसड्डी हैं। एडवाइजर परिमल राय ने इन विभागों को भी बजट खर्च में तेजी लाने को कहा है। जिनके जो भी प्रोजेक्ट चल रहे उन पर बजट खर्चा जाए ताकि वह समय पर पूरे हों। बजट खर्च की क्वार्टर रिपोर्ट उजागर होने केबाद एडवाइजर ने यह पहली मीटिंग बुलाई थी।
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पिछली बार कटा था 226 करोड़
बजट खर्च रिपोर्ट अगले वित्त वर्ष में मिलने वाले बजट पर सीधा असर डालती है। इसी बजट रिपोर्ट के आधार पर वित्त मंत्रालय अगला बजट तय करता है। खासकर सितंबर में आने वाली छमाही बजट खर्च रिपोर्ट के आधार पर ही मंत्रालय अगला बजट तय करता है। पिछले साल इसी रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय ने सितंबर-2015 में प्लान हेड के कुल 860 करोड़ में से 226 करोड़ का बजट काट लिया था। जिसके बाद प्रशासन को अपने खर्चों में 26 प्रतिशत तक की कटौती करनी पड़ी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए एडवाइजर ने पहले से ही सभी अधिकारियों को चौकसी बरतने केआदेश दिए हैं।
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बजट कटने के बाद एसीआर खराब होने की चेतावनी
पिछले साल बजट कटने पर सभी विभागों को 26 प्रतिशत तक कम खर्च करने की हिदायत दी गई थी। साथ ही उस समय एडवाइजर रहे विजय कुमार देव ने अधिकारियों को साफ आदेश दिए थे कि जो विभाग अपना बजट समय से नहीं खर्च पाएगा। उसके विभागाध्यक्ष की एसीआर में यह लिखा जाएगा।
यह मिला था बजट
इस साल प्रशासन को प्लान हेड में 700 करोड़ का बजट मिला है जबकि प्रशासन ने केंद्र सरकार से 2095 करोड़ रुपये मांगे थे। नॉन प्लान में 2834.54 करोड़ का बजट मिला है।