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सुखना को बचाने के लिए पहल, गाद निकालने का फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 06 May 2017 01:25 AM IST
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चंडीगढ़ की शान सुखना लेक
- फोटो : अमर उजाला
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शहर की लाइफलाइन सुखना को बचाने के लिए प्रशासन ने पहल कर दी है। शुक्रवार शाम हुई बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन ने सूखती सुखना को बचाने के लिए तीन मोर्चों पर काम करने का फैसला लिया है। पहला सुखना से गाद निकालने का, दूसरा बरसाती पानी के रास्तों को साफ करना और तीसरा तकनीकी विशेषज्ञ नियुक्त करने का। प्रशासन का कहना है कि इस बार सुखना ज्यादा सूख गई है, इसलिए गाद निकालने का अच्छा मौका है।
अमर उजाला ने मंगलवार के अंक में सुखना में गाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसमें बताया गया कि सुखना के जीवित रहने के लिए गाद का निकालना कितना महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट के निर्देश पर सुखना के संरक्षण के लिए शुक्रवार को चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक के बाद गृह सचिव अनुराग अग्रवाल ने बताया कि बैठक में यह फैसला लिया गया कि सुखना से लगते पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के हिस्से में पानी का विकल्प तलाशा जाए।
जितने भी पानी के चैनल ब्लॉक पड़े है, उनमें सफाई करवा पानी को सुखना तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए पंजाब व हरियाणा सरकार की भी मदद ली जाएगी। इसके अलावा बरसाती पानी की एक एक बूंद को सुखना तक पहुंचाने के लिए हर संभव व्यवस्थित ढंग से चैनल तैयार किया जाएगा। गृह सचिव ने कहा कि सुखना में से गाद और वीड निकालने का भी फैसला लिया गया।
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इस समय सुखना जहां सूखी हुई है, प्रशासन वहां से गाद निक ालने चल रहा है। इसके अलावा सुखना के संरक्षण को लेकर लोगों की राय और तकनीकी विशेषज्ञ नियुक्त करने पर भी सलाह ली गई। बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा पंजाब व हरियाणा के अर्बन लोकल बॉडीज और पर्यावरण विभाग के भी अधिकारी मौजूद रहे।
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अमर उजाला ने मंगलवार के अंक में सुखना में गाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसमें बताया गया कि सुखना के जीवित रहने के लिए गाद का निकालना कितना महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट के निर्देश पर सुखना के संरक्षण के लिए शुक्रवार को चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक के बाद गृह सचिव अनुराग अग्रवाल ने बताया कि बैठक में यह फैसला लिया गया कि सुखना से लगते पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के हिस्से में पानी का विकल्प तलाशा जाए।
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जितने भी पानी के चैनल ब्लॉक पड़े है, उनमें सफाई करवा पानी को सुखना तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए पंजाब व हरियाणा सरकार की भी मदद ली जाएगी। इसके अलावा बरसाती पानी की एक एक बूंद को सुखना तक पहुंचाने के लिए हर संभव व्यवस्थित ढंग से चैनल तैयार किया जाएगा। गृह सचिव ने कहा कि सुखना में से गाद और वीड निकालने का भी फैसला लिया गया।
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इस समय सुखना जहां सूखी हुई है, प्रशासन वहां से गाद निक ालने चल रहा है। इसके अलावा सुखना के संरक्षण को लेकर लोगों की राय और तकनीकी विशेषज्ञ नियुक्त करने पर भी सलाह ली गई। बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा पंजाब व हरियाणा के अर्बन लोकल बॉडीज और पर्यावरण विभाग के भी अधिकारी मौजूद रहे।
क्यों जरूरी है सुखना से गाद निकालना
सुखना
- फोटो : अमर उजाला
गाद ने सुखना की भंडारण क्षमता कम कर दी है। हालत यह है कि लेक में आधी गाद है और आधा पानी। वर्तमान में पानी का स्तर 1153.20 फुट है। लेकिन विशेषज्ञों की मानें ता पानी का स्तर इतना भी नहीं है। इसमें आधा हिस्सा गाद का है। साल 2012 के बाद से अब तक गाद नहीं निकाली गई है। प्रशासन ने अब बिगड़ते हालात देखते हुए गाद निकालने का फैसला लिया है। गाद ने सुखना की गहराई कम कर दी है। सुखना की पहले 12.5 फीट गहराई थी, अब सात फुट बची है।
एनआईएच रूड़की ने भी अपनी रिपोर्ट में गाद को बताया समस्या
नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाइड्रोलॉजी (एनआईएच) रुड़की भी अपनी स्टडी में सुखना के सूखने की मुख्य वजह गाद को बता चुका है। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाईड्रोलॉजी की स्टडी को आधार बनाते हुए पर्यावरण विभाग ने यूटी के इंजीनियरिंग विभाग से गाद की समस्याओं के हल के लिए आधुनिक मशीन खरीदनें के लिए कहा था। अब प्रशासन ने सुखना लेक में से सिल्ट (गाद) निकालने के लिए फैसला लिया है।
पहले 5 सालों में ही 23 प्रतिशत तक सूखी गई थी सुखना
सुखना का निर्माण वर्ष 1958 में हुआ था। पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सुखना के निर्माण से लेकर अगले पांच साल के बीच सुखना का वाटर लेवल 23 प्रतिशत घटा गया था। उसी समय शहर के शिल्पकार ली कार्बूजिए ने प्रशासन व मौजूदा सरकार को गाद की समस्या को लेकर सचेत किया था। जिसके बाद ग्रेटर पंजाब गवर्नमेंट ने वर्ष 1963 में सुरखा के संरक्षण के लिए करीब 26 स्क्वायर किलोमीटर जमीन अधिग्रहीत की थी।
एनआईएच रूड़की ने भी अपनी रिपोर्ट में गाद को बताया समस्या
नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाइड्रोलॉजी (एनआईएच) रुड़की भी अपनी स्टडी में सुखना के सूखने की मुख्य वजह गाद को बता चुका है। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाईड्रोलॉजी की स्टडी को आधार बनाते हुए पर्यावरण विभाग ने यूटी के इंजीनियरिंग विभाग से गाद की समस्याओं के हल के लिए आधुनिक मशीन खरीदनें के लिए कहा था। अब प्रशासन ने सुखना लेक में से सिल्ट (गाद) निकालने के लिए फैसला लिया है।
पहले 5 सालों में ही 23 प्रतिशत तक सूखी गई थी सुखना
सुखना का निर्माण वर्ष 1958 में हुआ था। पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सुखना के निर्माण से लेकर अगले पांच साल के बीच सुखना का वाटर लेवल 23 प्रतिशत घटा गया था। उसी समय शहर के शिल्पकार ली कार्बूजिए ने प्रशासन व मौजूदा सरकार को गाद की समस्या को लेकर सचेत किया था। जिसके बाद ग्रेटर पंजाब गवर्नमेंट ने वर्ष 1963 में सुरखा के संरक्षण के लिए करीब 26 स्क्वायर किलोमीटर जमीन अधिग्रहीत की थी।