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मॉडल टेनेंसी एक्ट को लागू कराने के लिए प्रशासन ने केंद्र को भेजी फाइल
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चंडीगढ़। शहर में जल्द ही किराएदार और मकान मालिक की सुरक्षा के लिए मॉडल टेनेंसी एक्ट लागू हो जाएगा। यूटी प्रशासन ने आखिरी मंजूरी के लिए फाइल केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी है। केंद्र की मंजूरी के साथ ही एक्ट को लेकर अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने एक्ट को लेकर अपनी फाइल केंद्र को भेज दी है। लागू होने के बाद मकान मालिक और किराएदार के बीच किसी भी तरह कोई समस्या की सुनवाई किराया प्राधिकरण और किराया न्यायालय में की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, किराया न्यायालय में सदस्य पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के परामर्श के बाद रखे जाएंगे। यूटी प्रशासन ने अधिनियम की अधिसूचना का प्रारूप एक अक्तूबर 2020 को जारी किया था और शहरवासियों से सुझाव मांगे थे। सुझाव देने के लिए प्रशासन ने एक महीने का समय दिया था। सैकड़ों लोगों ने अपने सुझाव सौंपे थे, जिसे प्रशासन ने केंद्र को भेजा था। इस नए अधिनियम के अनुसार मकान मालिकों और किराएदारों के बीच एक लिखित अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिसमें किराए से लेकर हर बड़ी से छोटी जिम्मेदारी तय की जाएगी। यहां तक कि यह भी साफ रहेगा कि मकान की पुताई कौन करवाएगा। इसके अलावा नल की टोटी से लेकर वॉश बेसिन और पंखे या खराब स्विच कौन बदलवाएगा, इसे लेकर भी अधिनियम में जिम्मेदारी तय की गई है।
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किराएदार को निकालने के लिए भी बन जाएंगे नियम
नए अधिनियम के अनुसार, किराया अनुबंध में लिखी अवधि से पहले किराएदार को तब तक नहीं निकाला जा सकता, जब तक उसने लगातार कई महीनों तक किराया न दिया हो या वह संपत्ति का दुरुपयोग कर रहा हो। अगर किराया अनुबंध खत्म होने के बाद भी वह मकान खाली नहीं कर रहा है तो मकान मालिक को दोगुना मासिक किराया मांगने का अधिकार है। किराए का तीन गुना सुरक्षा राशि लेना तब तक गैर-कानूनी होगा, जब तक इसका अनुबंध न बनवाया गया हो। किराएदार के घर खाली करने पर मकान मालिक को एक महीने के भीतर यह रकम लौटानी होगी।
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प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने एक्ट को लेकर अपनी फाइल केंद्र को भेज दी है। लागू होने के बाद मकान मालिक और किराएदार के बीच किसी भी तरह कोई समस्या की सुनवाई किराया प्राधिकरण और किराया न्यायालय में की जाएगी।
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जानकारी के अनुसार, किराया न्यायालय में सदस्य पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के परामर्श के बाद रखे जाएंगे। यूटी प्रशासन ने अधिनियम की अधिसूचना का प्रारूप एक अक्तूबर 2020 को जारी किया था और शहरवासियों से सुझाव मांगे थे। सुझाव देने के लिए प्रशासन ने एक महीने का समय दिया था। सैकड़ों लोगों ने अपने सुझाव सौंपे थे, जिसे प्रशासन ने केंद्र को भेजा था। इस नए अधिनियम के अनुसार मकान मालिकों और किराएदारों के बीच एक लिखित अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिसमें किराए से लेकर हर बड़ी से छोटी जिम्मेदारी तय की जाएगी। यहां तक कि यह भी साफ रहेगा कि मकान की पुताई कौन करवाएगा। इसके अलावा नल की टोटी से लेकर वॉश बेसिन और पंखे या खराब स्विच कौन बदलवाएगा, इसे लेकर भी अधिनियम में जिम्मेदारी तय की गई है।
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किराएदार को निकालने के लिए भी बन जाएंगे नियम
नए अधिनियम के अनुसार, किराया अनुबंध में लिखी अवधि से पहले किराएदार को तब तक नहीं निकाला जा सकता, जब तक उसने लगातार कई महीनों तक किराया न दिया हो या वह संपत्ति का दुरुपयोग कर रहा हो। अगर किराया अनुबंध खत्म होने के बाद भी वह मकान खाली नहीं कर रहा है तो मकान मालिक को दोगुना मासिक किराया मांगने का अधिकार है। किराए का तीन गुना सुरक्षा राशि लेना तब तक गैर-कानूनी होगा, जब तक इसका अनुबंध न बनवाया गया हो। किराएदार के घर खाली करने पर मकान मालिक को एक महीने के भीतर यह रकम लौटानी होगी।