फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Administration not serious for PGI-PU underpass, looking for agency for design after 21 months

पीजीआई-पीयू अंडरपास के लिए गंभीर नहीं प्रशासन, 21 महीने बाद डिजाइन के लिए एजेंसी की तलाश

Fri, 27 Aug 2021 02:35 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 27 Aug 2021 02:35 AM IST
विज्ञापन
Administration not serious for PGI-PU underpass, looking for agency for design after 21 months
चंडीगढ़। पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी के बीच अंडरपास के निर्माण को लेकर यूटी प्रशासन का इंजीनियरिंग विभाग गंभीर नहीं है। जरूरत के बावजूद विभाग इस प्रोजेक्ट पर कछुए की चाल से चल रहा है। बता दें कि प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने 4 नवंबर 2019 को इस अंडरपास को बनाने की मंजूरी दे दी थी। कहा गया था कि यहां तत्काल अंडरपास बनाने की जरूरत है, लेकिन करीब 21 महीने बीतने के बाद अब तक इसके स्ट्रक्चरल डिजाइन के लिए एजेंसी तलाशी जा रही है।
विज्ञापन

इंजीनियरिंग विभाग ने योग्य एजेंसियों से आवेदन मांगे हैं। साथ ही फैसला लिया है कि अब यहां एस्केलेटर की जगह रैंप बनाए जाएंगे, जबकि पहले यहां पर एस्केलेटर बनाने की चर्चा थी। चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने बताया कि वह स्ट्रक्चरल डिजाइन के लिए एजेंसी की नियुक्ति करने जा रहे हैं। इसके लिए योग्य एजेंसियां 1 सितंबर तक आवेदन कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि अब अंडरपास में रैंप ही बनाए जाएंगे और उनको इसकी मंजूरी मिल गई है। पैदल चलने वाले लोगों के लिए ये अंडरपास बनाया जाना है।
विज्ञापन

स्ट्रक्चरल डिजाइन का काम पूरा होने के बाद ही अनुमानित लागत तैयार करने पर वह काम शुरू कर देंगे। इसके बाद ही वह प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया पर काम शुरू करेंगे। पीजीआई-पीयू रोड से काफी लोग गुजरते हैं, जिसके चलते ही इस अंडरपास की चौड़ाई अधिक होने की विभाग ने सिफारिशें भेजी थीं, ताकि लोग आसानी से इस अंडरपास से गुजर सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन

पीजीआई और प्रशासन के अधिकारियों के बीच 2018 में हुई थी बैठक
चार नवंबर 2019 को प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को लेकर प्रशासक को एक प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) दी थी और बताया था कि पीजीआई और पीयू आने-जाने वाले हजारों लोगों को गाड़ियों की आवाजाही के बीच रोजाना सड़क पार करना पड़ता है। कई लोग तो हादसे का शिकार भी हो चुके हैं। प्रशासन के अधिकारियों ने सर्वे करने के बाद बैठक के दौरान पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिस पर प्रशासक ने सहमति जता दी थी। पीजीआई में प्रतिदिन हजारों की संख्या में स्थानीय और दूसरे राज्यों से मरीज व उनके तीमारदारों का आना-जाना होता है। समस्या से निपटने के लिए वर्ष 2018 में यूटी प्रशासन के अफसरों और पीजीआई डायरेक्टर की बीच एक बैठक हुई थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से पूरे क्षेत्र का सर्वे किया गया और एक अंडरपास बनाने पर सहमति बनी। इस अंडरपास के बनने से पीयू आने व जाने वाले छात्रों को भी सड़क पार करने की जरूरत नहीं होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed