{"_id":"5f3c1cf08ebc3e3ccf2ffe84","slug":"administration-2195-flats-maloya-rent-chandigarh-news-pkl385060552","type":"story","status":"publish","title_hn":"मलोया के 2195 फ्लैट्स किराए पर देगा प्रशासन, 2500 रुपये होगा किराया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मलोया के 2195 फ्लैट्स किराए पर देगा प्रशासन, 2500 रुपये होगा किराया
विज्ञापन
चंडीगढ़। यूटी प्रशासन शहर में केंद्र सरकार की किफायती किराया आवासीय परिसर योजना को लागू करने जा रहा है। इसके तहत मलोया में खाली पड़े 2195 फ्लैट्स को किराए पर देने की योजना बनाई गई है। सूत्रों के अनुसार, इन फ्लैट्स का किराया 2500 रुपये के करीब होगा। हालांकि किराया तय करने के लिए प्रशासन एक कमेटी का गठन करेगा, जो मार्केट रेट का सर्वे करेगा।
मंगलवार को इस योजना को लेकर एडवाइजर मनोज परिदा की अध्यक्षता में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के चेयरमैन, सीईओ, सेक्रेटरी, चीफ इंजीनियर, डीसी मनदीप सिंह बराड़, नगर निगम के कमिश्नर आदि की बैठक हुई। बैठक में यह फैसला लिया गया कि किफायती किराया आवासीय परिसर योजना के लिए चंडीगढ़ प्रशासन केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ एमओयू साइन करेगा।
इस योजना के लिए सीएचबी को नोडल एजेंसी बनाया गया है और सेक्रेटरी हाउसिंग को नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया है। सीएचबी के एक अधिकारी ने बताया कि योजना को शहर में लागू करने और मकान आवंटन के लिए एक एजेंसी हायर की जाएगी। गौरतलब है कि मलोया में करीब 2445 स्मॉल फ्लैट्स खाली हैं लेकिन कालोनी नंबर चार में अभी 250 लोग ऐसे हैं, जो मकान पाने के हकदार हैं लेकिन किन्हीं कारणों से उनके आवेदन लटके हुए हैं, इसलिए हाउसिंग बोर्ड ने उनके 250 मकानों छोड़कर 2195 मकानों को किराये पर देने की तैयारी कर रहा है।
विज्ञापन
पहले चरण में मजदूरों को दिए जाएंगे पहले से खाली पड़े मकान
प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि योजना को दो हिस्सों में बांटा गया है। सबसे पहले सरकारी पैसे से बने और खाली पड़े आवासीय परिसरों को किफायती किराया आवासीय परिसर में बदला जाएगा और उन्हें 25 साल के लिए सस्ते किराए पर मजदूरों और गरीबों को दिया जाएगा। वहीं, दूसरे हिस्से में सरकारी और निजी कंपनियों को अपनी जमीन पर 25 साल के लिए किफायती किराया आवासीय परिसर बनाने के लिए कई तरह की छूट दी जाएंगी। बता दें कि 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज में इस योजना का एलान किया गया था।
मजदूर वर्ग को लाभ प्रदान करना लक्ष्य
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि इस योजना का लाभ शहर के मजदूर वर्ग को होगा। कोरोना वायरस महामारी के कारण रोजगार के बेहतर मौकों के लिए गांवों और छोटे कस्बों से शहर आने वाले प्रवासी मजदूरों और शहरी गरीबों का उल्टा पलायन हुआ है। आमतौर पर किराया बचाने के लिए ये मजदूर झुग्गी-झोपड़ियों, अनाधिकृत कालोनियों और शहर के बाहरी इलाकों में रहते हैं। इसके अलावा बेहतर मौकों की तलाश में गांवों से शहर आने वाले और मैन्युफैक्चरिंग, स्वास्थ्य, निर्माण, होटलों और व्यावसायिक संगठनों में काम करने वाले कर्मचारियों, मजदूरों और छात्रों को इस योजना से काफी लाभ मिलेगा।
विज्ञापन
मंगलवार को इस योजना को लेकर एडवाइजर मनोज परिदा की अध्यक्षता में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के चेयरमैन, सीईओ, सेक्रेटरी, चीफ इंजीनियर, डीसी मनदीप सिंह बराड़, नगर निगम के कमिश्नर आदि की बैठक हुई। बैठक में यह फैसला लिया गया कि किफायती किराया आवासीय परिसर योजना के लिए चंडीगढ़ प्रशासन केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ एमओयू साइन करेगा।
विज्ञापन
इस योजना के लिए सीएचबी को नोडल एजेंसी बनाया गया है और सेक्रेटरी हाउसिंग को नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया है। सीएचबी के एक अधिकारी ने बताया कि योजना को शहर में लागू करने और मकान आवंटन के लिए एक एजेंसी हायर की जाएगी। गौरतलब है कि मलोया में करीब 2445 स्मॉल फ्लैट्स खाली हैं लेकिन कालोनी नंबर चार में अभी 250 लोग ऐसे हैं, जो मकान पाने के हकदार हैं लेकिन किन्हीं कारणों से उनके आवेदन लटके हुए हैं, इसलिए हाउसिंग बोर्ड ने उनके 250 मकानों छोड़कर 2195 मकानों को किराये पर देने की तैयारी कर रहा है।
विज्ञापन
पहले चरण में मजदूरों को दिए जाएंगे पहले से खाली पड़े मकान
प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि योजना को दो हिस्सों में बांटा गया है। सबसे पहले सरकारी पैसे से बने और खाली पड़े आवासीय परिसरों को किफायती किराया आवासीय परिसर में बदला जाएगा और उन्हें 25 साल के लिए सस्ते किराए पर मजदूरों और गरीबों को दिया जाएगा। वहीं, दूसरे हिस्से में सरकारी और निजी कंपनियों को अपनी जमीन पर 25 साल के लिए किफायती किराया आवासीय परिसर बनाने के लिए कई तरह की छूट दी जाएंगी। बता दें कि 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज में इस योजना का एलान किया गया था।
मजदूर वर्ग को लाभ प्रदान करना लक्ष्य
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि इस योजना का लाभ शहर के मजदूर वर्ग को होगा। कोरोना वायरस महामारी के कारण रोजगार के बेहतर मौकों के लिए गांवों और छोटे कस्बों से शहर आने वाले प्रवासी मजदूरों और शहरी गरीबों का उल्टा पलायन हुआ है। आमतौर पर किराया बचाने के लिए ये मजदूर झुग्गी-झोपड़ियों, अनाधिकृत कालोनियों और शहर के बाहरी इलाकों में रहते हैं। इसके अलावा बेहतर मौकों की तलाश में गांवों से शहर आने वाले और मैन्युफैक्चरिंग, स्वास्थ्य, निर्माण, होटलों और व्यावसायिक संगठनों में काम करने वाले कर्मचारियों, मजदूरों और छात्रों को इस योजना से काफी लाभ मिलेगा।