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एक्टर राकेश बेदी ने शहर में बिताए दो दिन, वर्कशाप में बच्चों से हुए रूबरू

Fri, 29 Jun 2018 11:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 29 Jun 2018 11:19 PM IST
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 Actor Rakesh Bedi spent two days in Chandigarh, meeting with children in the workshop
अदाकार राकेश बेदी
मशहूर अदाकार राकेश बेदी ने काम को अपनी गर्ल फ्रेंड कहते हैं और उन्होंने सिटी में जहां एक ओर रंगमंच पर दर्शकों को एक बार फिर द लास्ट ओवर नाटक में अपनी कामेडी से गुदगुदाया, तो दिन के समय उन्होंने समर वर्कशाप में बच्चों को थियेटर का पाठ सिखाया। वे शुक्रवार को कलाग्राम में समर वर्कशाप के बच्चों की ओर से तैयार दो नुक्कड़ नाटक को देखने पहुंचे। वर्कशाप नार्थ जोन कल्चरल सेंटर, पटियाला की ओर से आयोजित की गई।
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कार्यक्रम में उनका स्वागत नार्थ जोन कल्चर सेंटर के डायरेक्टर प्रोफेसर सौभाग्य वर्धन ने किया। वे फिल्मी सिनेमा से लेकर टीवी में करीब 200 से अधिक नाटक, 175 फिल्में और 20 से अधिक टीवी शो में शानदार अदाकारी कर चुकी हैं।
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दोपहर 12 बजे कलाग्राम में वर्कशाप में मौजूद बच्चों ने जब दो नुक्कड़ नाटक  संग सामाजिक मुद्दों को रंगमंच के जरिए बयां किया तो इसकी कहानी सुनकर अभिनेता भावुक हो गए। नाटक का निर्देशन कुलबीर कौर ने किया था। वर्कशाप में शिल्प, रंगमंच, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान का लोक नृत्य सिखाया गया। इसमें गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, एमएचसी, मनीमाजरा, चंडीगढ़ सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मौलीजागरां, गवर्नमेंट सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर 32, गवर्नमेंट सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर 15 सहित अन्य स्कूल के बच्चे हिस्सा ले रहे हैं।
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कामेडी को वलगर न बनाओ 

 Actor Rakesh Bedi spent two days in Chandigarh, meeting with children in the workshop
अदाकार राकेश बेदी
उन्होंने कहा कि कामेडी की आड़ में वलगर चीजें न परोसें। बल्कि हर कलाकार को इससे बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्पीच, सोच, क्रिएटिविटी, ह्यूमर आदि पर फर्क पड़ना शुरू हो जाता है। टीवी या फिल्म में तो वही रोल मिलता है जो आपकी पर्सनेलिटी को सूट करता है। पर थिएटर में आप हर तरह का रोल कर सकते हैं। इससे एक कलाकार की कला का विकास होता है। उन्होंने कहा कि वे कामेडी को एक कला मानते हैं।

उन्होंने कहा कि कला को सीखा नहीं जा सकता यह धारणा गलत है। यदि आप सीख कर आते हैं तो आप भी कलाकार होते हैं। पर अच्छा ऐक्टर वही बन सकता है, जो डायलॉग डिलवरी अच्छे से कर सके। काम के प्रति अपने जुनून को उन्होंने बताते हुए कहा कि काम को गर्ल फ्रेंड की तरह प्यार करो। रूठे तो उसको फिर मनाओ। बस काम को जिंदगी में प्यार की तरह अपनाओ।

उन्होंने कहा कि थियेटर करने वाले कलाकारों के लिए इसे पेड होना चाहिए, क्योंकि थियेटर की मोल बिना टिकट से कम होता है। ऐसे में चंडीगढ़ में फ्री थियेटर नहीं दिखाना चाहिए। टिकट के रेट कम रख देना चाहिए लेकिन इसे पेड ही होना चाहिए।  
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