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Amar Ujala Samvad 2023: आचार्य मनीष बोले- विज्ञान और प्रमाण के साथ विश्व स्तर पर हो रहा आयुर्वेद का नाम

Mon, 07 Aug 2023 08:00 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 07 Aug 2023 08:00 PM IST
सार

आयुर्वेद दवाइयों में हैवी मेटल और स्टेरॉयड होने के आरोप लगते रहे हैं जिस पर आचार्य मनीष ने स्पष्ट किया कि आयुष बोर्ड ने इन सभी आरोपों को समाप्त कर दिया है। अब आर्युवेद के नाम पर कोई पुड़िया या चूर्ण नहीं बांट सकता, जिसकी कोई प्रमाणिकता न हो।

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Acharya Manish said The name of Ayurveda is globally With science and evidence
अमर उजाला संवाद। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया फेज एक के हयात होटल में आयोजित अमर उजाला संवाद में आचार्य मनीष ने विश्व स्तर पर आर्युवेद उद्योग के विकास पर मार्गदर्शन किया। प्राचीन काल की यह चिकित्सा पद्धति अब विज्ञान, प्रमाण और शोध परंपरा के साथ विश्व भर में नाम बना रही है। इसका प्रमाण है तेजी से विकास करता आयुर्वेद उद्योग, इलाज करने में आयुष बोर्ड द्वारा लाई पारदर्शिता और लोगों की अपने देशी इलाज के प्रति बदलती मानसिकता है।

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अमर उजाला संवाद में आचार्य मनीष ने आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं पर बात की। उन्होंने बताया कैसे घरों के नुस्खों से बढ़कर लोग आयुर्वेद को औपचारिक इलाज के रूप में देख रहे हैं। इसी का परिणाम है कि हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों ने भी अपनी नीतियों में आयुर्वेद इलाज को सम्मिलित करना शुरू कर दिया है। आम व्यक्ति अपने बीमा के पैसों से आयुर्वेदिक अस्पतालों में भी इलाज करवा सकता है।

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आयुष बोर्ड से प्रमाणित आयुर्वेद दवाइयां

आयुर्वेद दवाइयों में हैवी मेटल और स्टेरॉयड होने के आरोप लगते रहे हैं जिस पर आचार्य मनीष ने स्पष्ट किया कि आयुष बोर्ड ने इन सभी आरोपों को समाप्त कर दिया है। अब आर्युवेद के नाम पर कोई पुड़िया या चूर्ण नहीं बांट सकता, जिसकी कोई प्रमाणिकता न हो। आयुष बोर्ड से प्रमाणित होकर दवाइयां सील्ड पैकिंग के साथ दवाखानों में मिल रही हैं। इन पर उनकी एक्सपायरी डेट, बनने की तिथि आदि सभी चीजें उल्लेखित होती हैं।

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सरकार के सहयोग की जरूरत

पिछले कुछ वर्षों में आयुर्वेद को सरकार से बहुत समर्थन मिला है लेकिन इसे विश्व पहचान दिलाने के लिए और बढ़ावा देने की आवश्यकता है। आयुष्मान भारत को लागू किए नौ साल बीत गए हैं लेकिन अभी भी इसमें आयुर्वेदिक अस्पतालों को शामिल नहीं किया है। गरीब व्यक्ति आयुष्मान कार्ड योजना का लाभ आयुर्वेदिक अस्पतालों में नहीं उठा सकते। आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि सरकार इसके अनुकूल योजनाएं और नीतियां बनाएं। देश के सिर्फ तीन राज्यों में इसे लेकर नीति बनाई गई है, जहां कर्मचारियों को मिल रहे चिकित्सा लाभ में आयुर्वेद इलाज को शामिल किया है।

हर रोग का इलाज सप्ताह में एक बार उपवास 

शुगर, किडनी फेलियर, ब्लड प्रेशर न जाने कितने ही रोगों के लिए हम गोलियां खाने पर जोर देते हैं। इस पर आचार्य मनीष ने बताया कि सभी बीमारियों का हल है हफ्ते में एक बार उपवास। बीमारी की जड़ पर जाएं तो शरीर में संतुलित पाचन तंत्र और शुद्धि होना जरूरी है। दोनों के लिए उपवास सकारात्मक दिशा में काम करता है।

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