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Chandigarh News: चोरी और स्नैचिंग मामले में गवाही के अभाव में आरोपी बरी
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चंडीगढ़।
जिला अदालत ने एक महिला से पर्स छीनने और चोरी की संपत्ति रखने के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने आरोपी पर आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य की कमी और पहचान न होने पर यह फैसला सुनाया। आरोपी वरुण चौधरी उर्फ सोनू पर 21 जुलाई 2018 को सेक्टर-22 ए में स्नैचिंग मामले में यह मामला दर्ज हुआ था।
जिला अदालत में अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असमर्थ रहा। अभियोजन ने दावा किया था कि आरोपी और उसके साथी रामन जो कि नाबालिग था। उसने महिला गीता सेठी से पर्स छीन लिया था, जिसमें सात हजार रुपये, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड और मोबाइल फोन शामिल थे। इसके बाद आरोपियों के पास चोरी की गई संपत्ति भी बरामद की गई थी।
हालांकि महिला गीता सेठी ने अदालत में दिए अपने बयान में यह स्वीकार किया कि उन्होंने पुलिस को आरोपियों का शारीरिक विवरण नहीं दिया था और न ही कोई सबूत प्रस्तुत किया था कि पर्स और मोबाइल फोन उनके थे। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस द्वारा आरोपियों के पहचान से पहले उनका सामना कराया गया था जिससे पहचान पर सवाल खड़ा हो गया। साथ ही अभियोजन पक्ष ने किसी स्वतंत्र गवाह को भी मामले में शामिल नहीं किया, जिससे इस मामले की विश्वसनीयता पर असर पड़ा, जिसके परिणाम स्वरूप अदालत ने आरोपी को बर कर दिया।
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जिला अदालत ने एक महिला से पर्स छीनने और चोरी की संपत्ति रखने के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने आरोपी पर आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य की कमी और पहचान न होने पर यह फैसला सुनाया। आरोपी वरुण चौधरी उर्फ सोनू पर 21 जुलाई 2018 को सेक्टर-22 ए में स्नैचिंग मामले में यह मामला दर्ज हुआ था।
जिला अदालत में अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असमर्थ रहा। अभियोजन ने दावा किया था कि आरोपी और उसके साथी रामन जो कि नाबालिग था। उसने महिला गीता सेठी से पर्स छीन लिया था, जिसमें सात हजार रुपये, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड और मोबाइल फोन शामिल थे। इसके बाद आरोपियों के पास चोरी की गई संपत्ति भी बरामद की गई थी।
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हालांकि महिला गीता सेठी ने अदालत में दिए अपने बयान में यह स्वीकार किया कि उन्होंने पुलिस को आरोपियों का शारीरिक विवरण नहीं दिया था और न ही कोई सबूत प्रस्तुत किया था कि पर्स और मोबाइल फोन उनके थे। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस द्वारा आरोपियों के पहचान से पहले उनका सामना कराया गया था जिससे पहचान पर सवाल खड़ा हो गया। साथ ही अभियोजन पक्ष ने किसी स्वतंत्र गवाह को भी मामले में शामिल नहीं किया, जिससे इस मामले की विश्वसनीयता पर असर पड़ा, जिसके परिणाम स्वरूप अदालत ने आरोपी को बर कर दिया।
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