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शर्मिला की मौत: हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
सुमेश ठाकुर/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 21 Mar 2014 12:47 AM IST
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बीते साल चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग(सीटीयू) की बस के नीचे आने से हुई शर्मिला की मौत के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक आदेश सुनाया है।
सड़क हादसे में शर्मिला की मौत के बाद उसके दो मासूम बच्चे अनाथ हो गए थे। चूंकि शर्मिला के पति की पहले ही पंचकूला में सड़क हादसे में जान चली गई थी।
हाईकोर्ट ने बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेवारी उनकी नानी सरोज देवी को दी है और हर महीने 14 हजार 200 रुपये मासूमों को राहत राशि जारी करने के भी निर्देश जारी किए हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल पर आधारित खंडपीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित बनाया जाए कि हर महीने सात तारीख को यह पैसा बच्चों को मिल जाए।
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मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक बच्चे 21 वर्ष के नहीं हो जाते तब तक उन्हें आर्थिक मदद के रूप में 14200 रुपए प्रतिमाह की अदायगी की जाए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जो आर्थिक मदद दी जा रही है इसका कोई गलत इस्तेमाल न हो इसको भी सुनिश्चित किया जाए।
इसको सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने वकील ओंकार सिंह बटलवी को जिम्मेवारी सौंपी है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पैसे का गलत इस्तेमाल होता है, तो वे इसके बारे में कोर्ट को सूचित करें।
मई 2013 में एक सड़क हादसा हुआ था जिसमें सीटीयू बस की चपेट में आने के बाद शर्मिला को सही समय पर अस्पताल न पहुंचाने का पुलिस पर आरोप लगा था।
इस बारे में बताया गया था कि घटना स्थल से सेक्टर 16 हॉस्पीटल की दूरी मात्र 100 मीटर की थी फिर भी पुलिस ने इस मामले में गंभीरता नहीं बरती। गौरतलब है कि पंचकूला में शर्मिला के पति की अक्तूबर 2012 में मौत हो गई थी। हाईकोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया है।
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सड़क हादसे में शर्मिला की मौत के बाद उसके दो मासूम बच्चे अनाथ हो गए थे। चूंकि शर्मिला के पति की पहले ही पंचकूला में सड़क हादसे में जान चली गई थी।
हाईकोर्ट ने बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेवारी उनकी नानी सरोज देवी को दी है और हर महीने 14 हजार 200 रुपये मासूमों को राहत राशि जारी करने के भी निर्देश जारी किए हैं।
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मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल पर आधारित खंडपीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित बनाया जाए कि हर महीने सात तारीख को यह पैसा बच्चों को मिल जाए।
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मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक बच्चे 21 वर्ष के नहीं हो जाते तब तक उन्हें आर्थिक मदद के रूप में 14200 रुपए प्रतिमाह की अदायगी की जाए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जो आर्थिक मदद दी जा रही है इसका कोई गलत इस्तेमाल न हो इसको भी सुनिश्चित किया जाए।
इसको सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने वकील ओंकार सिंह बटलवी को जिम्मेवारी सौंपी है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पैसे का गलत इस्तेमाल होता है, तो वे इसके बारे में कोर्ट को सूचित करें।
मई 2013 में एक सड़क हादसा हुआ था जिसमें सीटीयू बस की चपेट में आने के बाद शर्मिला को सही समय पर अस्पताल न पहुंचाने का पुलिस पर आरोप लगा था।
इस बारे में बताया गया था कि घटना स्थल से सेक्टर 16 हॉस्पीटल की दूरी मात्र 100 मीटर की थी फिर भी पुलिस ने इस मामले में गंभीरता नहीं बरती। गौरतलब है कि पंचकूला में शर्मिला के पति की अक्तूबर 2012 में मौत हो गई थी। हाईकोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया है।