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भारत के लिए कनाडावासियों का प्रेम देख, भारत आने को मजबूर हुई ये कथक नृत्यांगना
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 06 Aug 2016 11:18 PM IST
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Kathak Dancer Arushi
- फोटो : amar ujala
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भारत के लोक गीत, लोक नृत्य मुझे हमेशा इसके साथ जुड़े रहने के लिए प्रेरित करते हैं। आरुषि निशंक ने शनिवार को टैगोर थिएटर में कथक पर प्रस्तुति दी। जहां उन्होंने अमीर खुसरो की कविताओं और नुसरत फतेह अली खान के गीतों को जोड़कर सूफी कंपोजिशन तैयार कर कथक पेश किया।
इसमें उन्होंने अल्लाह हू, मोरे सईंया तो हैं परदेस गीतों पर प्रस्तुति दी। एक घंटे के इस कार्यक्रम में आरुषि के साथ आरती शाह, भूमिका रावत ने कथक पेश किया। उनका साथ कालीनाथ मिश्रा(तबला), नवीन मिश्रा (सितार) और धर्मेंद्र मिश्रा (हारमोनियम ) पर दिया।
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इसमें उन्होंने अल्लाह हू, मोरे सईंया तो हैं परदेस गीतों पर प्रस्तुति दी। एक घंटे के इस कार्यक्रम में आरुषि के साथ आरती शाह, भूमिका रावत ने कथक पेश किया। उनका साथ कालीनाथ मिश्रा(तबला), नवीन मिश्रा (सितार) और धर्मेंद्र मिश्रा (हारमोनियम ) पर दिया।
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