कमलनाथ के सीएम बनाए जाने पर घमासान, कांग्रेस और आप नेताओं ने किया विरोध...जानें क्या है मामला
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आम आदमी पार्टी ने कहा है कि सिखों को इंसाफ देने के बजाय पार्टी उनके जख्मों पर नमक छिड़क रही है। 1984 के सिख कत्लेआम के आरोपी कमल नाथ को मध्य प्रदेश के सीएम पद से नवाजने की तैयारी की जा रही है। नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा ने कहा कि कमल नाथ सिख कत्लेआम में शामिल थे। नानावटी आयोग और दो न्यायिक जांच में उनकी भागीदारी सबूतों सहित सामने आई है। लेकिन न तो कांग्रेस और न ही एनडीए ने कमल नाथ पर कार्रवाई की हिम्मत दिखाई।
उल्टा, सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर की जगह उन्हें बड़े ओहदे देकर इंसाफ पसंद लोगों का मुंह चिढ़ाया जा रहा है। चीमा ने कहा कि नानावटी कमीशन की रिपोर्ट में दर्ज है कि एक नवंबर 1984 को कमलनाथ उन चार हजार लोगों की भीड़ की अगुवाई कर रहे थे, जिन्होंने गुरुद्वारा रकाबगंज पर हमला किया था। कमीशन ने अपनी आखिरी रिपोर्ट में कमलनाथ को क्लीन चिट नहीं दी थी।
पत्रकार संजय सूरी ने कमलनाथ के सिख विरोधी दंगों में शामिल होने संबंधी बयान नानावटी और मिश्रा आयोग को दिए थे। गवाह और पीड़ित मुख्तियार सिंह ने भी यही आरोप लगाए थे। दो नवंबर को एक अखबार में भी कमलनाथ की मौके पर दो घंटे मौजूदगी की बात लिखी गई थी। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मांग की कि कमलनाथ को सीएम न बनाया जाए।
अपना स्टैंड साफ करें कैप्टन: खैरा
बागी विधायक सुखपाल खैरा ने कहा है कि 1984 के कत्लेआम के आरोपी कमलनाथ को एमपी का सीएम बनाए जाने पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह अपना स्टैंड स्पष्ट करें। गुरुद्वारा रकाबगंज के बाहर कमलनाथ की मौजूदगी की पुष्टि पत्रकार संजय सूरी, कमिश्नर सुभाष टंडन, एडिशनल कमिश्नर गौतमल कौल ने की थी।
नानावटी आयोग ने कमलनाथ की दलीलों को नकारा था। उनके खिलाफ काफी सबूत थे, पर कांग्रेस ने बचाया, भाजपा ने भी कुछ नहीं किया। खैरा ने कहा कि क्या कनाडा के सिख सियासतदानों के खिलाफ बोलने वाले कैप्टन इस मुद्दे पर बोलने का साहस दिखाएंगे। क्योंकि कैप्टन के पास कनाडा के मंत्री हरजीत सज्जन के खिलाफ जितने सबूत हैं, उससे ज्यादा कमलनाथ के खिलाफ हैं।
डीएसजीएमसी ने किया विरोध
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने कमल नाथ को एमपी का सीएम बनाने का कड़ा विरोध किया है। कमेटी के महासचिव और शिअद प्रवक्ता मनजिंदर सिरसा ने चेतावनी दी है कि अगर कांग्रेस ने इस प्रस्ताव पर अमल किया तो सिख बड़े पैमाने पर विरोध करेंगे। कमलनाथ सिख कत्लेआम के आरोपी हैं। उन्होंने गुरुद्वारा रकाबगंज के बाहर सिखों को मारने के लिए भीड़ को भड़काया था।
कमलनाथ ने दो आयोगों को बयान दिया था कि वह गुरुद्वारा रकाबगंज में मौजूद थे, जहां दो सिखों को मारा गया था। कमेटी ने कमलनाथ पर एफआईआर दर्ज करने को गृहमंत्री को पत्र भी लिखा था। कमलनाथ को सीएम बनने से रोकने के कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जीत के बाद कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चाओं के बीच पंजाब के कांग्रेसियों ने विरोध शुरू कर दिया है। लुधियाना से पंजाब कांग्रेस सचिव मनिंदर गुलियानी ने राहुल गांधी को ईमेल और ट्वीट कर कमलनाथ को मुख्यमंत्री नहीं बनाने की अपील की है। उनका मानना है कि अगर कमलनाथ सीएम बनते है, तो इस देश में रहने वाले हर सिख की भावनाएं आहत होंगी।
इसका नुकसान कांग्रेस पार्टी को लोकसभा चुनाव में हो सकता है। कांग्रेस सचिव मनिंदर सिंह के अनुसार दिल्ली में 1984 में हुए सिख दंगों में कमल नाथ का नाम भी सामने आया था। 1984 से लेकर साल 2004 तक सिखों ने कांग्रेस से किनारा कर लिया था। मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बनने पर बड़ी संख्या में सिख दोबारा पार्टी के साथ जुड़े है। कमलनाथ को दोबारा मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाकर दोबारा सिखों के जख्मों को कुरेदने जैसी बात होगी।
वहीं अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है । एसजीपीसी के अतरिक्त सचिव बाबा दलजीत सिंह बेदी ने कहा की कमल नाथ पर वरह 1984 के दिल्ली दंगो के आरोपियों के साथ दिया था । 34 वर्ष से अधिक समय बीत गया लेकिन अभी तक सिखों को न्याय नहीं मिला है ।कमल नाथ का नाम दिल्ली दंगो में शामिल था। कमलनाथ को मुख्यमंत्री बना कर अवार्ड देना सिखों के जख्म को कुरेदने जैसा है ।