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Chandigarh News: इंजीनियरिंग की मिसाल में खामियों का जाल... कहीं सड़क ऊंची, कहीं रास्ते धंसे
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ की पहचान दुनिया के बेहतरीन सुनियोजित शहरों में होती है। ली काबूर्जिए ने इसे इस तरह डिजाइन किया था कि सड़क, फुटपाथ, साइकिल ट्रैक और हरियाली तक में इंजीनियरिंग की मिसाल दिखे। लेकिन इंजीनियर्स डे पर शहर की मौजूदा तस्वीर सवाल खड़े कर रही है। कहीं सड़क इतनी ऊंची हो गई कि बस स्टॉप नीचे छूट गया, कहीं सड़क घरों के दरवाजों तक पहुंच गई और कहीं सीवर टूटने से रास्ता ही बंद करना पड़ा। स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज, सीवर, पानी की सप्लाई और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं की खामियां अब लोगों को राहत से ज्यादा परेशानी और हादसों का खतरा दे रही हैं। जिस शहर की इंजीनियरिंग की मिसाल दुनिया देती थी, वहां अब लोग पूछ रहे हैं- आखिर यह काैन सी इंजीनियरिंग है, जिसमें सुविधा के नाम पर लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं?
रीकारपेटिंग के बाद सड़क ऊंची, बस स्टॉप नीचे
सेक्टर-19 और 20 की डिवाइडिंग रोड पर रीकारपेटिंग की परतें चढ़ते-चढ़ते सड़क की ऊंचाई इतनी बढ़ गई कि बस स्टॉप नीचे नजर आने लगा। बारिश के दौरान सड़क का पानी बस स्टॉप की तरफ पहुंचने से यात्रियों को परेशानी होती है। सेक्टर-37 और 38 की डिवाइडिंग रोड पर भी कई जगह डिवाइडर सड़क की नई लेयर के लगभग बराबर हो गए हैं। कई इलाकों में सड़क की ऊंचाई घरों के प्रवेश द्वार से ऊपर पहुंचने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इससे बारिश का पानी घरों की ओर जाने का खतरा बढ़ गया है।
245 किलोमीटर साइकिल ट्रैक, जगह-जगह खतरा
शहर में करीब 245 किलोमीटर साइकिल ट्रैक बनाए गए हैं। इन पर करीब 35 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद कई हिस्सों में ट्रैक की सतह खराब और असमतल है। कहीं अचानक गड्ढे उभर आते हैं तो कहीं ट्रैक बीच में ही खत्म हो जाता है। सीवर, बिजली और ड्रेनेज के मैनहोल कवर कई जगह ट्रैक के बीच में या गलत लेवल पर हैं। तेज रफ्तार साइकिल सवार के सामने अचानक आया ऊंचा-नीचा कवर गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।
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सीवर टूटा तो दो महीने तक सड़क बंद
हर का भूमिगत सीवर नेटवर्क भी सवालों के घेरे में है। सेक्टर-47 और 48 के बीच टूटी सीवर लाइन को लंबे समय तक ठीक नहीं किए जाने से सड़क का एक हिस्सा करीब दो महीने तक बंद रखना पड़ा। एक अन्य घटना में सीवर लाइन टूटने से बने गड्ढे में मोटरसाइकिल सवार गिर गया था, जिसे फायर ब्रिगेड की टीम ने बाहर निकाला। ऐसी ही घटना सेक्टर-28 में भी सामने आई, जहां सड़क धंस गई।
बारिश में ड्रेनेज की खुलती पोल
सड़कों, गलियों और नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से कई जगह बारिश का पानी सड़क पर ही जमा रहता है। स्टॉर्म वाटर लाइन में टूट-फूट और ड्रेनेज व्यवस्था की खामियां भी बारिश के दौरान सामने आती हैं। भारी बारिश में सेक्टर-26 और 28 को जोड़ने वाली मुख्य सड़क का हिस्सा धंसने की घटना ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए।
स्ट्रीट लाइट जलती है, फिर भी सड़क पर अंधेरा
शहर की कई सड़कों पर एलईडी स्ट्रीट लाइट होने के बावजूद पर्याप्त रोशनी नहीं मिलती। कई जगह पेड़ों की शाखाएं रोशनी को ढक देती हैं और सड़क पर अंधेरा बना रहता है। प्रमुख चौराहों पर 80 से अधिक जगहों पर जेब्रा क्रॉसिंग गायब या धुंधली होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सवाल सिर्फ इंजीनियरिंग की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि रखरखाव और सड़क सुरक्षा की प्राथमिकता का भी है।
कुछ काम राहत वाले भी... सड़कों से लेकर फ्लाईओवर और अंडरपास तक की तैयारी
शहर की इंजीनियरिंग व्यवस्था पर सवालों के बीच कुछ काम राहत देने वाले भी हैं। इस साल सड़कों और पार्किंग की री-कारपेटिंग व पैचवर्क पर प्रशासन का इंजीनियरिंग विभाग अब तक 60 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। निगम के पास फंड की कमी के चलते सभी 75 वी-3 सड़कें सितंबर 2025 में प्रशासन को ट्रांसफर की गई थीं। बारिश के कारण रुका काम फिर शुरू हो गया है। खराब सड़कों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। ट्रिब्यून चौक पर 2.3 किलोमीटर फ्लाईओवर और खुड्डा लाहौरा से सारंगपुर तक 1.3 किलोमीटर एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना भी है। इसके अलावा पीयू-पीजीआई पैदल अंडरपास और पीयू-सेक्टर-25 दो लेन अंडरपास पर 20 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे।
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रीकारपेटिंग के बाद सड़क ऊंची, बस स्टॉप नीचे
सेक्टर-19 और 20 की डिवाइडिंग रोड पर रीकारपेटिंग की परतें चढ़ते-चढ़ते सड़क की ऊंचाई इतनी बढ़ गई कि बस स्टॉप नीचे नजर आने लगा। बारिश के दौरान सड़क का पानी बस स्टॉप की तरफ पहुंचने से यात्रियों को परेशानी होती है। सेक्टर-37 और 38 की डिवाइडिंग रोड पर भी कई जगह डिवाइडर सड़क की नई लेयर के लगभग बराबर हो गए हैं। कई इलाकों में सड़क की ऊंचाई घरों के प्रवेश द्वार से ऊपर पहुंचने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इससे बारिश का पानी घरों की ओर जाने का खतरा बढ़ गया है।
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245 किलोमीटर साइकिल ट्रैक, जगह-जगह खतरा
शहर में करीब 245 किलोमीटर साइकिल ट्रैक बनाए गए हैं। इन पर करीब 35 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद कई हिस्सों में ट्रैक की सतह खराब और असमतल है। कहीं अचानक गड्ढे उभर आते हैं तो कहीं ट्रैक बीच में ही खत्म हो जाता है। सीवर, बिजली और ड्रेनेज के मैनहोल कवर कई जगह ट्रैक के बीच में या गलत लेवल पर हैं। तेज रफ्तार साइकिल सवार के सामने अचानक आया ऊंचा-नीचा कवर गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।
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सीवर टूटा तो दो महीने तक सड़क बंद
हर का भूमिगत सीवर नेटवर्क भी सवालों के घेरे में है। सेक्टर-47 और 48 के बीच टूटी सीवर लाइन को लंबे समय तक ठीक नहीं किए जाने से सड़क का एक हिस्सा करीब दो महीने तक बंद रखना पड़ा। एक अन्य घटना में सीवर लाइन टूटने से बने गड्ढे में मोटरसाइकिल सवार गिर गया था, जिसे फायर ब्रिगेड की टीम ने बाहर निकाला। ऐसी ही घटना सेक्टर-28 में भी सामने आई, जहां सड़क धंस गई।
बारिश में ड्रेनेज की खुलती पोल
सड़कों, गलियों और नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से कई जगह बारिश का पानी सड़क पर ही जमा रहता है। स्टॉर्म वाटर लाइन में टूट-फूट और ड्रेनेज व्यवस्था की खामियां भी बारिश के दौरान सामने आती हैं। भारी बारिश में सेक्टर-26 और 28 को जोड़ने वाली मुख्य सड़क का हिस्सा धंसने की घटना ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए।
स्ट्रीट लाइट जलती है, फिर भी सड़क पर अंधेरा
शहर की कई सड़कों पर एलईडी स्ट्रीट लाइट होने के बावजूद पर्याप्त रोशनी नहीं मिलती। कई जगह पेड़ों की शाखाएं रोशनी को ढक देती हैं और सड़क पर अंधेरा बना रहता है। प्रमुख चौराहों पर 80 से अधिक जगहों पर जेब्रा क्रॉसिंग गायब या धुंधली होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सवाल सिर्फ इंजीनियरिंग की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि रखरखाव और सड़क सुरक्षा की प्राथमिकता का भी है।
कुछ काम राहत वाले भी... सड़कों से लेकर फ्लाईओवर और अंडरपास तक की तैयारी
शहर की इंजीनियरिंग व्यवस्था पर सवालों के बीच कुछ काम राहत देने वाले भी हैं। इस साल सड़कों और पार्किंग की री-कारपेटिंग व पैचवर्क पर प्रशासन का इंजीनियरिंग विभाग अब तक 60 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। निगम के पास फंड की कमी के चलते सभी 75 वी-3 सड़कें सितंबर 2025 में प्रशासन को ट्रांसफर की गई थीं। बारिश के कारण रुका काम फिर शुरू हो गया है। खराब सड़कों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। ट्रिब्यून चौक पर 2.3 किलोमीटर फ्लाईओवर और खुड्डा लाहौरा से सारंगपुर तक 1.3 किलोमीटर एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना भी है। इसके अलावा पीयू-पीजीआई पैदल अंडरपास और पीयू-सेक्टर-25 दो लेन अंडरपास पर 20 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे।