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वर्ल्ड कप के बाद बढ़ी काफी हिम्मत, अब पेरिस ओलंपिक में पदक झटकना लक्ष्य

Mon, 12 Sep 2022 02:27 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 12 Sep 2022 02:27 AM IST
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A lot of courage increased after the World Cup, now the goal is to get a medal in Paris Olympics
चंडीगढ़। वर्ल्ड नंबर-1 का मुकाम हासिल करने वाली निशानेबाज अंजुम मोदगिल का कहना है कि हाल ही में हुए वर्ल्ड कप में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद काफी हिम्मत बढ़ी है। इसका असर आगे भी देखने को मिलेगा। अब अगला टारगेट पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लेते हुए देश के लिए पदक जीतना है। रविवार को एक होटल में रखे उनके सम्मान के दौरान विशेष बातचीत में अंजुम मोदगिल ने कही। इस दौरान उन्हें सम्मानित किया गया। बातचीत के दौरान शहर की रहने वाले और पंजाब की ओर से खेलने वाली निशानेबाज अंजुम ने कहा कि वर्ल्ड नंबर-1 बनने का सोचा नहीं था, बस दिमाग में बेहतर प्रदर्शन करना ही छाया हुआ था। वर्ल्ड कप में पदक मिला और इसके साथ नंबर- 1 शूटर का खिताब भी हासिल हुआ। यह मेरे लिए किसी बोनस से कम नहीं रहा।
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वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा
इजिप्ट में अगले महीने से शुरू होने जा रही चैंपियनशिप के थ्री पोजिशन और प्रोन इवेंट में अंजुम भारतीय चुनौती पेश करेंगी। 15 अक्तूबर को वह भारतीय निशानेबाजी दल के साथ वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए रवाना हो जाएंगी। इसके लिए अगले कुछ दिनों में तैयारियों में जुट जाना चाहती हूं। जब उनसे पूछा गया कि शूटिंग में वर्ल्ड नंवर-1 बनने पर भी आपको काफी कम लोग क्यों जानते हैं ? इस पर उनका कहना था कि यह अलग तरह का खेल है। व्यक्तिगत इवेंट है जिसकी फैन फोलोइंग नहीं है, देखने वाले समझ नहीं पाते हैं लेकिन मेरे लिए यह गर्व की बात है मैं देश के लिए खेल रही हूं। इस खेल के अधिक से अधिक इवेंट देशभर में होने चाहिए जिससे लोग इस खेल का और अधिक तरह जाने।
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काफी कुछ बदला हैं
जब उनसे पूछा गया कि वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद क्या बदला है? तो उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि वर्ष 2018 में वर्ल्ड कप के बाद काफी कुछ बदला गया है। ओलंपिक कोटा जीतने के बाद अलग सफर शुरू हो गया है। हमें भी अहसास और मन में विश्वास कायम हुआ कि वर्ल्ड लेवल पर मेडल जीत सकते हैं।
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जूनियर की मदद करना - वर्ल्ड नंबर- 1 बनने का यह मतलब नहीं कि आप बस अपने आप को देखो। हां... यह मेरे लिए प्रेरणादायक है। एक एथलीट होने के नाते कोई ज्यादा फर्क नहीं है। जो जूनियर हमें देखते हैं मैं महसूस करती हूं कि एक सीनियर की तरह उनकी मदद करूं। मुझे अतिरिक्त जिम्मेवारी और विश्वास का अहसास है।
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