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Chandigarh News: पीड़ित पक्ष की मूर्खता को आधार बनाकर ठग नहीं मांग सकता जमानत
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विदेश भेजने के नाम पर ठगी के आरोपी को जमानत से हाईकोर्ट ने किया इन्कार
कहा-ठगों को सख्ती से रोकना जरूरी, ऐसा नहीं किया तो यह बुरा इतिहास बना देंगे
चंडीगढ़। विदेश भेजने के नाम पर ठगी के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी की नियमित जमानत याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पीड़ित पक्ष की मूर्खता को आधार बनाकर ठग जमानत की मांग नहीं कर सकते। ठगों को सख्ती से रोकना जरूरी है और यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह बुरा इतिहास बना देंगे।
याचिका दाखिल करते हुए विजेंद्र ने हाईकोर्ट को बताया कि विदेश भेजने के नाम पर ठगी के आरोप में नौ दिसंबर 2023 को करनाल में एफआईआर दर्ज की गई थी। याची पर आरोप है कि उसने पीड़ित से 5 लाख रुपये कैश में लिए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार उसने अपने बेटे को कनाडा भेजने के नाम पर कुल 33.75 लाख रुपये का भुगतान किया था। इसके बावजूद बच्चों को न तो विदेश भेजा गया और न ही पैसा लौटाया गया। याची ने कहा कि न तो उसने कोई पैसे लिए हैं और न ही वह शिकायतकर्ता को जानता है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस मामले में पीड़ित पक्ष को पता था कि वह गैर कानूनी तरीके से अपने बेटे को विदेश भेजने के लिए भुगतान कर रहा है। हालांकि इस आधार पर याची का गुनाह कम नहीं हो जाता है। पीड़ित पक्ष की मूर्खता के आधार पर ठग को जमानत नहीं दी जा सकती है। ठगी के मामलों में बड़ी तेजी से वृद्धि हो रही है और यदि आज इसे सख्ती से नहीं रोका गया तो यह एक बुरा इतिहास बन जाएगा। ऐसे में हाईकोर्ट ने इस मामले में आरोपी को जमानत से इन्कार करते हुए याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
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कहा-ठगों को सख्ती से रोकना जरूरी, ऐसा नहीं किया तो यह बुरा इतिहास बना देंगे
चंडीगढ़। विदेश भेजने के नाम पर ठगी के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी की नियमित जमानत याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पीड़ित पक्ष की मूर्खता को आधार बनाकर ठग जमानत की मांग नहीं कर सकते। ठगों को सख्ती से रोकना जरूरी है और यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह बुरा इतिहास बना देंगे।
याचिका दाखिल करते हुए विजेंद्र ने हाईकोर्ट को बताया कि विदेश भेजने के नाम पर ठगी के आरोप में नौ दिसंबर 2023 को करनाल में एफआईआर दर्ज की गई थी। याची पर आरोप है कि उसने पीड़ित से 5 लाख रुपये कैश में लिए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार उसने अपने बेटे को कनाडा भेजने के नाम पर कुल 33.75 लाख रुपये का भुगतान किया था। इसके बावजूद बच्चों को न तो विदेश भेजा गया और न ही पैसा लौटाया गया। याची ने कहा कि न तो उसने कोई पैसे लिए हैं और न ही वह शिकायतकर्ता को जानता है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस मामले में पीड़ित पक्ष को पता था कि वह गैर कानूनी तरीके से अपने बेटे को विदेश भेजने के लिए भुगतान कर रहा है। हालांकि इस आधार पर याची का गुनाह कम नहीं हो जाता है। पीड़ित पक्ष की मूर्खता के आधार पर ठग को जमानत नहीं दी जा सकती है। ठगी के मामलों में बड़ी तेजी से वृद्धि हो रही है और यदि आज इसे सख्ती से नहीं रोका गया तो यह एक बुरा इतिहास बन जाएगा। ऐसे में हाईकोर्ट ने इस मामले में आरोपी को जमानत से इन्कार करते हुए याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
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