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Chandigarh News: जन्मजात हृदयरोग से अब भी 1000 में से 86 बच्चों की हो रही मौत

Sat, 26 Aug 2023 01:14 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 26 Aug 2023 01:14 AM IST
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86 out of 1000 children still die due to congenital heart disease
चंडीगढ़। देश में अब भी एक हजार में से 86 बच्चे जन्मजात हृदयरोग के कारण अपना पहला जन्मदिन मनाने से पहले मौत के मुंह में जा रहे हैं। यह स्थिति बेहद गंभीर है। उत्तर भारत में पीजीआई ही ऐसा संस्थान है, जहां ऐसे बच्चों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मरीजों की संख्या के अनुपात में इसके लिए चंद बेड के बजाय अलग एडवांस पीडियाट्रिक कार्डियक सेंटर होना जरूरी है। ये बातें सोसायटी ऑफ पीडियाट्रिक कार्डियक क्रिटिकल केयर के महासचिव व पीजीआई एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के प्रो. अरुण बरनवाल ने शुक्रवार को कहीं। वे पीजीआई में पीडियाट्रिक कार्डियक क्रिटिकल केयर पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पहले दिन बतौर मुख्य वक्ता मौजूद थे। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधन के बीच बेहतर परिणाम देने के लिए नर्सिंग अफसरों का प्रशिक्षित होना बेहद जरूरी है इसलिए सोसाइटी ने पहली बार इस सम्मेलन में नर्सिंग अफसरों के लिए प्रशिक्षण सत्र रखा है। पहले दिन आयोजित कार्यक्रम में देश के अलग-अलग प्रदेशों की 110 नर्सिंग अफसरों ने भाग लिया। उन्हें जन्मजात हृदयरोग से ग्रस्त बच्चे के सर्जरी के बाद आईसीयू में उसकी देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। इस अवसर पर बतौर प्रशिक्षक मौजूद देहरादून के डॉ. मंजू केदारनाथ और चेन्नई के डॉ. मुथैया ने बताया कि नर्सिंग अफसरों को पढ़ाई के दौरान सभी चीजें सिखाई जाती हैं लेकिन उन्हें यह पता नहीं होता कि उसका उपयोग कैसे और कब करना है इसलिए उनके लिए ऐसे विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम होने चाहिए। कार्यक्रम में उन्हें इमरजेंसी में डॉक्टर को तत्काल सूचना देने के साथ उनके आने तक स्थिति पर काबू के उपाय बताए गए।
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महत्वपूर्ण तथ्य आप भी जान लें
- पीजीआई एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में 2022-23 में 246 बच्चों को हृदय संबंधी मर्ज की शिकायत पर भर्ती किया गया। इनमें से 73 बच्चों की सर्जरी हो चुकी है।
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- जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत पीजीआई में ऐसे मर्ज से ग्रस्त बच्चों का इलाज पूरी तरह से निशुल्क किया जा रहा है जबकि सामान्य तौर पर इसके इलाज में 3 लाख रुपये का खर्च आता है।
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- देश में प्रति वर्ष लगभग ढाई लाख बच्चे इस मर्ज के साथ ले रहे जन्म, जबकि महज 26 से 27 हजार की सर्जरी हो पा रही।
- 1990 में भारत में बच्चों की मृत्यु का यह आठवां प्रमुख कारण था जो 2017 में सातवें स्थान पर आ गया है।
- केरल में चलाए जा रहे हैं हृदयम योजना के तहत जन्म के समय ही बच्चों की डायग्नोसिस और सर्जरी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
- केरल में 2009 से 2017 तक हृदय रोग से मरने वालों बच्चों का प्रतिशत 10 से 12 के बीच में था जो इस योजना के बाद 6 प्रतिशत पर आ गया है।
ऐसे घटा शिशु मृत्यु दर (देश में प्रति एक हजार जन्म पर)
1992 86 प्रतिशत
2005 65 प्रतिशत
2015 34 प्रतिशत
2022 28 प्रतिशत
यहां स्थिति अब भी गंभीर (2017 की रिपोर्ट)
राज्य शिशु मृत्यु दर
हरियाणा 30 प्रतिशत
पंजाब 19 प्रतिशत
दिल्ली 11 प्रतिशत
जम्मू कश्मीर 20 प्रतिशत
हिमाचल प्रदेश 17 प्रतिशत

पीजीआई ने देश में पहली बार बाल चिकित्सा हृदय संबंधी गंभीर देखभाल के लिए एक नर्सिंग कार्यशाला का आयोजन किया। यह प्रयास काबिले तारीफ है। कार्यक्रम में पंजाब, कोलकाता, जयपुर, महाराष्ट्र समेत देश के अन्य कोनों से 110 नर्स शामिल हुई हैं। -डॉ. जेसल शेठ, बालरोग विशेषज्ञ मुंबई
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