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सिटी ब्यूटीफुल के 85 प्रतिशत सरकारी भवन दिव्यांगों के अनुकूल नहीं

Fri, 30 Sep 2022 02:12 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 30 Sep 2022 02:12 AM IST
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85% government buildings of City Beautiful are not handicapped friendly
चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल के 85 प्रतिशत सरकारी भवन दिव्यांगजनों के अनुकूल नहीं हैं। यह बात दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों के एक समूह ने वीरवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में कही। स्कूल के क्लब होप हैप्पीनेस ऑफर टू पीपल एवरीवेयर के विद्यार्थियों ने चंडीगढ़ में दिव्यांग अनुकूल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर एक सर्वेक्षण किया। इस दौरान विद्यार्थी शहर के 80 स्थानों पर गए और वहां दिव्यांगों की सुविधा के लिए बनाए गए इन्फ्रास्ट्रक्चर को देखा। इनमें सार्वजनिक स्थान, शौचालय, रेस्तरां, बैंक और सरकारी भवन शामिल थे। विद्यार्थियों ने शोध में पाया कि 85 प्रतिशत सरकारी भवन दिव्यांग अनुकूल नहीं बनाए गए हैं।
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प्रेसवार्ता करते हुए कक्षा 11 और 12 के युवा शोधार्थियों अन्वेषा मोंगिया, इदान्त दीक्षित, मानवी लोंगिया और मुस्कान धरवाल ने बताया कि 85 प्रतिशत सरकारी कार्यालयों के प्रवेश द्वार पर व्हीलचेयर रैंप नहीं हैं। इसके साथ ही भवनों में विकलांगों के अनुकूल शौचालय भी नहीं बनाए गए हैं। सर्वेक्षण में शहर के जाने माने रेस्टोरेंट्स में भी कमियां पाईं गईं। 50 रेस्टोरेंट्स के सर्वे में विद्यार्थियों ने पाया कि 37 में महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय तो हैं लेकिन दिव्यांगों के लिए अलग शौचालय का कोई प्रबंध नहीं है। केवल दो में ही एएसएल (अमेरिकी सांकेतिक भाषा)/आईएसएल (भारतीय सांकेतिक भाषा) के प्रशिक्षित कर्मचारी मिले। वहीं बाजारों में सर्वेक्षण में पाया कि केवल 30 प्रतिशत में विकलांगों के अनुकूल शौचालय मौजूद हैं और केवल 20 प्रतिशत में ही सुविधाजनक रैंप की व्यवस्था है।
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सुखना लेक और रॉक गार्डन तक में नहीं रैंप
शहर के प्रमुख पर्यटन केंद्रों सुखना लेक और रॉक गार्डन के सर्वेक्षण में पाया गया कि दोनों ही जगह शौचालयों में व्हीलचेयर रैंप नहीं हैं और शौचालय भी दिव्यांगों के अनुकूल नहीं बनाए गए हैं। इसके कारण दोनों ही जगह घूमने आने वाले दिव्यांग पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्कूल विद्यार्थियों ने ऑनलाइन याचिका के माध्यम से इस मामले को उठाया है, जहां उन्हें अच्छा रिस्पांस मिल रहा है।
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इदान्त ने कहा कि चंडीगढ़ भारत का पहला अर्बन प्लान्ड सिटी होने के बावजूद दिव्यांगों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध करवाने में विफल रहा है। मुस्कान ने कहा कि इमारतों और सार्वजनिक स्थानों के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड कर दिव्यांगों के अनुकूल बनाया जाना चाहिए। स्कूल के विद्यार्थी अब एक एप बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे जल्द ही लांच किया जाएगा। यह एप न केवल ट्राइसिटी में बल्कि पूरे देश में दिव्यांगों के अनुकूल शौचालयों का पता लगाने में दिव्यांगों की मदद करेगा।
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