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इंसाफ का इंतजार: जिन बच्चों को पौधे की तरह सींचा, उन्होंने किया बेदखल... एडीसी कोर्ट में 82 शिकायतें पेंडिंग
Wed, 13 Aug 2025 11:39 AM IST
निवेदिता वर्मा
विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़
विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 13 Aug 2025 11:39 AM IST
सार
एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (एडीसी) के सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल में आज की तारीख में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े ऐसे 82 केस पेंडिंग पड़े हैं, जिन पर फैसला नहीं हो पाया है। जबकि 2020 में प्रशासन ने वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े ऐसे मामलों में जल्द सुनवाई और उन्हें उनका हक दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत की थी।
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- फोटो : freepik
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विस्तार
जो मां-बाप अपने बच्चों को एक पौधे की तरह ताउम्र सींचते हैं। फूलों की तरह उनके जीवन में महक भरते हैं। वही बच्चे दाम्पत्य जीवन और परिवार की बागडोर संभालते हुए अपने बुजुर्ग मां-बाप को बेघर कर देते हैं। या फिर यूं कहे अब उस माली की कदर ही नहीं रही।
संपत्ति के लालच, बंटवारे और जीवन के अंतिम पायदान पर खड़े अपने मां-बाप की सेवा नहीं करने की मंशा से उन्हें दो वक्त की रोटी देने से भी गुरेज कर रहे हैं। ऐसी ही कई अनसुनी फरियादें चंडीगढ़ प्रशासन के एडीसी कोर्ट यानी सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल में वर्षों से धूल फांक रही हैं। वरिष्ठ नागरिकों को उनके घर से बेघर किए जाने, उनके बच्चों द्वारा संपत्ति हड़प लेने, अपने ही घर में नौकरों की तरह जीवन जीने पर मजबूर या फिर परिवारिक कलह से परेशान ऐसे कई मामले एडीसी कोर्ट यानी सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल में इंसाफ के
इंतजार में हैं।
एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (एडीसी) के सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल में आज की तारीख में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े ऐसे 82 केस पेंडिंग पड़े हैं, जिन पर फैसला नहीं हो पाया है। जबकि 2020 में प्रशासन ने वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े ऐसे मामलों में जल्द सुनवाई और उन्हें उनका हक दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत की थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट तो शुरू हो गई, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों की इंसाफ की
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जद्दोजहद आज भी जारी है। पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो ट्रिब्यूनल में वर्ष 2018 तक 335 मामले पेंडिग थे। जिन पर सुनवाई पूरी नहीं हुई थी। इन मामलों को वर्ष 2019 में जोड़ा गया। दिसंबर 2019 तक ट्रिब्यूनल के पास सीनियर सिटीजंस से जुड़े 443 मामले हो चुके थे। एडीसी अमनदीप सिंह भट्टी ने बताया कि दो साल पहले तक ट्रिब्यूनल में 200 से ज्यादा केस पेंडिंग थे। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल में 120 केसों का निपटारा किया गया है, अब भी 82 के करीब केस पेडिंग हैं। बता दें हर हफ्ते चार से पांच केस एडीसी के सामने आते हैं।
आज उन्हें उनके घर से ही बेघर करने के यत्न किए जा रहे हैं।
एडवोकेट रविंद्र कृष्ण मध्यमार्ग पर सेक्टर-9 की जिस कोठी में रहते हैं, उसकी कीमत का अंदाजा ही लगाया जाए तो यह करीब 200 करोड़ रुपये की है। सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल में एडवोकेट रविंद्र कृष्ण
अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। यह ऐसी सिर्फ एक अनसुनी फरियाद नहीं, ऐसे हजारों बुजुर्ग मां-बाप अपने हक, इंसाफ और अपने ही घर की छत के नीचे रहने के लिए सहारा ढूंढ रहे हैं।
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संपत्ति के लालच, बंटवारे और जीवन के अंतिम पायदान पर खड़े अपने मां-बाप की सेवा नहीं करने की मंशा से उन्हें दो वक्त की रोटी देने से भी गुरेज कर रहे हैं। ऐसी ही कई अनसुनी फरियादें चंडीगढ़ प्रशासन के एडीसी कोर्ट यानी सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल में वर्षों से धूल फांक रही हैं। वरिष्ठ नागरिकों को उनके घर से बेघर किए जाने, उनके बच्चों द्वारा संपत्ति हड़प लेने, अपने ही घर में नौकरों की तरह जीवन जीने पर मजबूर या फिर परिवारिक कलह से परेशान ऐसे कई मामले एडीसी कोर्ट यानी सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल में इंसाफ के
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इंतजार में हैं।
एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (एडीसी) के सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल में आज की तारीख में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े ऐसे 82 केस पेंडिंग पड़े हैं, जिन पर फैसला नहीं हो पाया है। जबकि 2020 में प्रशासन ने वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े ऐसे मामलों में जल्द सुनवाई और उन्हें उनका हक दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत की थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट तो शुरू हो गई, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों की इंसाफ की
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जद्दोजहद आज भी जारी है। पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो ट्रिब्यूनल में वर्ष 2018 तक 335 मामले पेंडिग थे। जिन पर सुनवाई पूरी नहीं हुई थी। इन मामलों को वर्ष 2019 में जोड़ा गया। दिसंबर 2019 तक ट्रिब्यूनल के पास सीनियर सिटीजंस से जुड़े 443 मामले हो चुके थे। एडीसी अमनदीप सिंह भट्टी ने बताया कि दो साल पहले तक ट्रिब्यूनल में 200 से ज्यादा केस पेंडिंग थे। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल में 120 केसों का निपटारा किया गया है, अब भी 82 के करीब केस पेडिंग हैं। बता दें हर हफ्ते चार से पांच केस एडीसी के सामने आते हैं।
नामी इनकम टैक्स वकील रविंद्र कृष्ण भी पहुंचे एडीसी कोर्ट
शहर के नामचीन व्यक्तियों में शुमार और करोड़ों की संपत्ति के मालिक इनकम टैक्स के वकील रविंद्र कृष्ण भी एडीसी के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचे हैं। 84 साल के सीनियर एडवोकेट रविंद्र कृष्ण ने सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल में अपने बेटे के खिलाफ शिकायत दी है। उनका बेटा उन्हें बेघर करने पर लगा है, जबकि रविंद्र कृष्ण का कहना है कि यह संपत्ति उन्होंने अपने बच्चों के नाम की थी, लेकिनआज उन्हें उनके घर से ही बेघर करने के यत्न किए जा रहे हैं।
एडवोकेट रविंद्र कृष्ण मध्यमार्ग पर सेक्टर-9 की जिस कोठी में रहते हैं, उसकी कीमत का अंदाजा ही लगाया जाए तो यह करीब 200 करोड़ रुपये की है। सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल में एडवोकेट रविंद्र कृष्ण
अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। यह ऐसी सिर्फ एक अनसुनी फरियाद नहीं, ऐसे हजारों बुजुर्ग मां-बाप अपने हक, इंसाफ और अपने ही घर की छत के नीचे रहने के लिए सहारा ढूंढ रहे हैं।