Haryana: यमुनानगर से शिफ्ट नहीं होगा 800MV का थर्मल प्लांट, हरियाणा का तर्क- 180 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आएगा
पानीपत में कुल 710 मेगावाट बिजली उत्पादन होता था। उसी की जगह यमुनानगर में 800 मेगावाट का प्लांट लगाया जाना है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी को लिखे पत्र में कहा गया है कि अगर प्लांट शिफ्ट किया जाता है तो प्रति साल 180 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च आएगा और बिजली भी महंगी पड़ेगी।
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यमुनानगर में प्रस्तावित 800 मेगावाट के थर्मल प्लांट के शिफ्टिंग की अटकलों पर हरियाणा सरकार ने विराम लगा दिया है। हरियाणा सरकार ने दावा किया है कि प्लांट यमुनानगर में ही लगेगा। यहां तक कि पिटहेड (कोयला वाले राज्य) में प्लांट लगाने के सुझाव पर भी हरियाणा सरकार ने हामी भर दी। सरकार का कहना है कि अगर केंद्र सरकार कहेगी तो वह कोयला वाले राज्य (झारखंड, ओडिशा) में भी नया प्लांट लगाने के लिए वह तैयार हैं। हरियाणा सरकार का तर्क है कि 2030 तक प्रदेश में बिजली की मांग 19 हजार मेगावाट तक पहुंच जाएगी। इस समय प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत बिजली की मांग बढ़ रही है। बिजली पर बढ़ती निर्भरता के चलते यह मांग और बढ़नी तय है।
हरियाणा सरकार ने आगामी सात साल में 4500 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इनमें थर्मल, हाईडल और न्यूक्लियर से पैदा होने वाली बिजली शामिल है। इस समय प्रदेश में 5242 मेगावाट बिजली प्रदेश में पैदा होती है और शेष दूसरे राज्यों से खरीदी जाती है, क्योंकि पानीपत प्लांट के 1 से 5 तक यूनिट बंद हो चुके हैं और 6, 7 और 8 यूनिट भी 2030 तक बंद हो जाएंगे।
पानीपत में कुल 710 मेगावाट बिजली उत्पादन होता था। उसी की जगह यमुनानगर में 800 मेगावाट का प्लांट लगाया जाना है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी को लिखे पत्र में कहा गया है कि अगर प्लांट शिफ्ट किया जाता है तो प्रति साल 180 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च आएगा और बिजली भी महंगी पड़ेगी। दूसरा, यमुनानगर प्लांट के लिए पहले से ही जमीन ली हुई है और यह प्लांट लगाने में कोई देरी नहीं और बाधा नहीं होगी।
कोयला आपूर्ति बनती है हर साल बाधा
थर्मल प्लांटों के मुताबिक केंद्र की ओर से राज्यों को कोयला अलॉट किया जाता है। उन्होंने थर्मल प्लांटों में कोयला आपूर्ति पर सवाल उठाया गया है। हर साल बारिश के सीजन में कोयला थर्मलों तक पहुंचाने में दिक्कत आती है। हरियाणा ने कहा कि कोयला आपूर्ति को लेकर भी हरियाणा स्थायी समाधान करेगा। इसके लिए पीपीपी मोड पर कोयले की आपूर्ति हो सकती है।
यमुनानगर में स्थापित किया जाने वाला 800 मेगावाट का प्लांट शिफ्ट नहीं किया जा रहा। हरियाणा पावर जनरेशन कारपोरेशन लिमिटेड से सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी को पत्र लिखकर जवाब दे दिया है। इसमें यमुनानगर में प्लांट लगाने के पीछे तर्क दिए गए हैं। जहां तक कोयला वाले राज्य में प्लांट लगाने की बात है तो इस पर हरियाणा सरकार पहले से ही विचार कर रही है। 2030 तक बिजली की मांग को देखते हुए झारखंड या छत्तीसगढ़ किसी भी प्रदेश में एक और नया प्लांट लगा सकते हैं। -पीके दास, चेयरमैन, बिजली निगम।