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Chandigarh News: 75 दिन का चुनावी शोर... नेताजी को लगाना पड़ेगा जोर
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ लोकसभा सीट का चुनाव अंतिम चरण में है यानी मतदान एक जून को होगा। अंतिम चरण में मतदान का फायदा यह है कि उम्मीदवारों को प्रचार करने का पूरा वक्त मिलेगा लेकिन चुनौतियां भी होंगी। अप्रैल माह के अंत से ही तेज गर्मी पड़ने लगेगी। मई में पारा 40 डिग्री के पार होगा। ऐसे में प्रत्याशियों को खूब पसीना बहाना पड़ेगा। टीम में गुटबाजी न हो, लंबे समय तक कार्यकर्ताओं को भी मैनेज करना बड़ी चुनौती होगी।वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी चंडीगढ़ में अंतिम चरण में मतदान हुए थे। इसकी वजह से प्रत्याशियों को प्रचार के लिए 70 दिन मिले थे लेकिन इस बार उससे भी ज्यादा 75 दिन मिले हैं। हालांकि 2014 के चुनाव में ऐसा नहीं था। वर्ष 2014 में 5 मार्च को चुनाव की घोषणा हुई थी और 10 अप्रैल को चंडीगढ़ में वोटिंग हो गई थी। उम्मीदवारों को करीब एक महीने का ही वक्त मिला था। इस एक महीने में ही दावेदारों की घोषणा हुई। प्रचार हुआ और मतदान भी हुआ लेकिन इस बार उम्मीदवारों के पास पूरे 75 दिन हैं। ज्यादा वक्त होने की वजह से चुनाव प्रचार अधिक दिन तक करना होगा।
शहर में इस बार आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने एक साथ मिलकर बीजेपी के खिलाफ उतरने का फैसला किया है। गठबंधन में चंडीगढ़ की सीट कांग्रेस के खाते में आई है इसलिए कांग्रेस ज्यादा सक्रिय नजर आ रही है। भाजपा ने प्रचार शुरू कर दिया है लेकिन अभी रफ्तार धीमी है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन सक्रिय हैं। उधर, कांग्रेसी नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल पिछले एक महीने से लोगों से मिल रहे हैं और उनकी समस्याएं सुन रहे हैं।
जहां पहले मतदान, वहां फोकस करेंगी पार्टियां
राष्ट्रीय पार्टियों का पहला फोकस अब वहां होगा, जहां चुनाव पहले चरण में है। पहले चरण में जहां चुनाव होना है, वहां के उम्मीदवारों की घोषणा और तैयारी को पूरा करने पर जोर रहेगा। चंडीगढ़ और पंजाब में चुनाव आखिरी चरण में है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि यहां के उम्मीदवारों की घोषणा देर से होगी। पहले माना जा रहा था कि चुनाव की घोषणा होते ही एक हफ्ते के भीतर भाजपा और कांग्रेस-आम आदमी पार्टी गठबंधन के उम्मीदवारों के नाम सामने आ जाएंगे लेकिन अब माना जा रहा है कि नामांकन से कुछ दिन पहले ही प्रत्याशियों की घोषणा होगी, तब तक पार्टी की तरफ से कहा जाएगा कि पार्टी सिंबल पर भी प्रचार अभियान को चलाया जाए।
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शहर में इस बार आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने एक साथ मिलकर बीजेपी के खिलाफ उतरने का फैसला किया है। गठबंधन में चंडीगढ़ की सीट कांग्रेस के खाते में आई है इसलिए कांग्रेस ज्यादा सक्रिय नजर आ रही है। भाजपा ने प्रचार शुरू कर दिया है लेकिन अभी रफ्तार धीमी है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन सक्रिय हैं। उधर, कांग्रेसी नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल पिछले एक महीने से लोगों से मिल रहे हैं और उनकी समस्याएं सुन रहे हैं।
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जहां पहले मतदान, वहां फोकस करेंगी पार्टियां
राष्ट्रीय पार्टियों का पहला फोकस अब वहां होगा, जहां चुनाव पहले चरण में है। पहले चरण में जहां चुनाव होना है, वहां के उम्मीदवारों की घोषणा और तैयारी को पूरा करने पर जोर रहेगा। चंडीगढ़ और पंजाब में चुनाव आखिरी चरण में है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि यहां के उम्मीदवारों की घोषणा देर से होगी। पहले माना जा रहा था कि चुनाव की घोषणा होते ही एक हफ्ते के भीतर भाजपा और कांग्रेस-आम आदमी पार्टी गठबंधन के उम्मीदवारों के नाम सामने आ जाएंगे लेकिन अब माना जा रहा है कि नामांकन से कुछ दिन पहले ही प्रत्याशियों की घोषणा होगी, तब तक पार्टी की तरफ से कहा जाएगा कि पार्टी सिंबल पर भी प्रचार अभियान को चलाया जाए।
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