टोल की टीसः 300 किमी के सफर पर 7 टोल प्लाजा
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पंजाब में टोल टैक्स लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। हाईवे और फ्लाईओवर के निर्माण के नाम पर शुरू हुई टोल की वसूली बढ़ते-बढ़ते अब इस हद तक पहुंच गई है कि लोगों का सफर सुहाना होने के बजाय मुश्किल हो गया है।
टोल फीस का बोझ उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है। पंजाब में यह हाल है कि एक ही रूट पर कई-कई टोल प्लाजा हैं। जहां मोटी टोल फीस वसूली जा रही है।
अंबाला से अगर कोई अपनी कार में रोपड़, नवांशहर होते हुए वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी देखने जाता है तो ठगा रह जाता है। टोल प्लाजा पर रुकते-रुकते और फीस अदा करते-करते उसका घूमने का जोश ही खत्म हो जाता है।
अंबाला से वाघा तक के 299 किलोमीटर के सफर में सात टोल प्लाजा बने गए हैं, जिनकी एक तरफ की कुल टोल फीस 254 रुपये अदा करनी पड़ती है। अंबाला से चलने के बाद पहले दप्पर में कार की एक तरफ की टोल फीस 34 रुपये है।
उसके बाद कुराली-रोपड़ रोड पर सोलखियां में 41 रुपये फीस लगती है। रोपड़-बलाचौर रोड पर काठगढ़ में और बंगा-फगवाड़ा रोड पर बहराम में 34-34 रुपये फीस लगती है। जालंधर-अमृतसर रोड पर निझरपुरा और ढिलवां में 23-23 रुपये फीस है।
आखिर में अमृतसर-वाघा रोड पर छिद्दां में 35 रुपये टोल फीस अदा करने के बाद ही वाघा बॉर्डर की रिट्रीट सेरेमनी का मजा लिया जा सकता है।
अंबाला टू वाघा तक ये है टोल फीस
टोल प्लाजा--- कार---एलसीवी---बस
दप्पर-------34---59----117
सोलखियां----41---7----143
काठगढ़------34---51----101
बहराम-------34---51----101
ढिलवां------23---41----82
निझरपुरा-----23---41----82
छिद्दां-------35---25---120
पंजाब की सड़कों पर हैं 25 टोल प्लाजा
पंजाब में टोल पॉलिसी की गाइडलाइंस वर्ष 2002 में आ गई थी। वर्ष 2004 तक उन पर अमल होना शुरू हुआ। पहले कंसलटेंट्स से वायबिलिटी रिपोर्ट मंगाई गई। फिर हाईवे के निर्माण और रिपेयर का काम शुरु हुआ।
इस बीच नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने टोल प्लाजा स्थापित करना शुरू किया। वर्ष 2007 पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट अथॉरिटी ने भी टोल प्लाजा स्थापित करने शुरू किए। अब पंजाब में 25 टोल प्लाजा हैं, जिनमें से सात एनएचएआई के हैं जबकि 18 पीआईडीबी के हैं।
सात किलोमीटर में थे दो टोल प्लाजा
खरड़-रोपड़ रोड पर सात किलोमीटर के दायरे में दो टोल प्लाजा खोल दिए गए थे। पहले बन माजरा में कुराली ओवर ब्रिज का टोल प्लाजा था। फिर सोलखियां में रोड का टोल प्लाजा खुल गया। दोनों केबीच सात किलोमीटर की दूरी थी।
दो-दो बार टोल फीस देकर लोगों का बुरा हाल हो गया। लोगों ने आंदोलन छेड़ा, मामले ने सियासी रंग लिया तो 2013 में बन माजरा टोल प्लाजा बंद कर दिया गया। उसका ढांचा अभी तक खड़ा है।