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Chandigarh News: व्यवस्था 4.68 लाख के लिए इस्तेमाल कर रहे 6.39 लाख लोग
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पंचकूला। शहरवासियों के लिए पानी के दाम हर साल पांच फीसदी बढ़ा दिए जाते हैं, मगर सुविधाएं नहीं बढ़ाई जा रही हैं। फिलहाल शहर में जिस ढांचागत व्यवस्था से पानी सप्लाई किया जा रहा है, वो 20 साल पुरानी है। इन 20 सालों में आबादी 1.71 लाख बढ़ गई हैं, जबकि व्यवस्थाएं सब पुरानी हैं। 2001 शहर की आबादी 4.68 लाख थी जबकि करीब 20 साल बाद 2023 में शहर की आबादी बढ़कर करीब 6.39 लाख हो गई है। यही कारण है कि लोगों के सामने अब पेयजल किल्लत, लाे प्रेशर और लीकेज की समस्याएं आ रही है। इतना ही नहीं एचएसवीपी इन 20 सालों में आज तक पानी सप्लाई के लिए आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है। बिजली जाने पर कहीं भी जेनरेटर या सौर ऊर्जा की कोई व्यवस्था किसी ट्यूबवेल पर नहीं की गई है। बिजली कट के साथ ही पानी की सप्लाई भी बंद हो जाती है।
शहर में जिस समय पाइप लाइनें बिछाई गई थीं, उस समय शहर की आबादी बहुत कम थी। अगर 20 साल पहले की बात करें तो शहर में पानी के कनेक्शन 12 से 13 हजार थे। अब शहर में रिहायशी और व्यावसायिक कनेक्शनों की संख्या 36 हजार हो गई है। जिस आधारभूत संरचना से 12 हजार उपभोक्ताओं को पानी दिया जाता था, उसी से 36 हजार उपभोक्ताओं को पानी दिया जा रहा है। लोगों को महंगी दर पर पानी तो दिया जा रहा है, मगर आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर कोई काम नहीं किया गया।
कमजोर हो चुकी हैं पाइप लाइनें
जब भी पानी पूरे प्रेशर के साथ छोड़ा जाता है तो पाइप लाइनें फटनी शुरू हो जाती हैं। इसका कारण यह है कि ये पाइप लाइन कई साल पुरानी हैं। इसी कारण ये कमजोर हो चुकी हैं। पाइपों की मरम्मत के चलते दिनभर पानी की सप्लाई लोगों को नहीं मिल पाती है। नई पाइप लाइन डालने की भी अभी कोई योजना नहीं है। इसके बावजूद जब भी अधिकारियों से बात की जाती है तो वे यही कहते हैं कि बेहतर से बेहतर पानी आपूर्ति का प्रयास कर रहे हैं।
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20 फीसदी बढ़ोतरी कम हुई तो मिल सकती है राहत
कोरोना काल के दौरान बिल में बढ़ोतरी नहीं की गई, मगर इस साल सरकार ने चार साल की 20 फीसदी बढ़ोतरी एक साथ कर दी। उसके दो महीने बाद ही इस साल की बढ़ोतरी 5 फीसदी भी कर दी गई। लोगों के विरोध को देखकर सरकार ने 20 फीसदी बढ़ोतरी को वापस लेने का फैसला किया है। अगर ये बढ़ोतरी वापस हो जाती है तो लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।
वर्जन::
चंडीगढ़ को कजौली वाटर वर्क्स से पानी मिलता है। इस कारण उनका खर्च बहुत कम होता है। हमें वहां से पानी नहीं मिलता। कौशल्या डैम से मिलने वाले पानी को साफ करने और ट्यूबवेलों से पानी निकालने में भारी खर्च आता है। इसके बावजूद चंडीगढ़ से सस्ता पानी लोगों को उपलब्ध करा रहे हैं। फिलहाल चंडीगढ़ से 10 फीसदी पानी सस्ता है। अगर 20 फीसदी बढ़ोतरी वापस हो जाती है तो 25 फीसदी दाम चंडीगढ़ की अपेक्षा कम हो जाएंगे। -एनके पायल, एक्सईएन, एचएसवीपी
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शहर में जिस समय पाइप लाइनें बिछाई गई थीं, उस समय शहर की आबादी बहुत कम थी। अगर 20 साल पहले की बात करें तो शहर में पानी के कनेक्शन 12 से 13 हजार थे। अब शहर में रिहायशी और व्यावसायिक कनेक्शनों की संख्या 36 हजार हो गई है। जिस आधारभूत संरचना से 12 हजार उपभोक्ताओं को पानी दिया जाता था, उसी से 36 हजार उपभोक्ताओं को पानी दिया जा रहा है। लोगों को महंगी दर पर पानी तो दिया जा रहा है, मगर आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर कोई काम नहीं किया गया।
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कमजोर हो चुकी हैं पाइप लाइनें
जब भी पानी पूरे प्रेशर के साथ छोड़ा जाता है तो पाइप लाइनें फटनी शुरू हो जाती हैं। इसका कारण यह है कि ये पाइप लाइन कई साल पुरानी हैं। इसी कारण ये कमजोर हो चुकी हैं। पाइपों की मरम्मत के चलते दिनभर पानी की सप्लाई लोगों को नहीं मिल पाती है। नई पाइप लाइन डालने की भी अभी कोई योजना नहीं है। इसके बावजूद जब भी अधिकारियों से बात की जाती है तो वे यही कहते हैं कि बेहतर से बेहतर पानी आपूर्ति का प्रयास कर रहे हैं।
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20 फीसदी बढ़ोतरी कम हुई तो मिल सकती है राहत
कोरोना काल के दौरान बिल में बढ़ोतरी नहीं की गई, मगर इस साल सरकार ने चार साल की 20 फीसदी बढ़ोतरी एक साथ कर दी। उसके दो महीने बाद ही इस साल की बढ़ोतरी 5 फीसदी भी कर दी गई। लोगों के विरोध को देखकर सरकार ने 20 फीसदी बढ़ोतरी को वापस लेने का फैसला किया है। अगर ये बढ़ोतरी वापस हो जाती है तो लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।
वर्जन::
चंडीगढ़ को कजौली वाटर वर्क्स से पानी मिलता है। इस कारण उनका खर्च बहुत कम होता है। हमें वहां से पानी नहीं मिलता। कौशल्या डैम से मिलने वाले पानी को साफ करने और ट्यूबवेलों से पानी निकालने में भारी खर्च आता है। इसके बावजूद चंडीगढ़ से सस्ता पानी लोगों को उपलब्ध करा रहे हैं। फिलहाल चंडीगढ़ से 10 फीसदी पानी सस्ता है। अगर 20 फीसदी बढ़ोतरी वापस हो जाती है तो 25 फीसदी दाम चंडीगढ़ की अपेक्षा कम हो जाएंगे। -एनके पायल, एक्सईएन, एचएसवीपी