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करतारपुर साहिब के पास 104 एकड़ भूमि को निर्माण मुक्त एरिया घोषित करे पाक: अमेरिकन सिख काउंसिल

Wed, 31 Jul 2019 12:17 PM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 31 Jul 2019 12:17 PM IST
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550th parkash parv, demand to give status of construction free land nearby kartarpur sahib
फाइल फोटो
ऐतिहासिक गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के आसपास स्थित गुरु नानक देव जी द्वारा सिंचित 104 एकड़ भूमि को संरक्षित किया जाए। अमेरिकन सिख काउंसिल (एएससी) के अध्यक्ष डॉ. गुरदास सिंह ने पाकिस्तान पंजाब के गवर्नर चौ. मोहम्मद सरवर को एक पत्र लिखकर यह मांग की है।
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पत्र में लिखा गया है कि गवर्नर चौ. मोहम्मद सरवर अपने उस निर्णय पर दोबारा विचार करें, जिसमें उन्होंने गुरुद्वारा साहिब परिसर की तीन एकड़ भूमि को 14 फीसदी बढ़ाकर 42 एकड़ भूमि में गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के आसपास विस्तार करने के आदेश दिए हैं।
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इस आदेश के बाद गुरुनानक देव जी की पावन-पवित्र भूमि के एक बड़े हिस्से को संगमरमर के पत्थरों से ढक दिया जाएगा। इस पावन भूमि में किए जाने वाले निर्माण से गुरुनानक देव जी की विरासत इतिहास में दफन हो जाएगी। संगमरमर से करवाए जा रहे निर्माण कार्यों से गुरुनानक देव जी के साथ जुड़ा इतिहास खत्म हो जाएगा।
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एक संदेश में डॉ. गुरदास सिंह ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी ने गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के साथ सटी 104 एकड़ के खेतों को अपने हाथों से सींचा था। दुनिया भर में बसे दस करोड़ सिख विशेषकर नानक नाम लेवा के लिए इन खेतों की मिट्टी बहुत पवित्र है। उनके लिए इन खेतों के दर्शन और मिट्टी एक जीवंत इतिहास है।

संगमरमर और पत्थर के नीचे पवित्र भूमि को दफनाने से बाबा नानक से जुड़े कलाकृतियों के पुरातात्विक पुनरुत्थान और इतिहास के पुनर्निर्माण का कोई भी मौका पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। डॉ. गुरदास सिंह ने पाकिस्तान पंजाब के गवर्नर से मांग की कि वह गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के आसपास की 104 एकड़ भूमि को निर्माण मुक्त क्षेत्र घोषित कर दें।

उन्होंने दावा किया कि गुरुद्वारा साहिब के आसपास की 171 एकड़ जमीन 1922 से 1925 (इसी बीच एसजीपीसी का गठन हुआ) की जमा बंदी के अनुसार इस भूमि का स्वामित्व एक ट्रस्ट के पास था। पाकिस्तान के सियालकोट और नरोवाल के सिख देश विभाजन के दौरान इस जमीन के अधिकार को छोड़ने पर मजबूर हो गए थे।

2000 के बाद गुरुद्वारा करतारपुर फिर से अंतरराष्ट्रीय संगतों के लिए शुरू हुआ, तो उन्होंने स्थानीय लोगों से वहां की जमीन को खरीदना शुरू कर दिया था। खेती के लिए करीब 45 एकड़ जमीन का इस्तेमाल किया गया था और शेष जमीन को बागों में बदल दिया गया था।

गुरुद्वारा ननकाना साहिब से 550वें प्रकाश पर्व की हो रही है शुरुआत: डॉ फैजल

श्रद्धालुओं के जत्थे को पाकिस्तान पहुंचने के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. फैजल अहमद ने एक संदेश में कहा कि पाकिस्तान को लगता है कि भारतीय सिखों द्वारा बाबा गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती मनाने की शुरुआत गुरुद्वारा ननकाना साहिब से की जा रही है।

पाकिस्तान सरकार दोनों देशों के बीच धार्मिक स्थलों के दर्शन करवाने और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने की नीति में विश्वास करती है। पाकिस्तानी सरकार गुरु नानक देव जी की जयंती को यादगार और ऐतिहासिक बनाने के लिए करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन सहित कई प्रयास कर रही है।

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