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प्रिंसिपल के 500 खाली पदों को भरने की मांग
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 26 Nov 2013 08:22 PM IST
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पंजाब के सरकारी स्कूल मुख्याध्यापक एसोसिएशन के नेताओं ने खाली पड़े प्रिंसिपल के 500 पदों को तुरंत भरने और इन पर मुख्याध्यापकों को तैनात करने की मांग की है।
ऐसा नहीं करने पर एसोसिएशन ने अन्य संगठनों को साथ लेकर जोरदार संघर्ष करने की घोषणा की है।
मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में एसोसिएशन के अध्यक्ष बृज मोहन सिंह और महासचिव सुखविंदर सिंह ने बताया कि पंजाब सरकार ने हलफिया बयान दिया है कि 31 जनवरी 2014 तक प्रिंसिपलों के पद भर दिए जाएंगे।
अब स्कूल लेक्चरर सरकार पर दबाव बना रहे हैं उनके पदोन्नत करने का कोटा बढ़ाया जाए और उन्हें पदोन्नत कर प्रिंसिपल बनाया जाए।
इससे पहले ही स्कूल लेक्चररों में से प्रिंसिपल बनने का कोटा 55 फीसदी, वोकेशनल टीचरों में से 15 फीसदी और स्कूलों के मुख्याध्यापकों में से के वल 30 फीसदी हिस्सा है। जबकि मुख्याध्यापकों को प्रशासनिक तजुर्बा होने के कारण कोटा इनका बढ़ाना चाहिए।
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संख्या ज्यादा होने के कारण लेक्चरर सरकार पर भारी पड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि लेक्चररों के दबाव में आकर सरकार ने उनका कोटा बढ़ाया तो अन्य संगठनों को साथ लेकर जोरदार संघर्ष शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि लेक्चररों और वोकेशनल अध्यापकों को तो कोई प्रशासनिक तजुर्बा नहीं होता फिर भी प्रिंसिपल बना दिया जाता है। लेकिन मुख्याध्यापकों पर प्रिंसिपल बनने के लिए 7 वर्ष के तजुर्बे की शर्त लगा रखी है।
अब तो मुख्याध्यापकों का सात वर्ष का तजुर्बा भी पूरा हो चुका है। इसलिए पद तुरंत भरने चाहिए।
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ऐसा नहीं करने पर एसोसिएशन ने अन्य संगठनों को साथ लेकर जोरदार संघर्ष करने की घोषणा की है।
मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में एसोसिएशन के अध्यक्ष बृज मोहन सिंह और महासचिव सुखविंदर सिंह ने बताया कि पंजाब सरकार ने हलफिया बयान दिया है कि 31 जनवरी 2014 तक प्रिंसिपलों के पद भर दिए जाएंगे।
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अब स्कूल लेक्चरर सरकार पर दबाव बना रहे हैं उनके पदोन्नत करने का कोटा बढ़ाया जाए और उन्हें पदोन्नत कर प्रिंसिपल बनाया जाए।
इससे पहले ही स्कूल लेक्चररों में से प्रिंसिपल बनने का कोटा 55 फीसदी, वोकेशनल टीचरों में से 15 फीसदी और स्कूलों के मुख्याध्यापकों में से के वल 30 फीसदी हिस्सा है। जबकि मुख्याध्यापकों को प्रशासनिक तजुर्बा होने के कारण कोटा इनका बढ़ाना चाहिए।
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संख्या ज्यादा होने के कारण लेक्चरर सरकार पर भारी पड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि लेक्चररों के दबाव में आकर सरकार ने उनका कोटा बढ़ाया तो अन्य संगठनों को साथ लेकर जोरदार संघर्ष शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि लेक्चररों और वोकेशनल अध्यापकों को तो कोई प्रशासनिक तजुर्बा नहीं होता फिर भी प्रिंसिपल बना दिया जाता है। लेकिन मुख्याध्यापकों पर प्रिंसिपल बनने के लिए 7 वर्ष के तजुर्बे की शर्त लगा रखी है।
अब तो मुख्याध्यापकों का सात वर्ष का तजुर्बा भी पूरा हो चुका है। इसलिए पद तुरंत भरने चाहिए।