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सड़क हादसों में मौतों में 48% की कमी, सड़क सुरक्षा फोर्स दो साल में सफल: मान
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-हादसे वाली जगह पर पहुंचती है मात्र 5 से 7 मिनट में
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि सड़क सुरक्षा फोर्स (एसएसएफ) को दो साल पूरे हो गए हैं और इसी पहल के कारण सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 48 फीसदी की कमी आई है। मान ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से बताया कि फोर्स हादसे वाली जगह पर मात्र 5 से 7 मिनट में पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम करती है। उन्होंने कहा कि इस पहल की सफलता को देखते हुए अन्य राज्य भी पंजाब से संपर्क कर रहे हैं।
आम आदमी पार्टी पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने बताया कि साल 2023 में हाईवे पर 1,955 मौतें हुई थीं, जो साल 2024 में घटकर 1,016 रह गईं। इसका मतलब है कि एसएसएफ की तेज और प्रोफेशनल प्रतिक्रिया से मात्र एक साल में 940 जानें बचाई गईं।
पन्नू ने बताया कि एसएसएफ में लगभग 1,500 विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान फुल-टाइम तैनात हैं और इन्हें किसी अन्य ड्यूटी, जैसे वीआईपी सुरक्षा, पर नहीं भेजा जाता। हाईवे पर हर 30 किलोमीटर की दूरी पर लैस एसएसएफ गाड़ियां तैनात हैं, जो फर्स्ट-एड, बचाव उपकरण और कटर से लैस हैं। जवान घायलों को तुरंत मेडिकल सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित हैं और उन्हें सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाते हैं। एसएसएफ की सक्रियता से हादसे के बाद होने वाली लूटपाट और अन्य अपराधों में भी कमी आई है, खासकर रात के समय। पन्नू ने कहा कि यह फोर्स तेजी, दक्षता और समर्पण का प्रतीक बन गई है और भविष्य में सड़क सुरक्षा को और बेहतर बनाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि सड़क सुरक्षा फोर्स (एसएसएफ) को दो साल पूरे हो गए हैं और इसी पहल के कारण सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 48 फीसदी की कमी आई है। मान ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से बताया कि फोर्स हादसे वाली जगह पर मात्र 5 से 7 मिनट में पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम करती है। उन्होंने कहा कि इस पहल की सफलता को देखते हुए अन्य राज्य भी पंजाब से संपर्क कर रहे हैं।
आम आदमी पार्टी पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने बताया कि साल 2023 में हाईवे पर 1,955 मौतें हुई थीं, जो साल 2024 में घटकर 1,016 रह गईं। इसका मतलब है कि एसएसएफ की तेज और प्रोफेशनल प्रतिक्रिया से मात्र एक साल में 940 जानें बचाई गईं।
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पन्नू ने बताया कि एसएसएफ में लगभग 1,500 विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान फुल-टाइम तैनात हैं और इन्हें किसी अन्य ड्यूटी, जैसे वीआईपी सुरक्षा, पर नहीं भेजा जाता। हाईवे पर हर 30 किलोमीटर की दूरी पर लैस एसएसएफ गाड़ियां तैनात हैं, जो फर्स्ट-एड, बचाव उपकरण और कटर से लैस हैं। जवान घायलों को तुरंत मेडिकल सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित हैं और उन्हें सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाते हैं। एसएसएफ की सक्रियता से हादसे के बाद होने वाली लूटपाट और अन्य अपराधों में भी कमी आई है, खासकर रात के समय। पन्नू ने कहा कि यह फोर्स तेजी, दक्षता और समर्पण का प्रतीक बन गई है और भविष्य में सड़क सुरक्षा को और बेहतर बनाएगी।
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