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पंजाबः 4100 छात्र खास तरीके से कर रहे हैं मरीजों की मदद, आइडिया जानकर आप भी कहेंगे शाबाश

Thu, 01 Nov 2018 09:12 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब) Updated Thu, 01 Nov 2018 09:12 AM IST
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41 hundred Students are helping patients in Ludhiana
सांकेतिक तस्वीर

लुधियाना के आरएस मॉडल स्कूल के 41 सौ छात्र समाजसेवा में अपना विशेष योगदान देकर आम लोगों को नई प्रेरणा दे रहे है। स्कूल के सभी छात्र हफ्ते में दो दिन (मंगलवार और शुक्रवार)  मां के हाथ का बना एक परांठा अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए दान करते हैं। जैसे ही सुबह के बच्चे स्कूल पहुंचते हैं, सबसे पहले मेन गेट के पास रखे क्रेट में परांठा डालते है।

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जैसे सभी क्रेट फुल हो जाते है, तो समाजसेवी संस्था रे ऑफ पॉजिटिविटी के मैंबर्स इस खाने को एक वैन के माध्यम से डीएमसी अस्पताल, कृष्णा अस्पताल और सिविल अस्पताल तक ले  जाते है। यही पर संस्था के मैंबर्स लोगों को मां के हाथ का बना खाना लोगों को देते है। स्कूल के बच्चों के साथ अब इस मुहिम में 161 अध्यापक भी जुड़ गए है।
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45 दिन से चल रहा था ट्रायल 

रे ऑफ पॉजिटिविटी संस्था के फाउंडर एमपी सिंह के अनुसार इस काम लगे उनकी संस्था को 45 दिन हो चुके है। उनके मन में आया था कि आम लोगों की किस तरह से मदद कर सकते हैं, इसी में विचार आया क्यों ना। स्कूल के बच्चों को इस काम में जोड़ा जाए। सबसे पहले शास्त्री नगर स्थित आरएस मॉडल स्कूल के प्रबंधकों से बात की गई। उनकी हां के बाद स्कूल के बच्चों को मोटिवेट किया गया।

 बच्चों ने अपने घर पर जाकर परिजनों को समझाया। धीरे धीरे अब स्कूल के बच्चे क्या अध्यापक भी इस सेवा के साथ जुड़ चुके हैं। सिटी के अन्य स्कूल भी उनसे इसमें अपना सहयोग देने की बात कह रहे थे। यह सेवा केवल खाने तक सीमित नहीं रहेगी, आने वाले दिनों में पुराने कपड़े, स्टेशनरी आदी को भी शामिल किया जाएगा। ताकी जो बच्चे किताबों या फिर किसी अन्य कारण पढ़ नहीं सकते है। उनकी सहायता की जा सके। 

स्कूल की तरफ से सिर्फ बच्चों को इस काम के लिए प्रेरित किया गया था। बच्चों ने अपने माता पिता को अपने स्तर मोटिवेट किया था। इस अभियाना को आगे बढ़ाने पर विचार चल रहा है। आगे बच्चों को हर महीने अपनी पॉकेट मनी से कुछ पैसा समाजसेवा के लिए दान करने को प्रेरित किया जाएगा। ताकी उस पैसे से अस्पताल में भर्ती गरीब मरीजों की सहायता की जा सके। - मोहन लाल कालड़ा. डॉयरेक्टर एकेडमी

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