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Haryana: गलत एरियर तय कराकर JBT व भाषा शिक्षकों ने डकारे 400 करोड़, जानिए कैसे किया पूरा खेल

Mon, 21 Nov 2022 09:00 AM IST
भूपेंद्र सिंह यशपाल शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 21 Nov 2022 09:00 AM IST
सार

डीडीओ, अनुभाग अधिकारियों के साथ मिलकर घोटाला किया गया। अपने जिले में 60 हजार एरियर बनना था, दूसरे जिले से ढाई लाख बन गया। अनुभाग अधिकारियों के सत्यापित दस्तावेज के जरिये ट्रेजरी से राशि निकली।

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400 crore scam in Haryana by fixing wrong arrears
घोटाला - फोटो : amar ujala

विस्तार

हरियाणा में गलत एरियर तय कराकर शिक्षक 400 करोड़ रुपये डकार गए हैं। जेबीटी और भाषा अध्यापकों ने स्कूल शिक्षा विभाग के डीडीओ और अनुभाग अधिकारियों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया है। डीडीओ की तरफ से भेजे एरियर के गलत केस को अनुभाग अधिकारियों ने भी सत्यापित कर दिया। उनके सत्यापन के आधार पर ही ट्रेजरी से एरियर के मूलधन और ब्याज की राशि निकली।

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अपने जिला कैडर के आधार पर जेबीटी और भाषा अध्यापकों का एरियर जहां साठ हजार रुपये बनता था, वहीं अन्य जिलों के आधार पर वह ढाई लाख रुपये और ब्याज डेढ़ लाख रुपये तक बन गया। विभाग के 70 फीसदी डीडीओ व अनुभाग अधिकारी गलत मूलधन व ब्याज सहित एरियर देने के मामले में संलिप्त हैं।
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जेबीटी व भाषा अध्यापकों का जिला कैडर है। छठे वेतन आयोग के तहत बेसिक वेतन निर्धारित होने पर उनका एरियर अपने जिला के आधार पर ही बनना था, लेकिन उन्होंने अन्य जिलों का उदाहरण देते हुए अपना एरियर बनवाया। डीडीओ और अनुभाग अधिकारियों ने गलती पकड़ने की बजाय शिक्षकों के केस एरियर और उसके ब्याज के लिए मंजूर कर दिए। 
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वित्त विभाग ने दिए रिकवरी व सख्त कार्रवाई के आदेश
स्कूल शिक्षा विभाग की लीपापोती को देखते हुए वित्त विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त अनुराग रस्तोगी ने 11 नवंबर को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि जिन कर्मचारियों ने गलत तरीके से एरियर का मूलधन और ब्याज वसूला है, उनसे तुरंत रिकवरी शुरू की जाए। एरियर के गलत केस बनाने और उन्हें सत्यापित करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

नीलम रानी केस को अनेक शिक्षकों ने बनाया आधार
वेतन विसंगतियों को आधार बनाकर जेबीटी नीलम रानी ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि उन्हें छठे वेतनमान आयोग के तहत वेतन नहीं मिल रहा और जूनियर शिक्षक ज्यादा वेतन ले रहे हैं। इस पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 15 फरवरी 2013 को नीलम रानी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसे उसके जूनियर के बराबर वेतनमान देने व एरियर राशि ब्याज समेत देने के आदेश जारी किए गए। हालांकि उस समय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की, लेकिन अपील खारिज हो गई। नीलम रानी केस को आधार बनाकर प्रदेशभर से हजारों की संख्या में याचिकाएं हाईकोर्ट के सम्मुख आई, जिनमें वही फैसला लागू किया गया।

शिक्षा निदेशक को नहीं मिला जिलों से डाटा
शिक्षा निदेशक सेकेंडरी डॉ अंशज सिंह अक्तूबर महीने में सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों से गलत एरियर और ब्याज ले चुके शिक्षकों का डाटा मांग चुके हैं, लेकिन अभी तक नहीं मिला। घोटाले के तार शिक्षा निदेशालय तक जुड़े हुए हैं, इसलिए निदेशक के आदेश ठंडे बस्ते में डाल दिए जा रहे हैं।

वेतन विसंगितयां दूर करने के लिए जेबीटी, भाषा शिक्षकों ने दिए थे धरने
छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर 2006 के बाद नौकरी लगे जेबीटी और भाषा अध्यापकों का वेतनमान उनसे पहले सेवारत शिक्षकों से अधिक हो गया। वेतनमान समान करने के लिए अनेक शिक्षक हाईकोर्ट पहुंच गए। चूंकि, छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर 2006 के बाद लगे जेबीटी, भाषा अध्यापकों का बेसिक वेतन 16290 और मास्टर वर्ग का 18460 तय किया गया, जबकि पहले लगे शिक्षकों के लिए 1.86 फार्मूले के तहत वेतनमान फिक्स करने के निर्देश दिए गए।

इससे काफी वेतन विसंगितयां उत्पन्न हुईं। इनको लेकर प्रदेशभर के कर्मचारियों ने सरकार को अपने ज्ञापन देना शुरू कर दिए। कुछ एसओ ने शिक्षकों का बेसिक वेतनमान 16,290 या 18,460 ना कर विभाग से मार्गदर्शन मांगा। इसे लेकर शिक्षकों ने जिला स्तर पर धरने व आमरण अनशन तक हुए।

वेतन विसंगतियों को देखते हुए सरकार ने 18 अगस्त 2009 को छठे वेतन आयोग के चारों पे बैंड के एंट्री प्वाइंट में कटौती करने के साथ-साथ अन्य के वेतनमान भी पुन निर्धारित कर दिए। इससे भाषा अध्यापकों व प्राथमिक शिक्षकों का वेतनमान 13,500 व मास्टर वर्ग का वेतनमान 14,830 कर दिया गया।

सरकार के इस कदम से 1.1.6 के बाद सरकारी सेवा में आए शिक्षकों के दो तरह के वेतनमान बन गए। कुछ जिलों में अगस्त 2009 के निर्देशों से पहले नियमानुसार 16,290 व 18,460 फिक्स किया गया, वही कुछ जिलों में 13,500 व 14,830 हो गया। विभाग ने इसे देखते हुए पर्सनल पे बनाने के निर्देश जारी किए।


जूनियर कैडर रूल्स का हुआ उल्लंघन
2017 में स्कूल शिक्षा विभाग ने जूनियर कैडर रुल्स के तहत पे सेटअप और एरियर का निर्धारण करने के निर्देश दिए, जिनका शिक्षकों ने उल्लंघन किया। पूरे प्रदेश में पे सेटअप मामले में जूनियर प्राथमिक शिक्षक वीरेंदर सिंह, भिवानी जिले के हेतमपुरा गांव का उदाहरण देते हुए प्रदेश के सभी जिलों के लगभग 98 फीसदी प्राथमिक शिक्षकों ने अपना एरियर प्राप्त किया है। जबकि, नियम व स्पष्ट दिशा-निर्देश होने के बावजूद डीडीओ व अनुभाग अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे रहे।

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