{"_id":"62ab9222ceea0d464c3d9863","slug":"4-accused-including-jail-employee-arrested-for-sending-sim-to-budail-jail-chandigarh-news-pkl4538743133","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुडैल जेल में सिम पहुंचाने के मामले में जेल कर्मचारी समेत 4 आरोपी गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुडैल जेल में सिम पहुंचाने के मामले में जेल कर्मचारी समेत 4 आरोपी गिरफ्तार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। बुड़ैल मॉडल जेल में गैंगस्टर तक सिमकार्ड पहुंचाने के मामले में पुलिस ने जेल कर्मचारी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान डड्डूमाजरा निवासी जेल कर्मचारी मनोज कुमार, मोहाली जिले के झामपुर निवासी अभिषेक, डड्डूमाजरा निवासी गौरव और हरीश और सेक्टर-38 निवासी नोनी के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में पता चला है कि नोनी, मनोज अभिषेक और गौरव दोस्त हैं। पूछताछ के बाद वीरवार को पुलिस ने सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
सेक्टर-49 थाना प्रभारी जय प्रकाश ने बताया कि जेल में जनवरी 2022 में एक सिमकार्ड पहुंचाया गया गया। बीते 2 जून को गैंगस्टर मंजीत से मोबाइल बरामद हुआ था। मोबाइल में सिम भी था। सिम की जांच करने पर पता चला कि सिम अभिषेक के नाम लिया गया है। इसके बाद पुलिस ने अभिषेक को गिरफ्तार किया।
अभिषेक ने बताया कि नोनी के कहने पर वह सिमकार्ड डड्डूमाजरा से लेकर आया था। उसने ही सिमकार्ड को गौरव को देने के लिए कहा था। इसके बाद नोनी और गौरव को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में गौरव ने बताया कि जेल में बंद हरीश ने उसे सिमकार्ड जेल कर्मचारी मनोज को देने को कहा था। मनोज ने सिमकार्ड हरीश तक पहुंचाया। थाना प्रभारी जय प्रकाश ने बताया कि आरोपी मनोज जेल में मल्टीटास्क स्टाफ (एमटीसी) के पद पर तैनात था और जेल की डिस्पेंसरी में उसकी ड्यूटी थी। मनोज बैरक और सेल में मोबाइल पहुंचाता था। इस दौरान उसने 12 चक्की के 9 नंबर सेल में हरीश को सिमकार्ड पहुंचाया था। पुलिस के अनुसार कॉल डिटेल डेढ़ से 200 पेज की निकली है। सिमकार्ड से कई लोगों को फोन किया गया, सभी नंबरों की जांच चल रही है। यह भी पता चला है कि हरीश जेल के लैंडलाइन नंबर से गौरव को फोन करता रहता था।
विज्ञापन
बता दें कि हरीश और गौरव ने एक साथ मिलकर एक हत्या की थी। गौरव उस समय नाबालिग था, ऐसे में उसे बाल सुुुधार गृह भेज दिया गया जबकि हरीश को बुड़ैल जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। हरीश और मंजीत एक ही सेल में बंद थे। जेल में हरीश की गौरव से बात होती थी।
बॉक्स
अभिषेक ने डड्डूमाजरा के पुराने पते पर लिया था सिमकार्ड
अभिषेक ने सिमकार्ड को अपने पुराने पते पर लिया था। जांच के दौरान जब पुलिस अभिषेक को तलाशते हुए उसके पते पर पहुंची तो पता चला वह पांच साल पहले ड्डडूमाजरा का मकान छोड़कर झामपुर में रहने चला गया है। पुलिस जब झामपुर पहुंची तो अभिषेक घर पर नहीं मिला। इसके बाद उसका मोबाइल नंबर लेकर उसकी लोकेशन ट्रेस कर पुलिस ने उसे सेक्टर-48 से गिरफ्तार कर लिया। अभिषेक के पास डड्डूमाजरा का आईडी प्रूफ था, इसलिए उसने उसी पते पर सिमकार्ड खरीदा था।
बॉक्स
जेल में मोबाइल कैसे पहुंचा, अब तक नहीं चला पता
जेल में मोबाइल कैसे पहुंचा, इसका पता पुलिस अब तक नहीं लगा पाई है। थाना प्रभारी जय प्रकाश ने बताया मोबाइल के बारे में आरोपियों से सुराग मिला है। मामले की जांच की जा रही है। उधर, जेल स्टाफ पर भी संदेह है क्योंकि जेल में आम लोगों की एंट्री नहीं है। कैदी को पेशी के लिए जेल से बाहर भी लेकर जाना होता है तो वापसी मेें उनकी कई जगह चेकिंग होती है। ऐसे में मोबाइल को जेल के अंदर ले जाना असंभव है। जेल में मोबाइल का इस्तेमाल न हो इसलिए प्रशासन ने जैमर तक लगाया है। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि मंजीत जेल में मोबाइल का कैसे इस्तेमाल कर रहा था। पुलिस के अनुसार मंजीत और हरीश ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह सेल में पंखे से तार को खींच लेते थे। उससे सर्किट बनाकर मोबाइल चार्ज करते थे। बता दें कि फरवरी 2022 में 8 नंबर बैरक से दीपक (37) और रजिंदर सिंह (38) से एक मोबाइल फोन, डिजिटल घड़ी, चार्जर, बैटरी, डाटा केबल और बिजली के तार बरामद हुए थे।
विज्ञापन
सेक्टर-49 थाना प्रभारी जय प्रकाश ने बताया कि जेल में जनवरी 2022 में एक सिमकार्ड पहुंचाया गया गया। बीते 2 जून को गैंगस्टर मंजीत से मोबाइल बरामद हुआ था। मोबाइल में सिम भी था। सिम की जांच करने पर पता चला कि सिम अभिषेक के नाम लिया गया है। इसके बाद पुलिस ने अभिषेक को गिरफ्तार किया।
विज्ञापन
अभिषेक ने बताया कि नोनी के कहने पर वह सिमकार्ड डड्डूमाजरा से लेकर आया था। उसने ही सिमकार्ड को गौरव को देने के लिए कहा था। इसके बाद नोनी और गौरव को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में गौरव ने बताया कि जेल में बंद हरीश ने उसे सिमकार्ड जेल कर्मचारी मनोज को देने को कहा था। मनोज ने सिमकार्ड हरीश तक पहुंचाया। थाना प्रभारी जय प्रकाश ने बताया कि आरोपी मनोज जेल में मल्टीटास्क स्टाफ (एमटीसी) के पद पर तैनात था और जेल की डिस्पेंसरी में उसकी ड्यूटी थी। मनोज बैरक और सेल में मोबाइल पहुंचाता था। इस दौरान उसने 12 चक्की के 9 नंबर सेल में हरीश को सिमकार्ड पहुंचाया था। पुलिस के अनुसार कॉल डिटेल डेढ़ से 200 पेज की निकली है। सिमकार्ड से कई लोगों को फोन किया गया, सभी नंबरों की जांच चल रही है। यह भी पता चला है कि हरीश जेल के लैंडलाइन नंबर से गौरव को फोन करता रहता था।
विज्ञापन
बता दें कि हरीश और गौरव ने एक साथ मिलकर एक हत्या की थी। गौरव उस समय नाबालिग था, ऐसे में उसे बाल सुुुधार गृह भेज दिया गया जबकि हरीश को बुड़ैल जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। हरीश और मंजीत एक ही सेल में बंद थे। जेल में हरीश की गौरव से बात होती थी।
बॉक्स
अभिषेक ने डड्डूमाजरा के पुराने पते पर लिया था सिमकार्ड
अभिषेक ने सिमकार्ड को अपने पुराने पते पर लिया था। जांच के दौरान जब पुलिस अभिषेक को तलाशते हुए उसके पते पर पहुंची तो पता चला वह पांच साल पहले ड्डडूमाजरा का मकान छोड़कर झामपुर में रहने चला गया है। पुलिस जब झामपुर पहुंची तो अभिषेक घर पर नहीं मिला। इसके बाद उसका मोबाइल नंबर लेकर उसकी लोकेशन ट्रेस कर पुलिस ने उसे सेक्टर-48 से गिरफ्तार कर लिया। अभिषेक के पास डड्डूमाजरा का आईडी प्रूफ था, इसलिए उसने उसी पते पर सिमकार्ड खरीदा था।
बॉक्स
जेल में मोबाइल कैसे पहुंचा, अब तक नहीं चला पता
जेल में मोबाइल कैसे पहुंचा, इसका पता पुलिस अब तक नहीं लगा पाई है। थाना प्रभारी जय प्रकाश ने बताया मोबाइल के बारे में आरोपियों से सुराग मिला है। मामले की जांच की जा रही है। उधर, जेल स्टाफ पर भी संदेह है क्योंकि जेल में आम लोगों की एंट्री नहीं है। कैदी को पेशी के लिए जेल से बाहर भी लेकर जाना होता है तो वापसी मेें उनकी कई जगह चेकिंग होती है। ऐसे में मोबाइल को जेल के अंदर ले जाना असंभव है। जेल में मोबाइल का इस्तेमाल न हो इसलिए प्रशासन ने जैमर तक लगाया है। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि मंजीत जेल में मोबाइल का कैसे इस्तेमाल कर रहा था। पुलिस के अनुसार मंजीत और हरीश ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह सेल में पंखे से तार को खींच लेते थे। उससे सर्किट बनाकर मोबाइल चार्ज करते थे। बता दें कि फरवरी 2022 में 8 नंबर बैरक से दीपक (37) और रजिंदर सिंह (38) से एक मोबाइल फोन, डिजिटल घड़ी, चार्जर, बैटरी, डाटा केबल और बिजली के तार बरामद हुए थे।