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PGI एंबुलेंस घोटाले में 3447 पेज की चार्जशीट दाखिल, ऐसे चलता था पूरा नेटवर्क
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 08 Feb 2018 09:31 AM IST
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Chandigarh PGI ambulance racket
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पीजीआई में 2016 में सामने आए फर्जी एंबुलेंस रैकेट मामले में पुलिस ने बुधवार को जिला अदालत में 11 आरोपियों के खिलाफ 3447 पेज का चालान दायर कर दिया। इनमें मुख्य सरगना गगनदीप मान उर्फ फौजी, जिसे अदालत पहले ही भगौड़ा (पीओ) करार दे चुकी है, उसका नाम भी शामिल है।
आरोपियों में सात पीजीआई के कर्मी भी शामिल हैं। पुलिस ने सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 384, 473 और 120बी के तहत आरोप पत्र दायर किया है। पुलिस ने चालान में आरोपियों के नेक्सस (रैकेट) को साबित करने के लिए उनके बीच फोन पर हुई बातचीत की करीब 1600 पेज की कॉल डिटेल बतौर सबूत पेश की है। यह केस में इनके खिलाफ सबसे अहम सबूतों में से एक है। मामले की अगली सुनवाई 6 मार्च को होगी।
पुलिस की ओर से दायर चालान में पीजीआई के सात कर्मचारियों सिक्योरिटी गार्ड विनोद कुमार, शशि, गुरकिरपाल, शव बांधने का काम करने वाले अश्विनी कुमार, तीरथपाल, अश्विनी के अलावा मोर्चरी में तैनात विक्की के नाम शामिल हैं। इनके अलावा मुख्य सरगना ट्रांसपोर्टर सतिंदर सत्ती और सहआरोपी राजकुमार उर्फ राजू, ट्रांसपोर्टर रविंदर और गगनदीप मान उर्फ फौजी के नाम शामिल हैं। इनमें केवल गगनदीप मान ही गिरफ्तार नहीं हो सका है।
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पुलिस ने बनाए 66 गवाह
पुलिस ने केस में 66 गवाह बनाए हैं। इनमें मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट की रेडक्रास सोसाइटी के मैनेजर अश्विनी खन्ना को शिकायतकर्ता और मुख्य गवाह बनाया गया है। इसके अलावा रेडक्रास सोसाइटी चंडीगढ़ और पंजाब की ओर से चलने वाली एंबुलेंस के चालकों को भी गवाह बनाया गया है। इन चालकों ने केस दर्ज होने से पहले भी सोसाइटी और पुलिस को निजी एंबुलेंस चालकों के खिलाफ शिकायत दी हुई थी। इन चालकों ने आरोपियों की पहचान भी की थी। इसके अलावा केस में 3 इंडिपेंडेंट गवाह भी बनाए गए हैं। वहीं, कुछ पीजीआई अधिकारियों और कर्मियों को भी केस में गवाह बनाया गया है।
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आरोपियों में सात पीजीआई के कर्मी भी शामिल हैं। पुलिस ने सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 384, 473 और 120बी के तहत आरोप पत्र दायर किया है। पुलिस ने चालान में आरोपियों के नेक्सस (रैकेट) को साबित करने के लिए उनके बीच फोन पर हुई बातचीत की करीब 1600 पेज की कॉल डिटेल बतौर सबूत पेश की है। यह केस में इनके खिलाफ सबसे अहम सबूतों में से एक है। मामले की अगली सुनवाई 6 मार्च को होगी।
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पुलिस की ओर से दायर चालान में पीजीआई के सात कर्मचारियों सिक्योरिटी गार्ड विनोद कुमार, शशि, गुरकिरपाल, शव बांधने का काम करने वाले अश्विनी कुमार, तीरथपाल, अश्विनी के अलावा मोर्चरी में तैनात विक्की के नाम शामिल हैं। इनके अलावा मुख्य सरगना ट्रांसपोर्टर सतिंदर सत्ती और सहआरोपी राजकुमार उर्फ राजू, ट्रांसपोर्टर रविंदर और गगनदीप मान उर्फ फौजी के नाम शामिल हैं। इनमें केवल गगनदीप मान ही गिरफ्तार नहीं हो सका है।
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पुलिस ने बनाए 66 गवाह
पुलिस ने केस में 66 गवाह बनाए हैं। इनमें मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट की रेडक्रास सोसाइटी के मैनेजर अश्विनी खन्ना को शिकायतकर्ता और मुख्य गवाह बनाया गया है। इसके अलावा रेडक्रास सोसाइटी चंडीगढ़ और पंजाब की ओर से चलने वाली एंबुलेंस के चालकों को भी गवाह बनाया गया है। इन चालकों ने केस दर्ज होने से पहले भी सोसाइटी और पुलिस को निजी एंबुलेंस चालकों के खिलाफ शिकायत दी हुई थी। इन चालकों ने आरोपियों की पहचान भी की थी। इसके अलावा केस में 3 इंडिपेंडेंट गवाह भी बनाए गए हैं। वहीं, कुछ पीजीआई अधिकारियों और कर्मियों को भी केस में गवाह बनाया गया है।
1600 पेज की कॉल डिटेल
चंडीगढ़ का पीजीआई अस्पताल
- फोटो : File Photo
1600 पेज की कॉल डिटेल
पुलिस ने चालान में करीब 1600 पेज की कॉल डिटेल पेश की है। ये कॉल डिटेल पीजीआई कर्मियों और निजी एंबुलेंस ऑपरेटरों के नेक्सस के बीच की है। इनमें से अधिकतर कॉल रात के समय की हैं। ये कॉल डिटेल इनके बीच नेक्सस साबित करने के लिए अहम सबूत हैं। इनके अलावा टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के एक्सपर्ट को भी टॉवर लोकेशन और कॉल डिटेल को पुख्ता करने के लिए केस में गवाह बनाया गया है।
यह है मामला
जून 2016 में पीजीआई में एंबुलेंस सेवा देने वाले दो गुटों में मारपीट की शिकायत सामने आई थी। सेक्टर-11 थाना पुलिस ने मौके से तीन एंबुलेंस चालकों को गिरफ्तार किया था। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी बिना परमिशन के पीजीआई में एंबुलेंस चला रहे थे। इस पर पुलिस ने मौके से दो एंबुलेंस जब्त की थी।
बाद में पुलिस ने पीजीआई प्रशासन को पत्र लिख फर्जी एंबुलेंस चालकों पर कार्रवाई की सिफारिश की है। पुलिस के पास पहले भी शिकायत आई थी कि ये एंबुलेंस चालक अन्य टैक्सी चालकों को वहां अपनी गाड़ियां नहीं लगाने देते थे। इससे अवैध रूप से चल रहे एंबुलेंस चालक लोगों से मनमाना किराया वसूलते थे। जांच में सामने आया कि इन एंबुलेंस चालकों का नेटवर्क इतना तेज था कि जैसे ही किसी मरीज की मौत होती थी या पोस्टमार्टम होता था तो ये तुरंत उसके पास पहुंच जाते थे।
मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने तीन दिन में कुल 12 फर्जी एंबुलेंस जब्त की थी। पुलिस ने केस में पीजीआई के सात कर्मचारियों, दो ट्रांसपार्टरों व एक अन्य को गिरफ्तार किया था। पीजीआई कर्मियों पर फर्जी एंबुलेंस चालकों को सूचना देने और बदले में उनसे कमीशन लेने का आरोप था।
पुलिस ने चालान में करीब 1600 पेज की कॉल डिटेल पेश की है। ये कॉल डिटेल पीजीआई कर्मियों और निजी एंबुलेंस ऑपरेटरों के नेक्सस के बीच की है। इनमें से अधिकतर कॉल रात के समय की हैं। ये कॉल डिटेल इनके बीच नेक्सस साबित करने के लिए अहम सबूत हैं। इनके अलावा टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के एक्सपर्ट को भी टॉवर लोकेशन और कॉल डिटेल को पुख्ता करने के लिए केस में गवाह बनाया गया है।
यह है मामला
जून 2016 में पीजीआई में एंबुलेंस सेवा देने वाले दो गुटों में मारपीट की शिकायत सामने आई थी। सेक्टर-11 थाना पुलिस ने मौके से तीन एंबुलेंस चालकों को गिरफ्तार किया था। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी बिना परमिशन के पीजीआई में एंबुलेंस चला रहे थे। इस पर पुलिस ने मौके से दो एंबुलेंस जब्त की थी।
बाद में पुलिस ने पीजीआई प्रशासन को पत्र लिख फर्जी एंबुलेंस चालकों पर कार्रवाई की सिफारिश की है। पुलिस के पास पहले भी शिकायत आई थी कि ये एंबुलेंस चालक अन्य टैक्सी चालकों को वहां अपनी गाड़ियां नहीं लगाने देते थे। इससे अवैध रूप से चल रहे एंबुलेंस चालक लोगों से मनमाना किराया वसूलते थे। जांच में सामने आया कि इन एंबुलेंस चालकों का नेटवर्क इतना तेज था कि जैसे ही किसी मरीज की मौत होती थी या पोस्टमार्टम होता था तो ये तुरंत उसके पास पहुंच जाते थे।
मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने तीन दिन में कुल 12 फर्जी एंबुलेंस जब्त की थी। पुलिस ने केस में पीजीआई के सात कर्मचारियों, दो ट्रांसपार्टरों व एक अन्य को गिरफ्तार किया था। पीजीआई कर्मियों पर फर्जी एंबुलेंस चालकों को सूचना देने और बदले में उनसे कमीशन लेने का आरोप था।