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स्मार्ट ग्रिड मिशन के लिए 30 करोड़ मंजूर, जल्द शुरू होगा काम
ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Tue, 26 Apr 2016 11:03 AM IST
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नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन के लिए भारत सरकार ने 30 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है। बजट मंजूर होने के बाद प्रोजेक्ट का ग्राउंड लेवल पर काम शुरू हो जाएगा। फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तहत इंडस्ट्रियल एरिया और उसके आसपास के कुछ क्षेत्र में ही स्मार्ट ग्रिड होगी। सफल होने के बाद इसे पूरे शहर में अपनाया जाएगा। हालांकि डिस्ट्रिक्ट इलेक्ट्रिसिटी कमेटी ने पायलट प्रोजेक्ट के लिए करीब 50 करोड़ का बजट पास कर मिनिस्ट्री को अप्रूवल के लिए भेजा था। फिलहाल मिनिस्ट्री ने 30 करोड़ को मंजूरी दी है।
नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन के तहत इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1, फेज-2, सेक्टर-29, 31, 47, 48, गांव हल्लोमाजरा, बहलाना, रायपुर खुर्द, कलां, मौली जागरां रामदरबार कॉलोनी और दड़वा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है। इन एरिया में सभी उपभोक्ताओं के पुराने मीटर स्मार्ट मीटर से बदले जाएंगे। जिसे एडवांस्ड मिटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (एएमआई) नाम दिया गया है। बिजली की सभी लाइन भी अंडर ग्राउंड होंगी। सब स्टेशन और सप्लाई नेटवर्क मजबूत होगा।
सकाडा करेगा कंट्रोल
इस पायलट प्रोजेक्ट का कंट्रोल बिजली विभाग में सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्यूजेशन (सकाडा) से होगा। इस कंट्रोल रूम में बैठा कर्मचारी किसी भी कंज्यूमर की कंजप्शन ज्यादा होने पर बिजली कट लगा देगा। साथ ही उसे मैसेज भी देगा। वहीं लाइन टूटने या फॉल्ट का भी पता लगता रहेगा। सकाडा से ही संबंधित एसडीओ को डायरेक्शन होगी। इसमें एरिया के उपभोक्ता की बिजली चली जाने पर दूसरे सब स्टेशन से सकाडा के कंप्यूटराइज सिस्टम से ऑटोमेटिक जोड़ी जाएगी। स्मार्ट मीटर का कंट्रोल बिजली विभाग के ऑफिस में होगा, बिलिंग भी सकाडा रूम से ही जेनरेट हो सकेगी। स्मार्ट मीटर लगने से बिजली चोरी का पता सकाडा में कंप्यूटर पर बैठे कर्मचारी को लग सकेगा। उसके खिलाफ वहीं से शिकायत भी दर्ज करवाई जा सकेगी।
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6 सब स्टेशनों की समयावधि हो चुकी है पूरी
इस समय चंडीगढ़ में 12 20 केवी सब-स्टेशन, 13 66 केवी सब-स्टेशन और 5 33 केवी सब-स्टेशन हैं। प्रत्येक सब स्टेशन की कार्यक्षमता समयावधि 25 साल की है। 66 केवी के 6 सब स्टेशनों की कार्यक्षमता का समय पूरा हो चुका है। ऐसे में सभी सब स्टेशनों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए स्मार्ट ग्रिड सिस्टम बेहद जरूरी है। बिजली विभाग के यूटी में 2.12 लाख उपभोक्ता हैं, जिसमें 1.75 लाख घरेलू हैं।
20 सालों को ध्यान में रख तैयार की है डीपीआर
नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन के लिए अभी 30 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। पायलट प्रोजेक्ट का काम अब जल्द शुरू हो जाएगा। इंडस्ट्रियल एरिया और इसके आसपास क्षेत्र को यह प्रोजेक्ट कवर करेगा। इंटिग्रेटिड पॉवर डेवलपमेंट स्कीम और स्मार्ट ग्रिड मिशन की डीपीआर अगले 20 सालों की जरूरतों को ध्यान में रख तैयार की गई है।
-सर्वजीत सिंह, सेक्रेटरी इंजीनियरिंग कम फाइनेंस, यूटी प्रशासन।
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नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन के तहत इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1, फेज-2, सेक्टर-29, 31, 47, 48, गांव हल्लोमाजरा, बहलाना, रायपुर खुर्द, कलां, मौली जागरां रामदरबार कॉलोनी और दड़वा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है। इन एरिया में सभी उपभोक्ताओं के पुराने मीटर स्मार्ट मीटर से बदले जाएंगे। जिसे एडवांस्ड मिटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (एएमआई) नाम दिया गया है। बिजली की सभी लाइन भी अंडर ग्राउंड होंगी। सब स्टेशन और सप्लाई नेटवर्क मजबूत होगा।
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सकाडा करेगा कंट्रोल
इस पायलट प्रोजेक्ट का कंट्रोल बिजली विभाग में सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्यूजेशन (सकाडा) से होगा। इस कंट्रोल रूम में बैठा कर्मचारी किसी भी कंज्यूमर की कंजप्शन ज्यादा होने पर बिजली कट लगा देगा। साथ ही उसे मैसेज भी देगा। वहीं लाइन टूटने या फॉल्ट का भी पता लगता रहेगा। सकाडा से ही संबंधित एसडीओ को डायरेक्शन होगी। इसमें एरिया के उपभोक्ता की बिजली चली जाने पर दूसरे सब स्टेशन से सकाडा के कंप्यूटराइज सिस्टम से ऑटोमेटिक जोड़ी जाएगी। स्मार्ट मीटर का कंट्रोल बिजली विभाग के ऑफिस में होगा, बिलिंग भी सकाडा रूम से ही जेनरेट हो सकेगी। स्मार्ट मीटर लगने से बिजली चोरी का पता सकाडा में कंप्यूटर पर बैठे कर्मचारी को लग सकेगा। उसके खिलाफ वहीं से शिकायत भी दर्ज करवाई जा सकेगी।
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6 सब स्टेशनों की समयावधि हो चुकी है पूरी
इस समय चंडीगढ़ में 12 20 केवी सब-स्टेशन, 13 66 केवी सब-स्टेशन और 5 33 केवी सब-स्टेशन हैं। प्रत्येक सब स्टेशन की कार्यक्षमता समयावधि 25 साल की है। 66 केवी के 6 सब स्टेशनों की कार्यक्षमता का समय पूरा हो चुका है। ऐसे में सभी सब स्टेशनों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए स्मार्ट ग्रिड सिस्टम बेहद जरूरी है। बिजली विभाग के यूटी में 2.12 लाख उपभोक्ता हैं, जिसमें 1.75 लाख घरेलू हैं।
20 सालों को ध्यान में रख तैयार की है डीपीआर
नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन के लिए अभी 30 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। पायलट प्रोजेक्ट का काम अब जल्द शुरू हो जाएगा। इंडस्ट्रियल एरिया और इसके आसपास क्षेत्र को यह प्रोजेक्ट कवर करेगा। इंटिग्रेटिड पॉवर डेवलपमेंट स्कीम और स्मार्ट ग्रिड मिशन की डीपीआर अगले 20 सालों की जरूरतों को ध्यान में रख तैयार की गई है।
-सर्वजीत सिंह, सेक्रेटरी इंजीनियरिंग कम फाइनेंस, यूटी प्रशासन।