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Chandigarh News: 266 प्लॉट खाली पड़े, प्रशासन की नींद कब टूटेगी

Fri, 11 Sep 2026 01:37 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2026 01:37 AM IST
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266 plots lying vacant; when will the administration wake up?

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चंडीगढ़। शहर में रोजगार, निवेश और कारोबार को बढ़ावा देने के लिए लगातार योजनाएं बनाने की बात होती है, लेकिन प्रशासन के पास उपलब्ध सैकड़ों प्लॉट वर्षों से खाली पड़े हैं। शहर में 171 कमर्शियल और 95 इंडस्ट्रियल समेत कुल 266 प्लॉट खाली हैं। सीमित जमीन वाले शहर में इन संपत्तियों का उत्पादक इस्तेमाल नहीं होने पर प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। क्या प्रशासन के पास इनका बेहतर आर्थिक उपयोग करने को लेकर कोई स्पष्ट विजन है? यह सवाल सेकेंड इनिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके गर्ग ने उठाया है।
गर्ग ने कहा कि चंडीगढ़ में नई जमीन की उपलब्धता बेहद सीमित है। ऐसे में पहले से उपलब्ध जमीन को आर्थिक गतिविधियों में लाना रोजगार और निवेश बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। खाली पड़े प्रत्येक कमर्शियल या इंडस्ट्रियल प्लॉट पर कार्यालय, उद्योग, सर्विस सेक्टर की इकाई या रोजगार देने वाला अन्य कारोबार विकसित किया जा सकता है। इससे प्रत्यक्ष रोजगार के साथ परिवहन, खान-पान, खुदरा कारोबार और अन्य सेवाओं से जुड़े रोजगार भी बढ़ेंगे।
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जमीन को राजस्व नहीं, रोजगार का साधन बनाएं
आरके गर्ग ने कहा कि खाली प्लॉटों को केवल राजस्व जुटाने वाली संपत्ति के तौर पर देखने के बजाय इनके आर्थिक प्रभाव को भी आकलन का आधार बनाया जाना चाहिए। प्रशासन को यह देखना चाहिए कि किसी प्लॉट के उपयोग में आने से कितना निवेश आएगा, कितने कारोबार शुरू हो सकते हैं और कितने रोजगार पैदा होंगे।
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उन्होंने सभी खाली कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्लॉटों की समयबद्ध समीक्षा की मांग की। जिन मामलों में कानूनी और नीतिगत रूप से संभव हो, उन्हें पारदर्शी नीलामी या आवंटन प्रक्रिया के जरिये वास्तविक उपयोग में लाया जाए। रोजगार पैदा करने वाले कारोबार, स्टार्टअप और उपयुक्त उद्योगों को प्राथमिकता देने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।

ट्राइसिटी की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा फायदा
गर्ग ने कहा कि इन प्लॉटों का विकास केवल चंडीगढ़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरे चंडीगढ़-मोहाली-पंचकूला क्षेत्र पर पड़ सकता है। नए कारोबार शुरू होने से निवेश आएगा, रोजगार बढ़ेंगे और सहायक कारोबारी गतिविधियों को भी गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन को प्रत्येक खाली प्लॉट की स्थिति की पहचान कर उसकी समीक्षा करनी चाहिए। इसके बाद नीलामी या आवंटन के जरिये विकास की समयसीमा तय हो। लंबे समय तक जमीन को खाली रखना सीमित भूमि संसाधनों का कम उत्पादक इस्तेमाल है।
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