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पीजीआई की इमरजेंसी में 21 बेड, रोजाना आते हैं 150-200 मरीज
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पीजीआई की इमरजेंसी में 21 बेड, रहते हैं 150-200 मरीज
सबहेड
बिहार निवासी सूरज कुमार ने इमरजेंसी की अव्यवस्था पर पीएमओ को दी थी शिकायत
प्वाइंटर
पीएमओ कार्यालय ने पीजीआई को स्थिति सुधारने को कहा
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पीजीआई के इमरजेंसी में फैली अव्यवस्था की शिकायत बिहार निवासी सूरज कुमार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से की थी। पीएमओ कार्यालय ने इस बारे में पीजीआई को अवगत कराया और जल्द से जल्द निदान करने के निर्देश दिए। पीजीआई ने सूरज को भेजे अपने जवाब में बताया है कि इमरजेंसी में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार व पश्चिम बंगाल से मरीज आते हैं। इमरजेंसी की ओपीडी के हाल बी में कुल 21 बेड हैं, जबकि इनके मुकाबले रोजाना 150-200 मरीज ओपीडी में आते हैं।
ऐसे में अधिकतर मरीजों को ट्राली में ही रखना पड़ता है। इमरजेंसी एरिया में बेसिक ब्लड इन्वेस्टीगेशन, ईसीजी, यूएसजी और सीटी स्कैन की सुविधा रहती है। सूरज ने अपनी शिकायत ने बताया था कि वह अपनी मां का इलाज कराने पीजीआई आया था। उसकी मां की हार्ट की सर्जरी होनी थी। सर्जरी से पहले उसकी मां की तबीयत खराब हो गई। आनन-फानन में इमरजेंसी में एडिमट कराना पड़ा लेकिन इमरजेंसी के डाक्टरों ने इलाज करने की बजाय उससे बदतमीजी की। इससे उसे मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि सूरज का यह भी कहना है कि जब उसकी मां को कार्डियक सेंटर में लेकर गए तो वहां के डाक्टरों का रवैया बेहतर था। डाक्टर सचिन महाजन ने उनकी मां की सर्जरी की।
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बिहार निवासी सूरज कुमार ने इमरजेंसी की अव्यवस्था पर पीएमओ को दी थी शिकायत
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माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पीजीआई के इमरजेंसी में फैली अव्यवस्था की शिकायत बिहार निवासी सूरज कुमार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से की थी। पीएमओ कार्यालय ने इस बारे में पीजीआई को अवगत कराया और जल्द से जल्द निदान करने के निर्देश दिए। पीजीआई ने सूरज को भेजे अपने जवाब में बताया है कि इमरजेंसी में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार व पश्चिम बंगाल से मरीज आते हैं। इमरजेंसी की ओपीडी के हाल बी में कुल 21 बेड हैं, जबकि इनके मुकाबले रोजाना 150-200 मरीज ओपीडी में आते हैं।
ऐसे में अधिकतर मरीजों को ट्राली में ही रखना पड़ता है। इमरजेंसी एरिया में बेसिक ब्लड इन्वेस्टीगेशन, ईसीजी, यूएसजी और सीटी स्कैन की सुविधा रहती है। सूरज ने अपनी शिकायत ने बताया था कि वह अपनी मां का इलाज कराने पीजीआई आया था। उसकी मां की हार्ट की सर्जरी होनी थी। सर्जरी से पहले उसकी मां की तबीयत खराब हो गई। आनन-फानन में इमरजेंसी में एडिमट कराना पड़ा लेकिन इमरजेंसी के डाक्टरों ने इलाज करने की बजाय उससे बदतमीजी की। इससे उसे मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि सूरज का यह भी कहना है कि जब उसकी मां को कार्डियक सेंटर में लेकर गए तो वहां के डाक्टरों का रवैया बेहतर था। डाक्टर सचिन महाजन ने उनकी मां की सर्जरी की।
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