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शुरू होने वाले हैं श्राद्ध, जानिए किस तारीख को कौन सा श्राद्ध?

Sun, 11 Sep 2016 10:04 AM IST
नीरज कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
नीरज कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 11 Sep 2016 10:04 AM IST
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2016 Shradh, Pitru Paksha Shradha, Shradha schedule, Shradha dates
श्राद्ध 2016 का शेड्यूल - फोटो : डेमो फोटो
श्राद्ध पक्ष का प्रारंभ 16 सितंबर को (पूर्णिमा, शुक्रवार) चंद्र ग्रहण से हो रहा है, जिसकी समाप्ति 30 सितंबर,(अमावस्या, शुक्रवार) को होगा।
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श्राद्ध की तिथियां
पूर्णिमा का श्राद्ध--------------16 सितंबर शुक्रवार
प्रतिपदा का श्राद्ध-------------17 सितंबर शनिवार  
द्वितीया का श्राद्ध--------------18 सितंबर रविवार
तृतीया और चतुर्थी का श्राद्ध-----19 सितंबर सोमवार
पंचमी और भरणी का श्राद्ध------20 सितंबर मंगलवार
षष्टी का श्राद्ध----------------21 सितंबर बुधवार
सप्तमी का श्राद्ध--------------22 सितंबर वीरवार
अष्टमी का श्राद्ध--------------23 सितंबर शुक्रवार
नववीं का श्राद्ध---------------24 सितंबर शनिवार
दशवीं  का श्राद्ध--------------25 सितंबर रविवार
एकादशी का श्राद्ध-------------26 सितंबर सोमवार
द्वादशी का श्राद्ध---------------27 सितंबर मंगलवार
त्रयोदशी का श्राद्ध------------28 सितंबर बुधवार
चतुर्दशी का श्राद्ध-------------29 सितंबर वीरवार
अमावस्या का श्राद्ध-----------30 सितंबर शुक्रवार 

इतने प्रकार के होते हैं श्राद्ध

2016 Shradh, Pitru Paksha Shradha, Shradha schedule, Shradha dates
श्राद्ध 2016 का शेड्यूल - फोटो : डेमो फोटो
सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर में पुजारी और देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष डॉ. लाल बहादुर दुबे का कहना है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु पूर्णिमा को हो तो उसका श्राद्ध भाद्र शुक्ल पूर्णिमा को करना चाहिए। इसमें दादा -दादी, परदादी और नाना नानी का श्राद्ध करना चाहिए।

भरणी का श्राद्ध
20 सितंबर को मंगलवार को पंचमी और भरणी का श्राद्ध है। पभरणी नक्षत्र में पितरों का पार्वणा श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। यह श्राद्ध करने से गया श्राद्ध करने का महत्व है। नवमी तिथि को सौभाग्यवती स्त्रियों का श्राद्ध किया जाता है।

संन्यासियों का श्राद्ध
संन्यासियों का श्राद्ध पार्वणा पद्धति से द्वादशी में किया जाता है। भले ही इनकी मृत्यु तिथि कोई भी क्यों न हो।

मघा त्रयोदशी का श्राद्ध
सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री का कहना है कि  28 सितंबर दिन बुधवार को मघा नक्षत्र होने के कारण मघा त्रयोदशी का श्राद्ध कहते हैं। आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी में पितृ श्राद्ध का बहुत महत्व है। त्रयोदशी के साथ मघा नक्षत्र  हो तो इसका महत्व यह है कि यदि श्राद्ध किया जाए तो पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।

अकाल मृत्यु वालों का श्राद्ध
सेक्टर-15 स्थित जय श्री राम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख स्वामी राम बहादुर मिश्रा के अनुसार वाहन दुर्घटना, सांप के काटने से, विष के खाने से, अकाल मृत्यु के कारण जिसकी मृत्यु हुई हो उसका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि में करनी चाहिए। चतुर्दशी तिथि में मरनेवालों का श्राद्ध चतुर्दशी में नहीं करनी चाहिए। इसका श्राद्ध त्र्योदशी या अमावस्या को करनी चाहिए। जिसे किसी की मृत्यु की तिथि का ज्ञान न हो उसका श्राद्ध अमावस्या को करनी चाहिए।

पंचवली का विशेष महत्व
बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार श्राद्ध में पिंड दान और तर्पण करने के बाद पंचवली करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। पंचवली के बिना श्राद्ध पूर्ण नहीं होता।
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कैसे करें श्राद्ध दान?

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श्राद्ध 2016 का शेड्यूल - फोटो : डेमो फोटो
गो को पश्चिम दिशा में मुख करके पत्ते पर देना चाहिए।
कुत्ते को जमीन पर।
कौवा को पृथ्वी पर
देवता मनुष्य, यक्ष आदि को पत्ते पर
कीड़ा मकोड़ों चीटियों को पत्ता पर देना चाहिए।
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