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Chandigarh News: पटाखा जलाते समय 200 झुलसे, 79 को आंखों में लगी चोट

Tue, 21 Oct 2025 07:51 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 21 Oct 2025 07:51 PM IST
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200 people suffered burn injuries while lighting firecrackers, 79 suffered eye injuries.
पीजीआई समेत अन्य अस्पताल में 48 घंटे में झुलसकर 200 लोग पहुंचे
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आंख में चोट का सबसे छोटा मरीज सिर्फ तीन साल का, 10 लोगों का करना पड़ा ऑपरेशन
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। दिवाली की रोशनी कुछ घरों में मुश्किलें लेकर आई। आतिशबाजी में 79 मरीजों की आंखें चोटिल हुईं। इन लोगों को पीजीआई समेत अन्य अस्पतालों की इमरजेंसी में भर्ती किया गया। वहीं, पिछले 48 घंटे में पटाखा जलाने में 200 लोग झुलसकर अस्पताल पहुंचे।

पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के प्रमुख प्रो. एसएस पांडव ने बताया कि पटाखे से आंख में चोट लेकर पहुंचने वाले में 23 पुरुष और 3 महिलाएं शामिल थीं। चौंकाने वाली बात यह रही कि 13 मरीज यानी कुल मामलों के 50 प्रतिशत बच्चे (14 वर्ष या इससे कम उम्र) के थे। इनमें सबसे छोटा बच्चा 3 साल का था। 14 मरीज ट्राइसिटी (9 चंडीगढ़ और 5 मोहाली से) जबकि 12 मरीज पड़ोसी राज्यों पंजाब (8), हरियाणा (1) और हिमाचल प्रदेश से थे।
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घायलों में 11 पर्यवेक्षक (बाईस्टैंडर) थे जो खुद पटाखे नहीं जला रहे थे जबकि 15 लोग खुद पटाखे फोड़ते समय घायल हुए। सबसे ज्यादा मामले बम (11) जलाने के रहे। अन्य में रॉकेट (3), स्काई शॉट (4), फुलझड़ी (1), पोटाश गन (1) और मोमबत्ती-लैंटर्न (1) से चोटें आईं। इनमें से 10 मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत पड़ी और सभी की सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। 19 मरीजों को क्लोज्ड ग्लोब इंजरी हुई, जिनमें से 4 की चोटें गंभीर थीं। पिछले वर्षों की तुलना में यह संख्या 2024 (21 केस) से थोड़ी अधिक रही। आंकड़ों के अनुसार, 2020 में 27, 2021 में 15, 2022 में 40, 2023 में 41, 2024 में 21, और 2025 में 26 केस दर्ज हुए।
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प्लास्टिक सर्जरी विभाग में सात की हुई सर्जरी
प्लास्टिक सर्जरी विभाग में पटाखों से घायल सात मरीज पहुंचे। इनमें से तीन के हाथों में पटाखे फटने से गंभीर चोटें आईं जबकि एक मरीज के चेहरे पर चोट लगी। सभी मरीजों का एडवांस ट्रॉमा सेंटर में सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। इनमें से एक मरीज को मामूली (तीन प्रतिशत से कम) जलन थी जिसे इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। वहीं, दो मरीज गंभीर रूप से झुलसने के कारण बर्न आईसीयू और हाई डिफेंसिव यूनिट में उपचाराधीन हैं।

केस -
पंचकूला निवासी 3 साल का आयुष (बदला हुआ नाम) दिवाली की रात घर के बाहर आतिशबाजी देख रहा था। अचानक बम फटने पर पटाखे का टुकड़ा सीधे उसकी आंख पर आकर गिरा। इससे वह बुरी तरह चीख उठा। माता-पिता तत्काल उसे लेकर अस्पताल पहुंचे। जहां से उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। उसके आंख की सर्जरी करनी पड़ी। पिता ने कहा कि पटाखों की घटना से वह डरे हुए थे इसलिए उन्होंने अपने बच्चों को पटाखा खरीदकर नहीं दिया लेकिन दूर से आई चिंगारी ने उनके बच्चे की आंख को जला दिया है।


स्वास्थ्य विभाग के अस्पताल में इतनों का हुआ इलाज

पटाखों से 193 लोगों ने जलने पर और 53 लोगों ने आंख में चोट लगने पर शहर के चारों सरकारी अस्पतालों जीएमएसएच-16, सिविल अस्पताल मनीमाजरा, सेक्टर-22 और सेक्टर-45 की इमरजेंसी में इलाज कराया। जीएमएसएच-16 में 100 झुलसने और 40 आंखों की चोट के केस दर्ज किए गए। सिविल अस्पताल मनीमाजरा में झुलसने के 41 और 7 आंख की चोट के, सेक्टर-22 अस्पताल में 7 झुलसने के और आंख में चोट के 2 मरीज, और सेक्टर-45 अस्पताल में झुलसने के 45 और आंख में चोट के 4 मरीज पहुंचे। चारों अस्पतालों से कुल 8 मरीजों को गंभीर आंख की चोटों के चलते पीजीआई रेफर किया गया। वहीं, जीएमसीएच 32 में दिवाली के दौरान कुल 36 मरीज पटाखा हादसों से पहुंचे। इनमें 17 को आंखों में चोट, जबकि 19 अन्य को चेहरे व हाथों पर चोटें आईं। 11 मरीजों को भर्ती किया गया जबकि 24 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
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