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'1984 के दंगों पर अरुण जेटली के दोहरे मानदंड'

Thu, 24 Apr 2014 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर Updated Thu, 24 Apr 2014 12:51 AM IST
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1984 delhi sikh riots and BJP politics

दिल्ली के 1984 दंगा पीड़ितों ने भाजपा प्रत्याशी अरुण जेटली के दोहरे मानदंडों पर सवाल उठाया है।

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दंगा पीड़ितों की इंसाफ कमेटी के प्रधान ने आरोप लगाया है कि जेटली के नजदीकी साथी और सहायक मुकुल रोहतगी ने जगदीश टाइटलर के साथ ही सज्जन कुमार को भी अदालतों से बचाया था।

यही रोहतगी नरेंद्र मोदी का गुजरात दंगों से संबंधित विभिन्न केसों में अदालतों से बचाव करते आ रहे हैं। रोहतगी को हाल ही में अमृतसर में जेटली के लिए प्रचार करते देखा गया था।
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परमजीत सिंह सरना और चरणजीत सिंह चन्नी के साथ बुधवार को पत्रकार वार्ता में 1984 के सिख कत्लेआम इंसाफ कमेटी के प्रधान गुरजीत सिह काहलों ने आरोप लगाया कि जेटली ने टाइटलर, सज्जन कुमार और प्रकाश सिंह बादल के बीच 2001 में समझौता करवाने में भी सहायता की थी।
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काहलों ने कहा कि वे दंगों में शामिल आरएसएस-भाजपा वर्करों को बचाना चाहते थे। इस सौदेबाजी में उन्होंने टाइटलर और सज्जन कुमार से समझौता किया। दंगा पीड़ितों ने सवाल किया है कि क्यों जेटली और बादल सिख विरोधी दंगों में आरएसएस व भाजपा वर्करों की भूमिका पर चुप हैं।

काहलों ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने हमेशा से अपने सियासी हितों की खातिर 1984 दंगों के मुद्दे को भड़काया है। वे कभी भी दंगा पीड़ितों के प्रति वफादार नहीं रहे और उनके लिए कुछ भी नहीं किया।

उन्होंने सिर्फ कुछ लोगों को फायदा पहुंचाया, जिन्हें वे अपने सियासी हितों की खातिर इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्यों बादल ने दंगा पीड़ितों के लिए आए 260 करोड़ रुपये वापस भेज दिए थे।

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिह के नेतृत्व में दंगा पीड़ितों को बांटने के लिए 460 करोड़ रुपये भेजे थे। इसमें से कैप्टन अमरिंदर ने दो लाख रुपये प्रति पीड़ित के हिसाब से 200 करोड़ रुपये बांट दिए थे। लेकिन, बादल ने सत्ता में आने के बाद भुगतान बंद कर दिया और पैसे केंद्र को वापस भेज दिए।


अकालियों के प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा कि दंगा पीड़ितों के नेता कहलाने वाले दोनों गुरदीप कौर और सुरजीत सिह दागी चरित्र के मालिक हैं।

उन्होंने कहा कि विजिलेंस ब्यूरो ने इन दोनों के खिलाफ केस दर्ज करने की सिफारिश की थी। बादल इनको बचा रहे हैं, क्योंकि वे इन्हें कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शनों के लिए इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बच्चे एसजीपीसी के खर्चे पर विदेशों में पढ़ रहे हैं।

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